डिजिटल डेस्क : Kunal Kamra को मुंबई पुलिस ने भेजा समन, पेश होने को कहा। Kunal Kamra को महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अपनी कॉमेडी में की गई टिप्पणी पर हुए बवाल-तोड़फोड़ के बाद उपजे विवाद पर अब मुंबई पुलिस ने सीधे Kunal Kamra को समन भेजा है।
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प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मुंबई की खार थाने की पुलिस ने Kunal Kamra के घर समन भेजा है। Kunal Kamra को मंगलवार दिन में मुंबई के खार थाने में जांच अधिकारी के सामने पेश होने को कहा है।
हालांकि, मुंबई के खार थाने के इस समन का Kunal Kamra की ओर से जवाब नहीं दिया गया है। बताया जा रहा है कि Kunal Kamra अभी मुंबई में नहीं हैं। इसी क्रम में मुंबई पुलिस ने आगे की जानकारी भी मीडिया से साझा की है।
बताया गया कि MIDC पुलिस ने स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान Kunal Kamra के जोक को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की थी। उस FIR को आगे की जांच के लिए खार पुलिस को सौंप दिया गया।
अब उसी क्रम में खार थाने की पुलिस ने कामरा को वॉट्सऐप के जरिए Kunal Kamra समन भेजा है। जवाब में Kunal Kamra ने पुलिस से कहा कि वह आज मुंबई नहीं आएंगे क्योंकि अभी वह तमिलनाडु में हैं।
Kunal Kamra – माफी नहीं मांगूंगा…
इससे पहले Kunal Kamra ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर अपनी कॉमेडी में की गई टिप्पणी पर हुए बवाल-तोड़फोड़ के बाद उपजे विवाद पर CM देवेंद्र फडणवीस की ओर से दिए गए माफी मांगने के सख्त संदेश पर विस्तार से अपनी बात रखी।
36 वर्षीय Kunal Kamra ने बीते सोमवार की रात ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर जारी विस्तृत बयान में पूरे प्रकरण में अब तक हुए सभी महत्वपूर्ण घटनाक्रमों पर अपनी बात रखी है।
जहां इस पूरे मसले पर महाराष्ट्र में सियासी पारा पूरी तरह गरमाया हुआ है और हाई है, वहीं अपने लंबे-चौड़े पोस्ट में बड़े ही इत्मिनान से संजीदगी से Kunal Kamra ने अपनी बात मजबूती से सीधे-सरल शब्दों में कही है। अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स बीते सोमवार को रात को पूरे प्रकरण पर Kunal Kamra ने तर्कपूर्ण तरीके बड़े ही दृढ़ता से अपनी बात कही है।

Kunal Kamra ने कहा कि – ‘मैं माफी नहीं मांगूंगा। मैंने जो कहा वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि अजित पवार ने एकनाथ शिंदे के बारे में कहा था।
…मैंने कुछ भी ऐसा नहीं कहा, जिसके लिए मुझे माफी मांगनी चाहिए। अजित पवार भी उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बारे में ‘गद्दारी’ जैसी टिप्पणी कर चुके हैं।
…जो लोग मेरा नंबर लीक करने या मुझे लगातार कॉल करने में लगे हैं, मुझे यकीन है कि अब तक उनको एहसास हो गया होगा कि सभी अनजान कॉल मेरे वॉयसमेल पर जाते हैं, जहां आपको वही गाना सुनाया जाएगा जिससे आप नफरत करते हैं।
…मैं इस भीड़ से नहीं डरता और मैं अपने बेड के नीचे छिपकर इसके शांत होने का इंतजार नहीं करूंगा।
…मीडिया में जिस तरह से इस मामले की रिपोर्टिंग हो रही है, इस पर सोचने की जरूरत है। …भारत प्रेस की आजादी के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों की सूची में 159वें नंबर पर आता है।’

‘हैबिटेट स्टूडियो मेरी कॉमेडी के लिए जिम्मेदार नहीं…’
मनोरंजन की दुनिया में उभरती नई पीढ़ी को मंच प्रदान करने में अहम भूमिका निभाने वाले मुंबई के हैबिटेट स्टूडियों पर इस उपजे विवाद के बाद हुए हमले और तोड़फोड़ पर भी Kunal Kamra ने पूरी संवेदना के साथ अपनी बात रखी है।
Kunal Kamra ने अपने इसी पोस्ट में आगे कहा कि – ‘मैं इस भीड़ से नहीं डरता… उस भीड़ के लिए जिसने तय किया कि हैबिटेट को खड़ा नहीं होना चाहिए।
…इंटरटेंमेंट प्लेस (मनोरंजन स्थल) केवल एक मंच है, सभी तरह के शो के लिए एक जगह। हैबिटेट (या कोई अन्य स्थल) मेरी कॉमेडी के लिए जिम्मेदार नहीं है, न ही उसके पास इस बात पर कोई ताकत है कि मैं क्या कहता हूं। और न ही कोई राजनीतिक दल।
…किसी हास्य कलाकार के शब्दों के लिए किसी स्थान पर हमला करना उतना ही मूर्खतापूर्ण है जितना कि टमाटर ले जा रहे एक ट्रक को पलट देना, क्योंकि आपको परोसा गया बटर चिकन पसंद नहीं आया।
…हालांकि, मैं अपने खिलाफ की गई किसी भी कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस और अदालतों के साथ सहयोग करने को तैयार हूं।
क्या कानून उन लोगों के खिलाफ निष्पक्ष और समान रूप से लागू होगा जिन्होंने यह तय किया है कि किसी मजाक से आहत होने पर तोड़फोड़ करना उचित है?
…आगे के प्रोगाम के लिए मैं एलफिंस्टन ब्रिज या मुंबई में किसी अन्य स्थान का चयन करूंगा, जिसे जल्द ध्वस्त करने की जरूरत है।’

‘राजनीतिक व्यवस्था के सर्कस का मजाक उड़ाना अवैध नहीं…’
अपने इसी पोस्ट में Kunal Kamra ने आगे भी पूरे विवाद में बचे सियासी पक्ष को भी अपने तरीके जवाब देने के क्रम में झिंझोड़ा है। Kunal Kamra ने उन नेताओं को भी जवाब दिया जिन्होंने उनसे माफी मांगने को कहा है।
अपने बयान के दूसरे हिस्से में Kunal Kamra ने लिखा है – ‘…ये उन “राजनीतिक नेताओं” के लिए, है जो मुझे सबक सिखाने की धमकी दे रहे हैं।
…भले ही आज का मीडिया हमें कुछ और ही विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा हो, हमारी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार केवल शक्तिशाली और अमीर लोगों की प्रशंसा करने के लिए नहीं है।
…अगर आप किसी मजाक को बर्दाश्त नहीं कर सकते, जो किसी प्रभावशाली व्यक्ति पर किया गया हो, तो इसका मतलब यह नहीं कि मेरा यह अधिकार समाप्त हो जाएगा।
…जहां तक मुझे पता है, हमारे नेताओं और हमारे राजनीतिक तंत्र की आलोचना करना अवैध नहीं है। आपकी असमर्थता मेरे अधिकार की प्रकृति को नहीं बदलती है। … हमारे नेताओं और हमारी राजनीतिक व्यवस्था के सर्कस का मजाक उड़ाना कानून के खिलाफ नहीं है।
…क्या कानून समान रूप से उन लोगों के खिलाफ भी लागू किया जाएगा, जिन्होंने यह तय किया है कि मजाक से आहत होने पर तोड़फोड़ करना उचित प्रतिक्रिया है ?
…क्या उन गैर-निर्वाचित बीएमसी (BMC) अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी, जो आज बिना किसी पूर्व सूचना के हैबिटेट पहुंचे और हथौड़ों से जगहों को तोड़ दिया?’