JPSC Exam Scam: CID जांच में बड़ा खुलासा, कई राज्यों में परीक्षा कराने वाली कंपनियों का सामने आया सिंडिकेट

 JPSC परीक्षा घोटाले की CID जांच में बिंसिस और ICN इंडिया समेत कई कंपनियों का नाम सामने आया है। जांच में परीक्षा फर्जीवाड़े के बड़े सिंडिकेट का खुलासा हुआ।


JPSC Exam Scam रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, सीआइडी को परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनियों और कथित सिंडिकेट के बारे में नयी जानकारी मिल रही है। जांच में TDPL, बिंसिस और ICN जैसी कंपनियों के नाम सामने आये हैं, जो झारखंड के अलावा देश के कई राज्यों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी रही हैं।

सीआइडी की जांच के अनुसार बिंसिस और ICN इंडिया के निदेशकों पर झारखंड में सीजीएल समेत अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी और फर्जीवाड़े में शामिल होने के आरोप हैं। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन कंपनियों से जुड़ा एक संगठित सिंडिकेट देश के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय रहा है। झारखंड में अभय तिवारी और मुख्य सचिव कार्यालय में कार्यरत रहे धर्मेंद्र को भी इस कथित नेटवर्क की अहम कड़ी बताया जा रहा है।

बिंसिस के निदेशक अरुण शर्मा को रांची पुलिस ने मंगलवार को मुंबई से गिरफ्तार किया है। वहीं ICN इंडिया के निदेशक के रूप में मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह का नाम सामने आया है। मामले में आरोपों की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

JPSC Exam Scam: ब्लैकलिस्ट होने के बाद नाम बदलकर परीक्षा का काम लेने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया है कि बिंसिस टेक्नोलॉजी को वर्ष 2023 में ब्लैकलिस्ट किया गया था। आरोप है कि इसके बाद इससे जुड़े लोगों ने नाम बदलकर ICN इंडिया के नाम से परीक्षा संचालन का काम हासिल किया। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इन कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में किस तरह काम मिला और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

आरोप है कि बिंसिस और ICN ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में परीक्षा संचालन का काम किया था। सीआइडी अब कंपनियों के निदेशकों, उनके सहयोगियों और आयोग से जुड़े लोगों के बीच संपर्क की भी जांच कर रही है।

जांच में जिन परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आये हैं, उनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की परीक्षा, रेलवे भर्ती, बिहार सिपाही भर्ती, JPSC परीक्षाएं, सैन्य अभियंता सेवा पुणे की वर्ष 2021-22 की परीक्षा, JSSC JE परीक्षा, स्नातक स्तरीय परीक्षा, राजस्थान PCS, तेलंगाना मेडिकल परीक्षा, पंजाब की परीक्षाएं और NTPC की परीक्षाएं शामिल हैं।


Key Highlights

  • JPSC परीक्षा घोटाले की CID जांच में कई परीक्षा संचालन कंपनियों के नाम सामने आये

  • बिंसिस के निदेशक अरुण शर्मा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया

  • ICN इंडिया के निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह का नाम जांच में सामने आया

  • अभय तिवारी ने JPSC, ACF, FRO और बैकलॉग परीक्षाओं में पैसे लेकर अभ्यर्थियों को पास कराने के आरोप लगाये

  • जांच एजेंसी कथित राष्ट्रीय स्तर के परीक्षा सिंडिकेट और उससे जुड़े लोगों की भूमिका खंगाल रही है


JPSC Exam Scam: अभय तिवारी के बयान से सामने आये गंभीर आरोप

सीआइडी के समक्ष दिये गये बयान में अभय तिवारी ने JPSC की 14वीं परीक्षा, ACF और FRO परीक्षा तथा बैकलॉग परीक्षा में अभ्यर्थियों को पैसे लेकर सफल कराने के गंभीर आरोप लगाये हैं। उसके अनुसार 14वीं JPSC परीक्षा में 100 से अधिक, ACF और FRO में करीब 100 तथा JPSC बैकलॉग परीक्षा में भी करीब 100 अभ्यर्थियों को पैसे लेकर पास कराया गया।

जांच में TDPL से जुड़े उस्मान के बयान का भी उल्लेख सामने आया है। उसके अनुसार उसने वर्ष 2025 में TDPL में टेक्निकल स्टाफ के तौर पर काम शुरू किया था। प्रदीप कुमार सिंह इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, जबकि OMR से जुड़े काम में प्रदीप कुमार और OMS से जुड़े काम में हेमंत कुमार वर्मा की भूमिका थी। आरोप है कि टेंपरिंग और मैनुपुलेशन का काम हेमंत कुमार वर्मा और संजय मिलकर करते थे।

अभय तिवारी ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि CDPO परीक्षा में 10-10 लाख रुपये लेकर झारखंड के बाहर के अभ्यर्थियों को सामान्य सीट पर सफल कराया गया। उसने हरिओम टावर में सानंद प्रकाश के नाम से कमरा लिये जाने और लखनऊ, पंजाब तथा हरियाणा से एजेंटों के माध्यम से लोगों को बुलाये जाने की बात भी कही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

JPSC Exam Scam: करोड़ों की संपत्ति और फिल्म बनाने का भी आरोप

सीआइडी जांच में आरोपी अरुण शर्मा से जुड़ी संपत्तियों और गतिविधियों की भी पड़ताल की जा रही है। आरोप है कि उसने परीक्षा संचालन से जुड़े काम के जरिये करोड़ों की संपत्ति अर्जित की और एक फिल्म भी बनायी, जिसका नाम “सेटर्स” रखा गया था।

जांच एजेंसी ने मुख्य सचिव कार्यालय में कार्यरत रहे धर्मेंद्र से भी पूछताछ कर परीक्षा संचालन और कथित सिंडिकेट से जुड़ी जानकारी हासिल की है। वहीं डॉ. जमाल ने सीआइडी के समक्ष खुद को निर्दोष बताया है। मामले में गिरफ्तार अरुण शर्मा को पांच दिन की रिमांड पर लिये जाने की जानकारी भी सामने आयी है।

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