रांची: झारखंड विधानसभा में भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने जल जीवन मिशन के तहत 62 लाख घरों को जलापूर्ति योजना की धीमी प्रगति पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यह योजना पहले 2022 तक पूरी होनी थी, लेकिन बाद में इसे 31 दिसंबर 2024 तक बढ़ा दिया गया। अब राज्य सरकार का कहना है कि इसे 2026 तक पूरा किया जाएगा।
नवीन जायसवाल ने विधानसभा में कहा कि सरकार ने पहले 2024 तक योजना पूरी करने का वादा किया था, लेकिन अब तक यह अधूरी है। उन्होंने पूछा कि इस योजना की कुल लागत कितनी है, केंद्र और राज्य सरकार को इसमें कितना योगदान देना था और अब तक केंद्र सरकार से कितना फंड प्राप्त हुआ है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि केंद्र सरकार से राज्य सरकार का कितना बकाया है।
राज्य सरकार के मंत्री ने जवाब में कहा कि जल जीवन मिशन के तहत अब तक 34 लाख 24 हजार घरों में जलापूर्ति की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि योजना केंद्र और राज्य सरकार के बीच 50-50% के अनुपात में चल रही है, लेकिन जब तक केंद्र से पूरी राशि नहीं मिलेगी, राज्य अपनी पूरी हिस्सेदारी नहीं लगा सकता।
मंत्री के अनुसार, जल जीवन मिशन की कुल लागत 24,665.30 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 12,257.83 करोड़ और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 12,407.47 करोड़ रुपये है। अब तक केंद्र से केवल 5,917 करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि राज्य सरकार ने अपनी ओर से 5,810 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार को केंद्र से अभी भी 3,300 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त करनी है।
नवीन जायसवाल ने विधानसभा में सरकार से पूछा कि जब जलापूर्ति योजना 2026 तक पूरी नहीं हो सकती, तो वर्तमान में पानी की समस्या से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने मांग की कि जहां पानी की भारी किल्लत है, वहां मिनी एचवाईडीटी (हाई इंटेंसिटी डीप ट्यूबवेल) जैसी वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।
इस मुद्दे पर बहस के दौरान मंत्री और विधायक के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। विधायक जायसवाल ने कहा कि केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी पहले नहीं देती, बल्कि कार्य पूरा होने के बाद ही फंड जारी करती है। इस पर मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि विधायक “नीरव मोदी वाला कैलकुलेटर” लेकर बैठे हैं और गलत आंकड़े पेश कर रहे हैं।







