पटना : बिहार सरकार के उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल की अध्यक्षता में आज सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सभागार में उद्योग विभाग द्वारा प्रेसवार्ता कर विभाग की वित्तीय वर्ष 2025-2026 की उपलब्धियों से अवगत कराया गया। इस दैरान उद्योग विभाग के सचिव सह एमडी, बियाडा एवं आईडा कुंदन कुमार मौजूद रहे।
‘CM के दूरदर्शी नेतृत्व में उद्योग विभाग राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित करने व निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ करने हेतु पूर्ण समर्पण व प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है’
उद्योग मंत्री ने अवगत कराया कि बिहार का औद्योगिक विकास निरंतर सशक्त गति के साथ आगे बढ़ रहा है। यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी नेतृत्व में उद्योग विभाग राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को रूपांतरित करने व निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ करने हेतु पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। सुशासन और नीतिगत स्थिरता के मजबूत आधार पर राज्य सरकार ने हितधारकों के साथ सतत संवाद को प्रोत्साहित किया है, जिससे एक वास्तविक उद्योग अनुकूल वातावरण का निर्माण हो सका है। इन निरंतर प्रयासों के फलस्वरूप बिहार आज राष्ट्रीय पटल पर पूर्वी भारत के एक उभरते हुए विकास इंजन के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है।
आज बिहार भारत की औद्योगिक एवं आर्थिक विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरने के लिए अत्यंत सक्षम स्थिति में है – दिलीप जायसवाल
उन्होंने कहा कि आज बिहार भारत की औद्योगिक एवं आर्थिक विकास गाथा में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभरने के लिए अत्यंत सक्षम स्थिति में है। अगले पाँच वर्षों में 50 लाख करोड़ के निवेश को आकर्षित करने और एक करोड़ रोजगार के अवसर सृजित करने की स्पष्ट एवं महत्वाकांक्षी परिकल्पना के साथ राज्य ने निर्णायक रूप से योजना से क्रियान्वयन की दिशा में कदम बढ़ाया है। इस दृष्टि को तीव्र गति से विस्तारित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क, औद्योगिक कॉरिडोरों के विकास, शहरी अवसंरचना के सुदृढ़ीकरण, बेहतर हवाई संपर्क तथा सशक्त लॉजिस्टिक्स ढांचे के माध्यम से मजबूती प्रदान की जा रही है। देश के शीर्ष निवेश गंतव्यों में बिहार को स्थापित करने के लक्ष्य के अनुरूप राज्य सरकार विश्वस्तरीय औद्योगिक टाउनशिपों एवं आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में निरंतर निवेश कर रही है, जिन्हें मजबूत ट्रंक अवसंरचना का समर्थन प्राप्त है, ताकि तीव्र, समावेशी और सतत औद्योगिक विकास सुनिश्चित किया जा सके। औद्योगिक विकास को सात निश्चय-3 (2025–2030) के अंतर्गत सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की गई है, जिसकी परिकल्पना ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के रूप में की गई है। इस दृढ़ संकल्प को आगे बढ़ाते हुए, वित्तीय वर्ष 2025–26 में उद्योग विभाग द्वारा संबंधित योजनाओं एवं गतिविधियों के क्रियान्वयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस क्रम में विभाग द्वारा अनेक महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं।
जिनके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं
1. वित्तीय वर्ष 2025–26 में उद्योग विभाग से संबंधित राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृत प्रमुख निर्णय
नई सरकार ने अपने पहले मंत्रिपरिषद बैठक में ही तीन उच्चस्तरीय एपेक्स समितियों का गठन कर अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट कर दिया। इन समितियों को बिहार को एक पूर्वी टेक हब के रूप में स्थापित करने, इसे एक वैश्विक बैकएंड हब एवं वैश्विक कार्यस्थल के रूप में विकसित करने, तथा स्टार्टअप और नव युग की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में रोजगारोन्मुख गतिविधियों के व्यापक विस्तार का स्पष्ट दायित्व सौंपा गया है। ये संस्थागत व्यवस्थाएँ विभिन्न विभागों और क्षेत्रों में रणनीतिक पहलों के समन्वित, समयबद्ध एवं परिणामोन्मुखी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए स्थापित की गई हैं।
MSME क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशालय के गठन/स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है
एमएसएमई क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निदेशालय के गठन/स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। बिहार राज्य विपणन प्राधिकार (BSMA) की स्थापना राज्य के नोडल निकाय के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), कृषि-आधारित उद्योगों, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प तथा ग्रामीण उद्यमों से संबंधित उत्पादों के विपणन, ब्रांडिंग एवं प्रचार-प्रसार का कार्य करना है।
2. नए उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु नीतिगत पहल
वैश्विक तथा घरेलू निवेशकों को और अधिक आकर्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज (BIIPP), 2025 लागू किया गया है, जो देश के सर्वश्रेष्ठ निवेश प्रोत्साहन पैकेजों में से एक है। यह पैकेज एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी प्रोत्साहन ढांचा प्रदान करता है, जिसके अंतर्गत पात्र उच्च-मूल्य निवेशों के लिए निःशुल्क औद्योगिक भूमि, पूंजी अनुदान, ब्याज अनुदान, एसजीएसटी पुनर्भरण तथा निर्यात आधारित प्रोत्साहन जैसी सुविधाएँ सम्मिलित हैं।
बिहार सेमीकंडक्टर नीति, 2026 को हाल ही में राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है – मंत्री
यह बताते हुए हमें प्रसन्नता हो रही है कि बिहार सेमीकंडक्टर नीति, 2026 को हाल ही में राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है, जो भारत सरकार की योजनाओं के अनुरूप हैं। इन नीति का उद्देश्य बिहार को भारत के पूर्वी क्षेत्र में एक उभरते हुए प्रौद्योगिकी हब के रूप में स्थापित करना है। इसके तहत सेमीकंडक्टर व संबद्ध इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य श्रृंखला—जिसमें डिजाइन, फैब्रिकेशन, असेंबली, परीक्षण एवं पैकेजिंग शामिल हैं में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की स्थापना को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
BIIPP 2025 को पूरक रूप में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र विशेष नीतियों का एक व्यापक ढांचा भी लागू किया गया है
BIIPP 2025 को पूरक रूप में राज्य सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्र विशेष नीतियों का एक व्यापक ढांचा भी लागू किया गया है, जिसका उद्देश्य लक्षित निवेश को प्रोत्साहित करना है। इनमें बिहार बॉयोफ्यूल्स उत्पादन प्रोत्साहन (संशोधन) नीति, निर्यात प्रोत्साहन नीति, 2024, बिहार लॉजिस्टिक्स नीति, 2024, वस्त्र एवं चमड़ा नीति, 2022 तथा बिहार स्टार्ट अप नीति, 2022 सहित अन्य नीतियां सम्मिलित हैं। बिहार की औद्योगिक नीतियाँ आज देश की सबसे प्रतिस्पर्धी नीतियों में शामिल हैं। ये सभी नीतियाँ मिलकर राज्य में दीर्घकालिक क्षेत्रीय विकास तथा विविधीकृत औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने हेतु एक समग्र एवं सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करती हैं। राज्य का स्पष्ट दृष्टिकोण ‘Policy for All’ है, जिससे सभी वर्गों के उद्यमियों को समान अवसर मिल सकें।
3. नीतिगत पहलों के प्रचार हेतु निवेशक संवाद
उद्योग विभाग द्वारा निवेशकों को राज्य में बड़ी संख्या में आमंत्रित करने के लिये देश-विदेश में बैठकों का आयोजन किया गया, जिनमें मार्च 2026 में थाईलैंड में लोटस ट्रायंगल मेगा लॉन्च और रोडशो, बेंगलुरु रोड शो, फरवरी में कोलकाता में एक्जिम सम्मेलन, एआई इम्पैक्ट समिट , नई दिल्ली, मेगा निर्यात प्रोत्साहन कार्यक्रम, पटना, अगस्त, मुम्बई में महा वर्ल्ड एक्सपो समिट, 2025, मुम्बई में ही CII East India Summit, 2025, सितम्बर, 2025 में नई दिल्ली में आयोजित Med Tech Expo, 2025 एवं बिहार औद्योगिक प्रोत्साहन नीति डायलॉग तथा अक्टूबर, 2025 में लुधियाना में आयोजित Opportunities In Textile Sector in Bihar आदि प्रमुख हैं। इन आयोजनों में उद्यमियों से प्राप्त सुझावों के आलोक में राज्य में औद्योगिक ढांचा को और मजबूत करने का प्रयास राज्य सरकार द्वारा किया जा रहा है।
4. वर्ष 2025–26 में राज्य में निवेश प्रस्तावों की प्रमुख उपलब्धिया
वर्ष 2025–26 में राज्य ने निवेश के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि के दौरान कुल 747 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके अंतर्गत 17,217 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव किया गया है। इसके अतिरिक्त, BIADA के माध्यम से 317 निवेशकों को 404 एकड़ भूमि आवंटित कर 5500 करोड़ निवेश और 22,500 से अधिक रोजगार की संभावनाएँ उत्पन्न की गई हैं जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, जे. के. लक्ष्मी सीमेंट, एपीक एग्रो (कैम्पा कोला), श्याम स्टील प्रा. लिमिटेड (पेंट डिवीजन), पीडी लाइमलाइट इंडस्ट्रीज, मदर डेयरी, आदित्य बिरला समूह (अल्ट्राटेक/टेक्सटाइल डिवीजन) एवं हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड का नाम उल्लेखनीय है।
5. ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस (EODB) से संबंधित पहल
बिहार को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम NSWS के साथ एकीकृत किया गया है, जिसके माध्यम से केंद्रीय एवं राज्य स्तर की स्वीकृतियों के लिए युनिफाइड मंच उपलब्ध कराया गया है। पैन आधारित ऑनबोर्डिंग के माध्यम से पूर्ण एकीकरण प्राप्त किया गया है, जिससे निवेशकों का रीयल टाइम सत्यापन संभव हो सका है। जन विश्वास अधिनियम के अनुरूप एक राज्य स्तरीय अधिनियम को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिस पर माननीय राज्यपाल द्वारा हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।
अब महिलाओं को कारखानों में प्रातः 5 बजे से रात्रि 10 बजे तक कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है
अब महिलाओं को कारखानों में प्रातः पांच बजे से रात्रि 10 बजे तक कार्य करने की अनुमति प्रदान की गई है, बशर्ते सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। कर्मचारियों की सहमति के साथ कारखाने प्रतिदिन अधिकतम 12 घंटे (विश्राम अंतराल सहित) तक संचालन कर सकते हैं, बशर्ते साप्ताहिक कार्य सीमा 48 घंटे बनी रहे। साथ ही, गैर कार्य दिवसों के लिए सवेतन अवकाश प्रदान किया जाएगा। औद्योगिक विवाद अधिनियम में संशोधन के अंतर्गत प्रतिष्ठानों के बंद होने, कर्मियों की छंटनी एवं अस्थायी रूप से कार्यमुक्ति (ले ऑफ) के लिए लागू सीमा को 100 श्रमिकों से बढ़ाकर 300 श्रमिकों किया गया है। इससे निरंतर औद्योगिक संचालन को संरक्षण मिला है तथा अल्पकालिक श्रम के दुरुपयोग में कमी आएगी।
6. प्रमुख औद्योगिक परियोजनाएं
अमृतसर कोलकाता औद्योगिक कॉरिडोर (AKIC) परियोजना के अंतर्गत गया जिले के डोभी प्रखंड में चयनित 1,670.22 एकड़ भूमि पर लगभग 1,339 करोड़ की अनुमानित लागत से बिहार इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग सिटी गया लिमिटेड (BIMCGL) का विकास किया जा रहा है। उक्त परियोजना का शुभारंभ शीघ्र ही आगामी दिनों में किया जाना प्रस्तावित है। औद्योगिक क्षेत्र, महवल में 62.17 एकड़ भूमि पर लेदर पार्क का निर्माण किया जा रहा है। मुजफ्फरपुर स्थित औद्योगिक क्षेत्र में टेक्सटाइल एवं बैग निर्माण हेतु स्थापित प्लग एंड प्ले शेड में कुल 554.57 करोड़ का निवेश किया गया है, जिसके अंतर्गत लगभग 3,600 कर्मी कार्यरत हैं।
7. प्रमुख PPP परियोजनाएं
बिहार राज्य के अंतर्गत पीपीपी कार्य हेतु नोडल ऐजेंसी के रूप में आईडीए कार्यरत है। आईडीए की उपलब्धि निम्नवत् है। पटना में तीन पांच सितारा होटल के निर्माण हेतु प्रस्ताव आईडीए बोर्ड द्वारा स्वीकृत किया गया है, जिसमे दो पांच सितारा होटल के निर्माण हेतु विकासकर्त्ता का चयन किया जा चुका है। पटना कलस्टर में Solid Waste Management System की स्थापना हेतु प्रस्ताव आईडीए बोर्ड द्वारा स्वीकृत किया गया है। निविदा निष्पादन की कार्रवाई नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा की जा रही है।
8. भूमि अधिग्रहण संबंधी अद्यतन स्थिति
मंत्रीपरिषद द्वारा बिहार राज्य के विभिन्न जिलों में नये औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करने हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। कुल 24 जिलों के 26 परियोजनाओं हेतु 13343.67 एकड रैयती भूमि के अधिग्रहण प्रस्ताव पर प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त। कुल नौ जिलों में 693.14 एकड़ सरकारी भूमि के हस्तांतरण हेतु स्वीकृति प्राप्त। वर्ष 2025 में गया जिलांतर्गत AKIC के तहत IMC के स्थापनार्थ 1670 एकड भू-अर्जन किया गया एव अर्जित भूमि का बियाडा के माध्यम से NICDC को भूमि लीज की गई। इसके अलावे कुल सात जिलों के 3625.46 एकड रैयती भूमि के प्रस्ताव को प्रशासनिक स्वीकृति हेतु उद्योग विभाग में भेजा गया।
9. बिहारी समुदाय की सहभागिता और बिहार फाउंडेशन के विस्तार संबंधी पहल
बिहार फाउन्डेशन के चैप्टर्स – देश एवं विदेशों में बिहारी समुदाय के सहयोग एवं फाउन्डेशन के उद्देश्यों के प्रति एकजुटता की वजह से अब तक कुल 47 (सैंतालीस) चैप्टर्स खुल चुके हैं जिनमें विदेशों में 26 (छब्बीस) चैप्टर्स एवं भारत में 21 (इक्कीस) चैप्टर्स हैं। वहीं भारत में मौजूद चैप्टर्स चेन्नई, मुम्बई, नागपुर, कोलकाता, वाराणसी, हैदराबाद, सूरत, पुणे, सिलीगुड़ी, गुवहाटी, गोवा, सिक्किम, चंडीगढ़, गुरूग्राम, भोपाल, शिलांग, दिल्ली, पंचकुला, इरनाकुलम, अगरतला तथा जोरहाट शामिल है।
10. स्टार्ट अप को बढ़ावा देने हेतु किए गए प्रमुख प्रयास
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 109 स्टार्टअप्स को बिहार स्टार्टअप पॉलिसी के अंतर्गत पंजीकृत किया गया। (इस पहल के तहत अब तक कुल 1,653 स्टार्टअप्स का चयन किया गया है, जिनमें से 1,456 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई है, तथा अब तक कुल 92.2 करोड़ का वितरण किया जा चुका है।) वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न फंडिंग सहायता योजनाओं के तहत 692 स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इस अवधि में कुल 27.84 करोड़ का वितरण किया गया। स्टार्टअप बिहार के अंतर्गत 242 महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स पंजीकृत हैं।
11. मुख्यमंत्री उद्यमी योजना
राज्य में स्वरोजगार, उद्यमिता तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति उद्यमी/अति पिछड़ा वर्ग उद्यमी / महिला उद्यमी / युवा उद्यमी योजना/अल्पसंख्यक उद्यमी योजना के अंतर्गत अपना उद्यम स्थापित करने हेतु वित्तीय एवं संस्थागत सहायता प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत अबतक कुल 44,179 लाभुकों को लगभग 3,242.19 करोड़ की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के अंतर्गत जिला वार एवं कोटि वार निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार कुल 9,347 लाभुकों का चयन किया जाना है। इसके लिए दिनांक 25.02.2026 से 23.03.2026 की निर्धारित अवधि के दौरान उद्यमी पोर्टल के माध्यम से कुल 6,50,425 ऑनलाइन आवेदन प्राप्त हुए हैं।
12. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
वित्तीय वर्ष 2025-26 में पीएमईजीपी योजना के तहत बैंको द्वारा कुल 3473 लाभुकों के विरुद्ध 36058.31 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान किया गया और अबतक कुल रुपए 10527.10 लाख रुपए की राशि विमुक्त की गई है। साथ ही 4427 लाभुकों को 131.10 करोड़ रुपए सब्सिडी प्रदान की गई है।
13. PMFME योजना
PMFME योजना में बिहार ने देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है। PMFME योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 468 करोड़ से अधिक का ऋण वितरण किया गया, जबकि कुल वितरण 1345 करोड़ से अधिक हो चुका है। यह उपलब्धि राज्य को इस क्षेत्र में शीर्ष प्रदर्शनकर्ता के रूप में स्थापित करती है।
14. हस्तकरघा और रेशम
हस्तकरघा और रेशम क्षेत्र राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण घटक हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 198.25 लाख रुपए स्वीकृति के फलस्वरुप 1143 योग्य हस्तकरघा बुनकरों को सूत क्रय हेतु रुपए 15 हजार रुपए- बुनकर की दर से राशि 171.45 लाख रुपए का भुगतान किया गया है तथा अंडी एवं तसर कच्चा रेशम कुल 68.02 मिट्रिक टन (अनन्तिम) का उत्पादन हुआ। 15. खादी और ग्रामोद्योग खादी और ग्रामोद्योग के माध्यम से स्थानीय उत्पादन और रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है। खादी मॉल, पटना ने वर्ष 2025-26 में 22 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की। आगामी परियोजनाओं के अंतर्गत खादी मॉल, पूर्णिया का निर्माण इस वर्ष पूर्ण होने की संभावना है, जबकि दरभंगा एवं झंझारपुर में निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त गया, छपरा, मुंगेर एवं भागलपुर में नए खादी मॉल स्थापित करने का प्रस्ताव है।
15. उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान (UMSAS)
उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान (UMSAS) द्वारा अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक, संस्थान ने कुल 6.77 करोड़ की अधिप्राप्ति दर्ज की और अंबापाली दिल्ली तथा खादी मॉल जैसे विभिन्न बिक्री केंद्रों के माध्यम से 3.60 करोड़ की बिक्री हासिल की। मधुबनी पेंटिंग से जुड़े 200 शिल्पियों को टूलकिट का वितरण किया गया। पटना हवाई अड्डे पर एक नए बिहार एम्पोरियम का निर्माण किया गया। नई दिल्ली में IITF 2025, पटना में बिहार दिवस और सोनपुर मेले में प्रमुख प्रदर्शनी-सह-बिक्री कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां बड़ी संख्या में बुनकरों और शिल्पियों को स्टॉल आवंटित किए गए।
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