
रांची: UPSC परीक्षा 2024 के नतीजों में रांची का नाम एक बार फिर रोशन हुआ है। झारखंड की राजधानी रांची के निवासी विद्यांशु शेखर ओझा ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में ऑल इंडिया 59वीं रैंक हासिल कर अपने शहर और राज्य का मान बढ़ाया है। उनकी इस सफलता से न केवल उनके परिजन गर्वित हैं, बल्कि पूरे झारखंड में उत्सव जैसा माहौल है।
विद्यांशु, जिन्होंने इससे पहले 2022 में भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में सफलता प्राप्त की थी और 2023 में भारतीय विदेश सेवा (IFS) में चयनित हुए थे, इस बार आईएएस बनने के सपने को साकार कर चुके हैं। न्यूज़ बायस्कोप से बातचीत में विद्यांशु ने बताया कि प्रारंभिक तीन प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। तीन बार प्रीलिम्स परीक्षा में मामूली अंतर से असफल होने के बाद भी उन्होंने अपने आत्मविश्वास को बनाए रखा और चौथे प्रयास में लगातार तीन वर्षों तक चयनित होते गए।

रांची के लाल विद्यांशु शेखर ओझा ने UPSC परीक्षा में रचा इतिहास :
विद्यांशु का मानना है कि UPSC जैसी कठिन परीक्षा में धैर्य, नियमितता और आत्मनिरीक्षण सबसे आवश्यक हैं। उनका अध्ययन रूटीन इस तरह बना था कि वह हर दो-तीन महीनों के लिए लक्ष्य तय करते और उसे साप्ताहिक स्तर पर तोड़कर नियमित रूप से अमल करते थे। दैनिक घंटे गिनने की बजाय उन्होंने ‘थक जाओ तो आराम करो, फिर पढ़ाई करो’ की नीति अपनाई।
अपने संघर्षों का जिक्र करते हुए विद्यांशु ने बताया कि इस यात्रा में उनके माता-पिता ने सबसे अहम भूमिका निभाई। उनकी माता दिल्ली में उनके साथ रहकर हर प्रकार का ध्यान रखती थीं, जबकि उनके पिता रांची में अकेले रहते हुए परिवार की जिम्मेदारियां संभालते थे। इसके अलावा उनके कॉलेज सीनियर और कुछ अनुभवी शिक्षकों ने भी उन्हें समय-समय पर मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने भावी UPSC अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे सीमित स्रोतों पर भरोसा करें, पूर्व वर्षों के प्रश्नों का अभ्यास करें और अखबार पढ़ने की आदत जरूर डालें। उनका कहना है कि UPSC कोचिंग के मटेरियल से नहीं, बल्कि अखबारों से प्रश्न उठाता है। अंत में उन्होंने यह भी कहा कि परीक्षा के दिन मन में किसी प्रकार की अपेक्षा लेकर न जाएं – सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ दें और परिणाम को स्वीकार करने का मन बनाएं।
विद्यांशु की इस प्रेरणादायी सफलता से एक बार फिर यह सिद्ध हुआ है कि समर्पण, लगन और निरंतर प्रयास से किसी भी ऊंचाई को छुआ जा सकता है। रांची के इस लाल ने यह साबित कर दिया कि कठिन राह भी मंजिल तक पहुंचाती है – बशर्ते आप हार न मानें।




