municipal elections: रांची नगर निगम मेयर Election में ST आरक्षण से बढ़ी सियासी गर्मी, भाजपा कांग्रेस झामुमो के कई दावेदार मैदान में


municipal elections: रांची नगर निगम मेयर पद एसटी के लिए आरक्षित, दलीय चुनाव नहीं होने के बावजूद भाजपा कांग्रेस और झामुमो अपने समर्थित उम्मीदवारों के साथ रणनीति बनाने में जुटे


municipal elections रांची: रांची में नगर निकाय चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। रांची नगर निगम के मेयर पद के लिए इस बार आधे दर्जन से अधिक संभावित उम्मीदवारों के नाम सामने आ चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस बार मेयर का चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा है, इसके बावजूद सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने अपने समर्थित प्रत्याशियों को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

इस बार मेयर पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित होने के कारण आदिवासी समाज से जुड़े नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। कई नेता अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए जनसंपर्क और संगठनात्मक समर्थन जुटाने में जुट गए हैं।


Key Highlights

  1. रांची नगर निगम मेयर पद के लिए आधे दर्जन से अधिक दावेदार मैदान में

  2. इस बार मेयर पद अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित

  3. भाजपा, कांग्रेस और झामुमो अपने समर्थित उम्मीदवार उतारने की रणनीति में

  4. आदिवासी समाज में चुनाव को लेकर खासा उत्साह

  5. दलीय चुनाव नहीं होने के बावजूद राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक रहे



municipal elections: एसटी आरक्षण से बदली चुनावी तस्वीर

मेयर पद के एसटी वर्ग के लिए आरक्षित होने से चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। आदिवासी समुदाय से जुड़े नेताओं को पहली बार बड़े पैमाने पर मौका मिलने से राजनीतिक सरगर्मी तेज है। सामाजिक संगठनों और स्थानीय नेताओं के बीच भी अपने अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को आगे बढ़ाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं।


municipal elections:भाजपा कांग्रेस और झामुमो में मंथन तेज

भाजपा समर्थित संभावित उम्मीदवारों में अशोक बड़ाइक, रोशनी खलखो, संजय टोप्पो और रवि मुंडा के नाम चर्चा में हैं। एक से अधिक दावेदार होने के कारण पार्टी खेमे में अंदरूनी मंथन तेज है। वहीं कांग्रेस की ओर से रमा खलखो और अजय तिर्की को प्रमुख चेहरा माना जा रहा है। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा की तरफ से बीरू तिकीं समेत अन्य नेता भी अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

municipal elections:दलीय चुनाव नहीं फिर भी दलों की पूरी तैयारी

भले ही नगर निकाय चुनाव दलीय आधार पर नहीं हो रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि भाजपा, कांग्रेस और झामुमो समेत सभी प्रमुख दल अपने समर्थित उम्मीदवारों के जरिए अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं। जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जा रहा है ताकि समर्थित प्रत्याशियों को अधिकतम सहयोग मिल सके और राजनीतिक पकड़ मजबूत की जा सके।

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