झारखंड में JPSC अध्यक्ष और सदस्यों के पद तीन महीने से खाली हैं। नौ परीक्षाएं स्थगित, 21 परीक्षाएं रद्द और विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति लंबित है।
JPSC News रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में अध्यक्ष और तीनों सदस्यों के पद करीब तीन महीने से खाली हैं। इससे आयोग का कामकाज प्रभावित हो रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन से लेकर विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति तक की प्रक्रिया अटक गई है। झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद राज्य सरकार अब तक आयोग में नियुक्तियां नहीं कर सकी है। अदालत ने सरकार को 18 नवंबर 2026 तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।
JPSC News:जुलाई में अध्यक्ष और अगस्त में सदस्यों ने दिया था इस्तीफा
JPSC के अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया था। इसके बाद आयोग के तीनों सदस्यों डॉ. अजीता भट्टाचार्या, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने 9 अगस्त 2026 को पद छोड़ दिया था। तब से आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली हैं।
झारखंड हाईकोर्ट ने 10 सितंबर 2026 को राज्य सरकार को दो महीने के भीतर अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। अदालत ने सरकार को 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है, ताकि 19 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में मामले की स्थिति स्पष्ट हो सके।
JPSC News:नौ परीक्षाएं स्थगित, 21 परीक्षाएं रद्द होने से बढ़ा संकट
JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने के बीच अभ्यर्थियों की परेशानी भी बढ़ गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नौ परीक्षाएं पहले से स्थगित हैं, जबकि 21 परीक्षाओं के रद्द होने से चयन प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
आयोग के परीक्षा कैलेंडर के मुताबिक, संयुक्त सिविल सेवा नियमित परीक्षा 2025, सिविल सेवा बैकलॉग परीक्षा 2023 और 2025, सिविल जज, सहायक लोक अभियोजक (APP), फैक्ट्री इंस्पेक्टर, प्रोजेक्ट मैनेजर, बॉयलर इंस्पेक्टर, विश्वविद्यालय अधिकारी और झारखंड पात्रता परीक्षा समेत कई परीक्षाओं की प्रक्रिया बाधित है।
जुलाई में आयोग ने नौ परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था। वहीं, राज्य सरकार ने सभी परीक्षाओं की जांच कराने का आदेश दिया है। इसके लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित किए जाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक कमेटी का गठन नहीं हो सका है।
JPSC News:विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति अटकी, वेतन और एरियर पर असर
JPSC में नियुक्ति और प्रोन्नति से संबंधित प्रक्रियाएं लंबित रहने का असर विश्वविद्यालयों के शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। शिक्षकों की प्रोन्नति में देरी से उनके करियर और विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही वेतन अंतर और एरियर से जुड़े वित्तीय लाभ भी अटक रहे हैं।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, वर्ष 2008 बैच के कई असिस्टेंट प्रोफेसर वर्षों से पहली प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। स्टेज वन से स्टेज टू में प्रोन्नति के लिए करीब 700 शिक्षकों में से लगभग 100 की प्रक्रिया अब भी लंबित है। इनमें सीबीआई जांच के दायरे में शामिल करीब 60 शिक्षक भी हैं।
शिक्षकों का कहना है कि यदि प्रोन्नति समय पर होती, तो 2008 बैच के कई शिक्षक वर्ष 2023 तक प्रोफेसर बन चुके होते। आयोग में स्टेज टू से एसोसिएट प्रोफेसर और फिर प्रोफेसर के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया भी लंबित है। वर्ष 2008 से पहले के बैच के कई शिक्षकों की प्रोन्नति भी अटकी हुई है।
Key Highlights
- JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने 22 जुलाई 2026 को इस्तीफा दिया था।
- तीनों सदस्यों ने 9 अगस्त 2026 को पद छोड़ दिया था।
- नौ परीक्षाएं स्थगित हैं और 21 परीक्षाओं के रद्द होने से अभ्यर्थियों की परेशानी बढ़ी है।
- हाईकोर्ट ने 18 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
- विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति, वेतन अंतर और एरियर पर असर पड़ रहा है।
JPSC News:कुलपति और प्रतिकुलपति बनने की पात्रता पर भी असर
प्रोन्नति में देरी का असर शिक्षकों के भविष्य पर भी पड़ रहा है। प्रोफेसर के रूप में आवश्यक अनुभव पूरा नहीं होने के कारण कई शिक्षक कुलपति और प्रतिकुलपति पदों के लिए निर्धारित पात्रता हासिल करने में पीछे रह सकते हैं।
यदि किसी शिक्षक की प्रोन्नति की प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहती है और इसी दौरान वह सेवानिवृत्त हो जाता है, तो उसके मामले में तकनीकी और वित्तीय जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पात्रता और प्रोन्नति की वास्तविक तिथि से वित्तीय लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है। ऐसे में प्रोन्नति में जितनी देरी होगी, संबंधित शिक्षकों के बकाया वेतन और एरियर का अंतर उतना ही बढ़ सकता है।
JPSC News:JPSC नियुक्ति पर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर नजर
JPSC में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रक्रिया और विश्वविद्यालय शिक्षकों की प्रोन्नति दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अब राज्य सरकार को 18 नवंबर 2026 तक हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करनी है। इसके बाद 19 नवंबर को होने वाली सुनवाई में आयोग में नियुक्तियों की स्थिति पर आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।


















