इस पार्टी ने सबसे ज्यादा बार जीती हजारीबाग लोकसभा की सीट, जानें अब तक कैसा रहा इस सीट का इतिहास ?

अब कभी भी चुनाव का बिगुल बज सकता है. लोकसभा चुनाव को लेकर तैयारियां शुरु हो गई हैं.भाजपा ने झारखंड की 14 में से 11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और कांग्रेस ने भी कल देशभर में 39 सीटों पर उम्मीदवारों के लिस्ट जारी किए हैं लेकिन अब तक झारखंड से कांग्रेस के उम्मीदवार कौन होंगे इसमें संशय बरकरार है.
आज हम बात करेंगे हजारीबाग लोकसभा सीट की.

हजारीबाग लोकसभा सीट पर भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए बीते दो टर्म से सांसद रहे जयंत सिंहा का टिकट काट कर सदर विधायक मनीष जायसवाल को टिकट दे दिया है. हालांकि अब उनका मुकाबला किस नेता के साथ होगा यह अब तक तय नहीं हो पाया है. जयंत सिन्हा का टिकट काट कर मनीष जायसवाल को टिकट देना भाजपा के लिए कितना सफल साबित होता है ये तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा.

हजारीबाग लोकसभा के अंतर्गत 5 विधानसभा की सीटें आती है. जिसमें बरही, बड़कागांव, मांडू, रामगढ़ और हजारीबाग है. वर्तमान में बरही से कांग्रेस के उमाशंकर अकेला , मांडु से जेपी पटेल, बड़कागांव से कांग्रेस की अंबा प्रसाद, रामगढ़ में आजसू की सुनीत चौधरी , हजारीबाग से भाजपा के मनीष जायसवाल हैं.

हजारीबाग को भाजपा का गढ़ कहा जाता है, हजारीबाग में आजतक सबसे ज्यादा 7 बार भाजपा की जीत हुई है. और माना जा रहा है कि इस बार भी भाजपा के लिए सेफ सीट है. मनीष जायसवाल को हजारीबाग की ओबीसी वोटरों का साथ मिल सकता है और साथ ही मांडू भी भाजपा की विधानसभा सीट है जिसका फायदा भी मनीष जायसवाल को हो सकता है और वहीं रामगढ़ हजारीबाग लोकसभा के लिए अहम माना जाता है रामगढ़ विधानसभा एनडीए गठबंधन के आजसू के पास है, तो इस सीट से भी मनीष जायसवाल वोट पाने में सफलता हासिल कर सकते हैं.

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अब एक नजर हजारीबाग लोकसभा सीट के इतिहास पर डालते हैं.

इस संसदीय सीट पर सबसे पहले 1952 में लोकसभा का चुनाव हुआ था. पहले आम चुनाव में हजारीबाग से छोटा नागपुर संथाल परगना जनता पार्टी से सांसद चुना गया था. छोटा नागपुर संथाल परगना जनता पार्टी से पहले सांसद रामनारायण सिंह बने. रामनारायण सिंह ने इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीददवार झानी राम को हराया था. रामनारायण सिंह को कुल 57 फीसदी वोट मिले थे.

हजारीबाग लोकसभा सीट में दूसरा आम चुनाव 1957 में हुआ. 1957 के चुनाव में एक बार फिर छोटा नागपुर संथाल परगना जनता पार्टी ने जीत दर्ज की और इस बार हजारीबाग को पहली महिला सांसद मिली. छोटानागपुर संथाल परगना जनता पार्टी से ललिता राज्य लक्ष्मी ने जीत दर्ज की. ललिता राज्य लक्ष्मी को 78 हजार वोट मिले थे. जिसके बाद 1962 से 1967 तक हजारीबाग में स्वतंत्र उम्मीदवार बसंत नारायण सिंह लगातार दो बार जीते.
1968 में मोहन सिंह ओबरॉय झारखंड पार्टी से सांसद बने थे.

दरअसल 1968 में मोहन सिंह हजारीबाग लोकसभा के उपचुनाव में जीतकर सांसद बने थे. बताया जाता है कि ओबरॉय रामगढ़ राज के काफी करीबी थे और उनके आग्रह पर ही उन्होंने हजारीबाग सीट से उपचुनाव लड़ा था.

1968 में हजारीबाग में उपचुनाव की वजह यह थी कि तत्कालीन सांसद डॉ. बसंत नारायण बिहार सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाए गए थे. इस वजह से उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा दे दिया. और मोहन लाल ओबेरॉय राजा रामगढ़ के आग्रह पर चुनाव लड़कर संसद में प्रवेश किया था.

जिसके बाद 1971 में हजारीबाग लोकसभा सीट में कांग्रेस का खाता खुला और कांग्रेस से दामोदर पांडे यहां से सांसद बने.

लेकिन 1977 में इस सीट पर बसंत नारायण की वापसी होती है. 1977 और 1980 में जनता पार्टी से बसंत नारायण सिंह यहां से सांसद चुने गए.

1984 में हजारीबाग में कांग्रेस एक बार जीत का पताका लहराती है और कांग्रेस से दामोदर पांडे संसद में हजारीबाग का प्रतिनिधित्व करते हैं.

साल 1989 हजारीबाग की राजनीति के लिए खास रहा , 1989 में हजारीबाग सीट से भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई. भारतीय जनता पार्टी को कुल 42.8 फीसदी वोट मिले. जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया को 34.8 फ़ीसदी और इंडियन नेशनल कांग्रेस को 11.3 फीसदी वोट मिले.

1991 में एक बार फिर हजारीबाग लोकसभा सीट पर भारतीय कम्युनिष्ठ पार्टी ने अपना अपना झंडा लहराया और एक बार फिर भुवनेश्वर प्रसाद मेहता सांसद बने.

वहीं 1996 में भाजपा ने हजारीबाग में वापसी की और भारतीय जनता पार्टी के महावीर लाल विश्वकर्मा जीते.
1998 और 1999 में भाजपा ने हजारीबाग सीट से अपनी पैठ बनाए रखी. 1998 और 1999 में भाजपा से यशवंत सिंहा यहां से सांसद बने.

इसी बीच 2004 में भाजपा के जीत का क्रम टूट गया और 2004 में कम्युनिष्ठ पार्टी ने एक बार फिर वापसी की और भुवनेश्वर प्रसाद मेहता दिल्ली पहुंचे.

2009 के लोकसभा चुनाव में यशवंत सिंहा ने अपनी हार का बदला लिया और हजारीबाग में भाजपा की वापसी कराई.
जिसके बाद लगातार दो टर्म यानी 2014 और 2019 में भाजपा के जीत का सिलसिला जारी रहा और इन दोनों लोकसभा चुनाव में यशवंत सिंहा के बेटे जयंत सिंहा ने जीत हासिल की.

लेकिन इस बार भाजपा हजारीबाग से सदर विधायक मनीष जायसवाल पर दांव खेला है और उन्हें लोकसभा का टिकट दिया है.

लेकिन भाजपा ने जयंत सिन्हा का टिकट काट कर मनीष जायसवाल को टिकट क्यों दिया इसके पीछे की अनुमानित वजहों की बात करें तो मनीष जायसवाल विधायक के रुप में हजारीबाग की जनता के आवाज को सदन में उठाते रहते हैं और हजारीबाग की जनता के बीच लोकप्रियता भी हासिल की है.

हजारीबाग जिला में रामनवमी जुलूस बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. विश्वभर में यहां की रामनवमी बेहद प्रसिद्ध है. मनीष जायसवाल ने सदन में हेमंत सोरेन के फैसले रामनवमी जुलूस बैन के खिलाफ कुर्ता फाड़ प्रदर्शन किया था और जुलूस में डीजे की अनुमति की मांग की थी.मनीष जायसवाल की छवि एक प्रखर हिंदूवादी नेता की बन गई है.

हालांकि रिपोर्ट बताती है कि हजारीबाग में मुस्लिम वोटर 18 फिसदी है. 2011 की जनगणना के अनुसार हजारीबाग में मुस्लिम आबादी का वोट काउंट 307131 है. जो जिले में सबसे ज्यादा वोट काउंट होल्ट करते हैं. वहीं दूसरे नंबर पर एससी वोटर हैं जिनका वोट परसेंट 15.3 है और यहां एसटी वोटर 12.8 प्रतिशत हैं.

अब आने वाले चुनाव के नतीजों के बाद ही पता चलेगा की यहां कौन बाजी मारता है.

झारखंड की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी कम देखी जाती है. हजारीबाग लोकसभा सीट पर ललिता के बाद अब तक फिर से कोई भी महिला सांसद नहीं मिली है.

इस बार कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस बड़कागांव विधायक अंबा प्रसाद को लोकसभा का टिकट दे सकती है लेकिन अब तक इसकी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गई है.

अब आगे क्या होगा इसका पता चुनावी नतीजों के बाद ही चल पाएगा.

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