लैंड स्कैम में MLA प्रदीप प्रसाद फंसे, हजारीबाग नेक्सजेन शोरूम की अवैध रजिस्ट्री में बने थे गवाह

हजारीबाग लैंड स्कैम में BJP MLA प्रदीप प्रसाद पर एसीबी की जांच का शिकंजा, वन भूमि की अवैध रजिस्ट्री में गवाह बनने पर दर्ज हुई FIR


लैंड स्कैम : झारखंड के चर्चित हजारीबाग लैंड स्कैम (Land Scam Case) में अब  सदर विधायक प्रदीप प्रसाद का नाम भी  जुड़ता हुआ दिख रहा है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में खुलासा हुआ है कि विधायक प्रदीप प्रसाद उस विवादित रजिस्ट्री दस्तावेज के गवाह थे, जिसके जरिए वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री की गई थी।

प्राथमिकी के अनुसार, जिस जमीन की रजिस्ट्री की गई, वह हजारीबाग के बभनवे मौजा, हल्का नंबर 11 के अंतर्गत आती है। इसमें खाता नंबर 95 के प्लॉट नंबर 1055, 1060, 848 (कुल 28 डिसमिल) और खाता नंबर 73 के प्लॉट नंबर 812 (72 डिसमिल) शामिल हैं। यह वही जमीन है जिस पर बाद में Nextgen Showroom का निर्माण किया गया।


Key Highlights:

  • हजारीबाग के सदर विधायक प्रदीप प्रसाद भी लैंड स्कैम मामले में अभियुक्त।

  • एसीबी जांच में सामने आया कि विधायक विवादित रजिस्ट्री डीड के गवाह थे।

  • आईएएस विनय चौबे के कार्यकाल में वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री का मामला।

  • एफआईआर में 70 से अधिक लोगों को नामजद किया गया, कई गिरफ्तार, कुछ अब भी फरार।

  • विनय सिंह और पत्नी स्निग्धा सिंह ने विवादित जमीन पर नेक्सजेन शोरूम बनाया था।


लैंड स्कैम

जानकारी के मुताबिक, इस मामले की रजिस्ट्री 10 फरवरी 2010 को हजारीबाग रजिस्ट्री ऑफिस में की गई थी। दस्तावेज संख्या 1763/1710, बुक नंबर 1, वॉल्यूम नंबर 45 में पेज 31 से 66 तक दर्ज है। इस रजिस्ट्री के दौरान विधायक प्रदीप प्रसाद गवाह के तौर पर मौजूद थे।

लैंड स्कैम

एसीबी ने इस पूरे मामले को कांड संख्या 11/2025 के तहत दर्ज किया है। जांच में सामने आया कि यह जमीन वन भूमि की श्रेणी में आती थी, जिसके बावजूद इसकी अवैध खरीद-बिक्री और बाद में म्यूटेशन कराकर शोरूम खड़ा किया गया।

अब तक इस मामले में कारोबारी विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह, आईएएस अधिकारी विनय चौबे के करीबी लैंड ब्रोकर विजय सिंह, और तत्कालीन सदर अंचल अधिकारी शैलेश कुमार को गिरफ्तार किया जा चुका है। कई अन्य आरोपी अब भी फरार हैं।

लैंड स्कैम

एसीबी की जांच टीम ने इस पूरे प्रकरण में और भी नाम जुड़ने की संभावना जताई है। जांच एजेंसी अब इस बात की तह में जा रही है कि उस समय भूमि की खरीद-बिक्री में किस स्तर पर सरकारी नियमों की अनदेखी की गई और किसे इसका लाभ पहुंचाया गया।

Saffrn

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