मणिपुर की घटना रोकने में नाकाम मोदी सरकार ने पूरे विश्व में देश की छवि को लगाया धक्का- राजेश राठौड़

  • मणिपुर की घटना में मोदी सरकार की नाकामियों से आजीज सर्वोच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान
  • मणिपुर की घटना ने पूरे विश्व में भारत की छवि को किया धूमिल 
  • मणिपुर घटना रोकने में असफल मोदी सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय ने लिया संज्ञान

पटनाः मानसून सत्र में सदन की कार्यवाही शुरू होने से पूर्व 8 मिनट 25 सेकेंड तक पहली बार मीडिया से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुखातिब हुए और अपनी सरकार की नाकामियों के लिए देश की जनता से माफी मांगा, उनका यह प्रेस सम्बोधन पूरी तरीके से दबाव में लिया गया फैसला है. जिसमें उन्होंने अपनी मणिपुर की सरकार के नाकामियों को स्वीकार किया. लेकिन केवल 36 सेकेंड ही अपने पूरे व्यक्तव में उन्होंने उस घटना का जिक्र किया, जो आज से 77 दिन पुरानी है. ये बातें बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने कही. उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार के मुखिया नरेंद्र मोदी ने मणिपुर में तीन बेटियों को निर्वस्त्र करके परेड करा रही बर्बर जनता के समक्ष महिलाओं का आत्म सम्मान गिरवी रख दिया है. यह देश नारियों की पूजा करने वाला रहा है और वर्तमान सरकार ऐसी घटनाओं पर 77 दिनों की चुप्पी साध लेती है. प्रधानमंत्री में दल की सरकार मणिपुर में शासन में और न्याय व्यवस्था पूरी तरीके से चरमराई हुई है. बेटियों के साथ बर्बर भीड़ नग्न परेड और गैंग रेप की घटना कर रही है और केंद्र सरकार व राज्य सरकार इसपर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है.

बेटी बचाओ का नारा देने वाली भाजपा, बेटियों के साथ हो रहे कुकृत्य पर मौन साध लेती है

बिहार कांग्रेस के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने कहा कि बेटी बचाओ का नारा देने वाली भाजपा और प्रधानमंत्री बेटियों के साथ हो रहे कुकृत्य पर मौन साध लेती है. जब मणिपुर जातीय हिंसा की आग में विगत तीन महीनों से जल रही है तो देश के प्रधानमंत्री विदेश दौरे, चुनावी कैम्पेन, एनडीए की बैठक और राजनीतिक उठक पटक में व्यस्त हैं. आज सुप्रीम कोर्ट को मोदी सरकार की नाकामी और मणिपुर की भाजपा सरकार के नाकामियों के कारण स्वतः संज्ञान लेना पड़ा और यह सरकार के इकबाल के खत्म होने का परिणाम है. केंद्र और राज्य की सरकार के साथ व्यक्तिगत तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश से माफी मांग कर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए और मणिपुर की हिंसा को तत्काल रोकने की कोशिश करनी चाहिए. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज खुद को इस घटना से व्यथित एवं क्रोधित बताने के जगह कर्तव्यनिष्ठ होकर कार्रवाई करते तो ज्यादा अच्छा होता.

 

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