नवरात्र का तीसरे दिन, जानिए अरण्य देवी मंदिर का धार्मिक और पौराणिक महत्व

नवरात्र के तीसरे दिन, जानिए अरण्य देवी मंदिर का धार्मिक और पौराणिक महत्व

आरा : यह मंदिर भोजपुर जिले के आरा शहर में स्थित है। यहां देवी अरण्य देवी विराजमान हैं। अरण्य का अर्थ है ‘वन’, यानी यह देवी पहले जंगलों में पूजी जाती थीं। यह मंदिर बहुत पुराना है और स्थानीय लोग इसे भोजपुर का सिद्धपीठ मानते हैं। देवी को आरा शहर की अधिष्ठात्री भी मानी जाती हैं।

DIARCH Group 22Scope News

अरण्य देवी मंदिर की प्राचीनता और देवी का स्वरूप

मुख्य गर्भगृह में दो स्वप्रतिष्ठित (स्वयं प्रकट) शिलामूर्ति हैं। एक मूर्ति अष्टभुजी देवी की और दूसरी छःभुजी देवी की है। दोनों ही मूर्तियाँ प्राकृतिक शिला से निकली हुई हैं, जिन्हें भक्त अरण्य देवी कहते हैं।

अरण्य देवी मंदिर की कथा और मान्यता

मान्यता है कि यह मंदिर त्रेता युग से जुड़ा है। कहते हैं कि भगवान राम जब वनवास से लौट रहे थे तब उन्होंने इस क्षेत्र में अरण्य देवी की पूजा की थी। मान्यता है कि यह स्थान महाभारत काल से भी जुड़ा है। यहां पांडवों ने गुप्तवास के दौरान देवी की आराधना की थी। देवी ने ज्येष्ठ पांडव धर्मराज युधिष्ठिर को स्वप्न में संकेत दिया कि वह आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित करे। धर्मराज युधिष्ठिर ने यहां मां आरण्य देवी की प्रतिमा स्थापित की। द्वापर युग में इस स्थान पर राजा मयूरध्वज राज करते थे। इनके शासनकाल में भगवान श्रीकृष्ण पाण्डु-पुत्र अर्जुन के साथ यहां आए थे। श्रीकृष्ण ने राजा के दान की परीक्षा लेते हुए अपने सिंह के भोजन के लिए राजा से उसके पुत्र के दाहिने अंग का मांस मांगा। जब राजा और रानी मांस के लिए अपने पुत्र को आरा (लकड़ी चीरने का औजार) से चीरने लगे तो देवी प्रकट होकर उनको दर्शन दी थीं।
एक कथा यह भी है कि भगवान राम, लक्ष्मण और महर्षि विश्वामित्र जब बक्सर से जनकपुर धनुष यज्ञ के लिए जा रहे थे तब उन्होंने यहां गंगा स्नान कर देवी आदिशक्ति की पूजा-अर्चना कीृ। महर्षि विश्वामित्र ने भगवान राम और लक्ष्मण को आरण्य देवी की महिमा के बारे में बताया था। तदुपरांत उन्होंने सोनभद्र नदी को पार किया।

अरण्य देवी मंदिर का धार्मिक महत्व

इसे सिद्धपीठ माना जाता है, यानी जहां श्रद्धालु सच्चे मन से पूजा करते हैं। उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यहां विशेष रूप से नवरात्र में बड़ी श्रद्धा से पूजा होती है और दूर-दूर से भक्त आते हैं। भोजपुर ही नहीं बल्कि पूरे बिहार और उत्तर प्रदेश के श्रद्धालुओं की आस्था इस मंदिर इस मंदिर से जु़ड़ी हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्र में यहां भव्य मेला लगता है। इस समय हजारों-लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं और कन्या-पूजन भी होता है। इसके अलावा अन्य दिन भी यहां माता के श्रद्धालुओं की मीड़ लगी रहती है।

यह भी पढ़े : शारदीय नवरात्र 2025 : पहले दिन मां शैलपुत्री की हो रही है पूजा

Saffrn

Trending News

 Bihar Green Mission: Marine Drive पर 1 लाख पेड़ लगाने का...

पटना मरीन ड्राइव पर 3 महीने में 1 लाख पेड़ लगाने का लक्ष्य, सम्राट चौधरी ने पर्यावरण संतुलन और ग्रीन कॉरिडोर योजनाओं की जानकारी...

 Bihar Land Reform: भूमि माफियाओं पर सख्ती तय, Vijay Sinha का...

बिहार में भूमि सुधार अभियान तेज, उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने मुंगेर में भूमि माफियाओं पर सख्त कार्रवाई और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का ऐलान...

Jharkhand Politics:  असम Election के बाद JMM-कांग्रेस में बढ़ा तनाव, सरयू...

Remove term: Jharkhand Poliअसम चुनाव के बाद झारखंड में JMM और कांग्रेस के बीच तनाव बढ़ा, सरयू राय ने बिना कांग्रेस नई सरकार बनाने...

Hazaribagh झंडा चौक हत्याकांड का खुलासा, पांच आरोपी गिरफ्तार; तलवार और...

Hazaribagh: रामनवमी शोभायात्रा के दौरान शहर के हृदयस्थली झंडा चौक पर हुए सनसनीखेज अभिषेक कुमार हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है।पुलिस...

नगर निकाय चुनाव में AJSU ने ही दिलाया ओबीसी को आरक्षण...

Jharkhand: झारखंड में ओबीसी आरक्षण का विषय एक बार फिर चर्चा में है। सुदेश महतो ने बतौर पंचायती राज मंत्री रहते हुए अपने कार्यकाल...
Corrugated Boxes Supplier in Jharkhand & West Bengal | Aarisha Packaging Solutions
Best Packaging Solution Provider of Jharkhand

Social Media

194,000FansLike
27,500FollowersFollow
628FollowersFollow
695,000SubscribersSubscribe
- Advertisement -spot_img