रांची : नाबार्ड के अधिकारियों- ऑल इंडिया नाबार्ड ऑफिसर्स एसोसिएशन ने वेतन और भत्ते के
संशोधन में विसंगति के विरोध में शुक्रवार को राष्ट्रीय स्तर पर एक दिवसीय हड़ताल किया.
आज नाबार्ड के झारखंड क्षेत्रीय कार्यालय, रांची में भी सभी अधिकारी हड़ताल पर रहे.
साथ ही जिलों में पदस्थापित सभी जिला विकास प्रबन्धक (डीडीएम) भी हड़ताल पर रहे.
सभी अधिकारियों ने कार्यालय गेट पर धरना और प्रदर्शन किया.
बातचीत के बाद भी नहीं सुलझा मामला
नाबार्ड ऑफिसर्स एसोसिएशन की झारखंड इकाई के पदाधिकारियों ने बताया कि
पिछले दो महीनों में डीएफएस के अधिकारियों को दिए गए कई अभ्यावेदनों और
कई दौरों की बातचीत के बाद, उनके पास हड़ताल पर जाने के अलावा कोई नहीं विकल्प नहीं बचा.
इसके बाद संसद तक मार्च निकाला जाएगा और भूख हड़ताल आंदोलन भी किया जाएगा.

नाबार्ड ऑफिसर्स एसोसिएशन की झारखण्ड इकाई के सचिव मो. आफताब उद्दीन ने बताया कि
इस हड़ताल को सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा भी समर्थन दिया गया हैं,
क्योंकि यह वेतन संशोधन भविष्य के लिए सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों और
पूरे संगठन के लिए भी निहितार्थ रखता है. 14 सितंबर 2022 के डीएफएस के आदेश के
परिणामस्वरूप 21 सितंबर 2022 को प्रशासनिक परिपत्र जारी होने के बाद से ही नाबार्ड के अधिकारी आंदोलन पर हैं.
नाबार्ड के अधिकारियों: मजाक बन गया ग्रेड
सबसे पहले, इस आदेश ने अधिकारियों के समान कैडर के लिए दोहरे और विभेदित वेतन की शुरुआत की. 1982 में नाबार्ड के गठन के समय भारतीय रिजर्व बैंक से आए स्टाफ के लिए अधिक वेतन और नाबार्ड द्वारा सीधे भर्ती किए गए स्टाफ के लिए कम वेतन निर्धारित किया गया.
अधिकारी के ग्रेड के अनुसार भुगतान किए जाने वाले ग्रेड भत्ते को घटाया गया. हालांकि, डीएफएस के आदेश के अनुसार, निचले ग्रेड के अधिकारी उच्च ग्रेड के अधिकारियों की तुलना में अधिक ग्रेड भत्ता प्राप्त कर रहे हैं, जिससे नामकरण ‘ग्रेड’ का मजाक बनाया जा रहा है.
समान काम के लिए समान वेतन मानक का उल्लंघन
यह एक ही संगठन में ‘समान काम के लिए समान वेतन’ मानक का उल्लंघन है. दोनों श्रेणी के अधिकारी – जो 1982 में भारतीय रिजर्व बैंक से आए थे और जो नाबार्ड द्वारा भर्ती किए गए थे समान वेतन और भत्ते प्राप्त कर रहे थे. पिछले 35 वर्षों में सात समझौतों के माध्यम से इस प्रथा का पालन किया गया.
नाबार्ड के अधिकारियों : पेंशन सहित सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ा प्रभाव
आठवें समझौते (2017-2022) की अवधि में नाबार्ड द्वारा भर्ती किए गए अधिकारियों के भत्तों में कटौती इतनी भारी है कि इसने भारतीय रिजर्व बैंक से आए अधिकारियों की तुलना में उनकी सकल परिलब्धियों में 10 प्रतिशत से 12 प्रतिशत की कमी कर दी है, जिसका पेंशन सहित सेवानिवृत्ति लाभों पर भारी प्रभाव पड़ा हैं.
दिलचस्प बात यह है कि डीएफएस मंहगाई भत्ते को ध्यान में रखे बिना सरल गणित करने में विफल रहा और इस तरह, पूर्व-संशोधित और संशोधन के बाद के वेतनमानों में महंगाई भत्ते के साथ समायोजित होने पर ग्रेड भत्ते का शुद्ध प्रभाव सभी ग्रेडों में नकारात्मक है.
इस आदेश ने निदेशक मंडल द्वारा अनुमोदित समझौते का उल्लंघन करते हुए एक और भत्ता भी कम कर दिया है और इसे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के अधिकारियों के बराबर कर दिया है, जो बैंकिंग विनियम अधिनियम, 1949 के तहत नाबार्ड द्वारा पर्यवेक्षण की जा रही संस्थाएँ हैं.
रिपोर्ट: शाहनवाज
Highlights







