JPSC JET Case: झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार को दिया शपथ पत्र दायर करने का समय

JPSC JET परीक्षा में लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विषय को बाहर रखने के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया, अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को।


JPSC JET Case रांची: झारखंड हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत में जेपीएससी (JPSC) द्वारा आयोजित जेईटी परीक्षा (Jharkhand Eligibility Test) से लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विषय को बाहर रखने के खिलाफ दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी, राज्य सरकार और जेपीएससी — तीनों पक्षों को सुना। इसके बाद अदालत ने राज्य सरकार को शपथ पत्र (Affidavit) दायर करने के लिए समय प्रदान किया

मामले की अगली सुनवाई की तिथि 16 अक्टूबर तय की गई है।


Key Highlights:

  • JPSC JET परीक्षा से Library and Information Science विषय को बाहर रखने पर हाईकोर्ट में सुनवाई

  • जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने राज्य सरकार को शपथ पत्र दायर करने का समय दिया

  • अगली सुनवाई की तिथि 16 अक्टूबर तय

  • JPSC ने कहा — विषयों का निर्धारण राज्य सरकार के नियमों के अनुसार

  • प्रार्थी ने कहा — लाइब्रेरी साइंस यूजीसी मान्य विषय है, फिर भी बाहर रखा गया


JPSC JET Case:

जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल ने अदालत को बताया कि वर्ष 2007 के बाद से जेईटी परीक्षा राज्य सरकार द्वारा भेजी गई नियमावली के आधार पर आयोजित की जा रही है, जिसमें कुल 54 विषय शामिल हैं
उन्होंने कहा कि किसी विषय को शामिल करने या बाहर रखने का अधिकार केवल राज्य सरकार का है, आयोग को इस पर कोई निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

JPSC JET Case:

वहीं, राज्य सरकार की ओर से अदालत से शपथ पत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

प्रार्थी राजेश कुमार की ओर से बताया गया कि जेईटी परीक्षा के लिए जारी विज्ञापन में 54 विषय तो शामिल हैं, लेकिन लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विषय को बाहर रखा गया है, जबकि यह एक यूजीसी मान्यता प्राप्त विषय है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों में सहायक पुस्तकालय अध्यक्ष और लाइब्रेरी प्रोफेशनल्स के कई पद वर्षों से रिक्त हैं, बावजूद इसके यह विषय परीक्षा से बाहर रखा गया है।

पिछली सुनवाई में अदालत ने यह सवाल उठाया था कि लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस विषय को जेईटी परीक्षा से क्यों हटाया गया, और राज्य में इस क्षेत्र के कितने पद स्वीकृत व रिक्त हैं
अब इस पर राज्य सरकार को विस्तृत जवाब देना है।

Saffrn

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