‘MNREGA/VB-G RAM-G निधियों से बिहार में होगी नहरों व उपवितरणियों की व्यापक सफाई’

पटना : विकास आयुक्त बिहार मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में ग्रामीण विकास विभाग एवं जल संसाधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए मनरेगा/VB-G RAM-G निधियों के प्रभावी उपयोग को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में नहरों, उपवितरणियों एवं जल निकासी तंत्र की सफाई के माध्यम से सिंचाई क्षमता बढ़ाने और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण कार्यों को गति देने पर विशेष बल दिया गया। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह व निदेशक अभिलाषा कुमारी शर्मा सहित इन दोनों विभागों के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

बिहार में कुल संभावित सिंचाई क्षमता 53.53 लाख हेक्टेयर आंकी गई है

बिहार में कुल संभावित सिंचाई क्षमता 53.53 लाख हेक्टेयर आंकी गई है। वर्तमान में राज्य में कुल सिंचाई सृजन क्षमता 38.20 लाख हेक्टेयर है, जबकि उपयोगी सिंचाई क्षमता 28.92 लाख हेक्टेयर है। सिंचाई क्षमता और उसके वास्तविक उपयोग के बीच अंतर का प्रमुख कारण नहरों का पानी टेल एंड तक नहीं पहुंच पाना है। पारंपरिक रखरखाव व्यवस्था पर्याप्त प्रभावी नहीं होने के कारण उपवितरणियों एवं छोटी नहरों की नियमित सफाई नहीं हो पाती थी। इसी को ध्यान में रखते हुए अब 20 क्यूसेक से कम क्षमता वाली उपवितरणियों की सफाई जल संसाधन विभाग द्वारा मनरेगा एवं VB-GRAM-G जैसी योजनाओं के माध्यम से कराए जाने की पहल की जा रही है, ताकि अंतिम छोर तक सिंचाई जल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके तथा राज्य में सिंचाई क्षमता के उपयोग को बढ़ाया जा सके।

अब बिहार में भी अन्य राज्यों की तर्ज पर बड़े स्तर पर नहरों एवं उपवितरणियों की सफाई का कार्य कराया जाएगा – विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह

बैठक को संबोधित करते हुए विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि अब बिहार में भी अन्य राज्यों की तर्ज पर बड़े स्तर पर नहरों एवं उपवितरणियों की सफाई का कार्य कराया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि 20 क्यूसेक अथवा उससे अधिक जलप्रवाह वाली उपवितरणियों की सफाई जल संसाधन विभाग द्वारा मनरेगा एवं VB-G RAM-G निधियों की सहायता से कराई जाएगी। इसके माध्यम से सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने, खेतों तक पानी पहुँचाने तथा जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

मनरेगा के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा कार्यान्वयन इकाई के रूप में योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा

मनरेगा के अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा कार्यान्वयन इकाई के रूप में योजनाओं का क्रियान्वयन किया जाएगा। कार्यपालक अभियंता जल संसाधन विभाग योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए कार्यान्वयन एजेंसी होंगे, जबकि जल संसाधन विभाग के कनीय अभियंता योजनाओं के समन्वयक के रूप में कार्य करेंगे। इसके अंतर्गत नहरों एवं कैनालों के डी-सिल्टेशन (गाद सफाई) तथा चौर क्षेत्रों से जल निकासी से संबंधित योजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जल संसाधन विभाग के कार्य प्रमंडलों द्वारा योजनाओं की पहचान की जाएगी और चयनित योजनाओं को संबंधित प्रखंड एवं ग्राम पंचायतवार चिह्नित किया जाएगा।

कार्यपालक अभियंता द्वारा चिह्नित योजनाओं को मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना में शामिल करने हेतु इसकी सूची जिला कार्यक्रम समन्वयक को उपलब्ध कराई जाएगी

कार्यपालक अभियंता द्वारा चिह्नित योजनाओं को मनरेगा की वार्षिक कार्य योजना में शामिल करने हेतु इसकी सूची जिला कार्यक्रम समन्वयक को उपलब्ध कराई जाएगी। जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा लाइन विभाग की योजनाओं की सूची संबंधित ग्राम पंचायत की वार्षिक कार्य योजना में शामिल कर संबंधित प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी को भेजी जाएगी। इसके पश्चात चयनित योजनाओं की प्रविष्टि ग्रामीण विकास विभाग के ‘RUKTDHARA’ पोर्टल पर संबंधित ग्राम पंचायत के लॉगिन के माध्यम से की जाएगी। विकास आयुक्त ने कहा कि जल संसाधन विभाग एवं ग्रामीण विकास विभाग संयुक्त रूप से कार्य करते हुए ऐसी योजनाओं को प्राथमिकता दें, जिनसे जल संरक्षण, चौर क्षेत्रों से जल निकासी, तटबंध सुदृढ़ीकरण, लघु सिंचाई एवं ग्रामीण आधारभूत संरचना विकास को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी सुनिश्चित होगा।

राज्य में कुल 3,194 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है

राज्य में कुल 3,194 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है व लगभग 219.80 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। इन योजनाओं के माध्यम से विभिन्न जिलों में नहर सफाई, जल निकासी एवं सिंचाई से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है। विकास आयुक्त ने सभी जिलाधिकारियों व उप विकास आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे जिला स्तर पर योजनाओं की नियमित समीक्षा करें तथा अधिकाधिक योजनाओं को शीघ्र धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा सभी आवश्यक औपचारिकताएं आगामी 15 जून तक पूरी कर ली जाएंगी, ताकि मानसून पूर्व प्राथमिकता वाले कार्यों को तेजी से शुरू किया जा सके।

सांसद, विधायक, जिला परिषद प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि योजनाओं के चयन एवं क्रियान्वयन में सांसद, विधायक, जिला परिषद प्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और अधिकारियों को समयबद्ध क्रियान्वयन, नियमित मॉनिटरिंग एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

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