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कभी थिएटर में काम करने पर नहीं मिलते थे पैसे, फिर भी नहीं मानी हार, जानिए अनूप सिंह की कहानी…

गयाजी : कहते हैं हर संघर्ष के पीछे एक सफलता छुपी होती है। कुछ ऐसी ही कहानी भाभी जी घर पर हैं। हर तरह का किरदार निभाने वाले अनूप कुमार सिंह की है। अनूप सिंह बिहार के गयाजी जिले के नक्सल प्रभावित रहे फतेहपुर के इलाके से हैं। अनूप ने छोटे पर्दे पर दर्जनों टीवी सीरियलों में काम करने का एक तरह से रिकॉर्ड बना दिया है। इन्होंने 50 से अधिक टीवी सीरियलों में अब तक काम किया है। वहीं, बड़े पर्दे पर भी अपने कैरेक्टर को निभा चुके हैं। कभी काम करने पर थिएटर में पेमेंट तक नहीं मिलते थे। किंतु अनूप ने ऐसा संघर्ष किया कि अपने फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें ऊंचाइयों का मुकाम मिला है। आज इन्हें देश से लेकर विदेश तक में पहचान है।

अनूप ने कई सालों के संघर्ष के बाद अभिनय के क्षेत्र में अपनी सफलता की गाथा लिखी

आपको बता दें कि कैसे अनूप ने कई सालों के संघर्ष के बाद अभिनय के क्षेत्र में अपनी सफलता की गाथा लिखी। गयाजी के सुदूरवर्ती गांव के रहने वाले अनूप कुमार सिंह की माया नगरी मुंबई तक के सफर की कहानी काफी लंबी है। अनूप जमीन से जुड़े छोटे पर्दे के चर्चित कलाकार हैं। बड़ा पर्दा भी इनसे अछूता नहीं है। बड़े और छोटे पर्दे पर इन्होंने अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। काफी संघर्ष के साथ उन्होंने अपनी एक बड़ी पहचान अभिनय की दुनिया में बनाई है। अलग-अलग कैरक्टरों में सफल अभिनय कर यह देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी फेमस हुए हैं।

अभिनय की दुनिया में आने के बाद कभी थिएटर में काम करने के दौरान अनूप को पेमेंट नहीं मिलते थे

अभिनय की दुनिया में आने के बाद कभी थिएटर में काम करने के दौरान अनूप सिंह को पेमेंट नहीं मिलते थे। लेकिन इससे वे हताश नहीं हुए और अपने कैरियर को आगे बढ़ाने को संकल्पित रहे। यही वजह रही, कि जैसे ही टीवी सीरियलों में इन्होंने काम करना शुरू किया। वैसे ही सब कुछ सही होता चला गया। अनूप कुमार सिंह आज छोटे-बड़े पर्दे के मशहूर चेहरे हैं। गांव की गलियों में सड़कों पर नाटक का मंचन करते उन्हें अभिनय क्षेत्र में कुछ कर गुजरने का शौक बचपन से चढ़ गया था। फिर सात महज सात साल की उम्र से यह नाटक से जुड़े थे। गांव में सड़क हो, या स्कूल का कमरा, जहां भी मौका मिलता यह नाटक मंचन से जुड़ जाते। सात साल की उम्र में कभी कृष्ण का रूप तो कभी भारत माता का रूप बन जाते थे। स्कूल-कॉलेज में आते-आते इनका अभिनय निखारने लगा था। इसके बाद वे कोलकाता में थियेटर में अभिनय ग्रुप से जुड़ गए। यहां के बाद फिर मुंबई में जाकर थिएटर से जुड़े। छोटे-छोटे कैरेक्टर के बाद लीड कैरेक्टर भी मिलने लगे।

संघर्षरत रहे तो सफलता मिलती है – अनूप कुमार सिंह

चर्चित कलाकार अनूप कुमार सिंह बताते हैं कि संघर्षरत रहे तो सफलता मिलती है। वही, फैमिली का मोरल सपोर्ट भी काफी काम आता है। उन्होंने भी काफी संघर्ष किया। फिल्म इंडस्ट्री में काफी शुरूआती परेशानी है। काफी संघर्ष से गुजरना पड़ता है। मेरा मानना है, कि संघर्ष से व्यक्ति खुद मजबूत बनता है और आगे भी बढ़ता है। संघर्ष के पीछे सफलता जरूर होती है। मेरा शुरुआती एजुकेशन किसी तरह से पूरा हुआ। कई तरह के ऐसे मोड़ आए जो विपरीत हालातों वाले थे, लेकिन फैमिली के मोरल सपोर्ट और खुद का विश्वास। सब कुछ आसान करती चली गई। इसके बाद मेरे लिए परेशानी की अब कोई बात नहीं है।

अनूप सिंह बताते हैं कि वह हर तरह का किरदार कर लेते हैं

अनूप सिंह बताते हैं कि वह हर तरह का किरदार कर लेते हैं। इसके पीछे का एक बड़ा कारण है क्योंकि उन्होंने एक जमीनी और संघर्ष पूर्ण जीवन व्यतीत किया है। गांव की गलियों से लेकर माया नगरी मुंबई तक यह संघर्ष बना रहा, जिससे सफलतापूर्वक हर किरदार निभा लेते हैं। कह सकता हूं कि जमीनी स्तर पर जिंदगी जीने वाला अभिनय की दुनिया में हर तरह का किरदार निभा सकता है। मुझे आज हर दर्शकों से स्नेह मिलता है। जमीनी जिंदगी जीने के कारण हर तरह का किरदार कर लेता हूं। मेरा मानना है कि जो पूरी तरह से अमीरी जिंदगी जीने वाले होते हैं, उन्हें गरीबी का कैरेक्टर करना मुश्किल हो सकता है।

मुंबई हो या कोलकाता.. हिंदी थिएटर में पेमेंट नहीं है – अनूप कुमार सिंह

अनूप कुमार सिंह बताते हैं कि मुंबई हो या कोलकाता.. हिंदी थिएटर में पेमेंट नहीं है। दिल्ली में थोड़ा बहुत लचीला है। किंतु अन्य राज्यों में भी देखें तो हिंदी थिएटर में पेमेंट नहीं मिलता है। वहीं, कोलकाता में बांग्ला, मुंबई में इंग्लिश, मराठी व गुजराती में अच्छे खासे पैसे कलाकारों को मिलते हैं। वही, हिंदी थिएटर में कन्वेंस के नाम पर जो मिल गया, वहीं सिर्फ रहता है। वही, साफ-साफ कहें तो हिंदी थिएटर में कलाकारों के साथ आर्थिक न्याय नहीं हो पाता है। किंतु जैसे ही सीरियल या फिल्मों में आते हैं तो हालात एकदम से बदल जाते हैं। सीरियल फिल्मों में अच्छे पैसे मिलने शुरू हो जाते हैं। आज भी हम कह सकते हैं कि हिंदी थिएटर में खासकर आर्थिक न्याय नहीं हो पाता है।

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अनूप महज 20-22 वर्ष की उम्र से अच्छे-अच्छे टीवी सीरियलों में अभिनय कर रहे हैं

अनूप कुमार सिंह महज 20-22 वर्ष की उम्र से अच्छे-अच्छे टीवी सीरियलों में अभिनय कर रहे हैं। बेहतरीन अभिनय के कारण इन्हें भारत के हर दर्शक करीब-करीब जानते हैं। साथ ही विदेश में भी इनकी अच्छी कलाकारी की बड़ी इमेज है। अनूप सिंह बताते हैं कि ग्रेजुएशन के बाद मुंबई चला गया। महज 20-22 साल की उम्र थी जब टीवी सीरियल में काम करना शुरू कर दिया। कई पुरस्कार भी उन्हें अभिनय के क्षेत्र में मिल चुके हैं।

हिंदी थिएटर में पेमेंट नहीं है. यूं कहें, कि हिंदी थिएटर में कलाकारों के साथ आर्थिक न्याय नहीं हो पाता है – अनूप सिंह

अनूप सिंह ने कहा कि हिंदी थिएटर में पेमेंट नहीं है। यूं कहें कि हिंदी थिएटर में कलाकारों के साथ आर्थिक न्याय नहीं हो पाता है। वहीं, जो कलाकार जमीन से जुड़ें हों, वह हर तरह का किरदार निभा सकते है। मेरा मानना है कि पूरी तरह अमीरी में जीने वाले को गरीब का कैरेक्टर निभाना काफी मुश्किल भरा हो सकता है। मैं सात साल की उम्र से इस क्षेत्र के प्रति समर्पित रहा। गांव की गलियों में सड़कों पर नाटक मंचन करता रहा। कॉलेज के दिनों में भी यह जारी रहा। ग्रेजुएशन करने के बाद कोलकाता और फिर मुंबई मायानगरी को रवाना हुआ। आज हमें सफलता मिली है। देश के अलावा विदेशों में भी हमारी पहचान है। 50 से अधिक टीवी सीरियल में काम कर चुका हूं। फिलहाल में भाभी जी घर पर है। सीरियल से जुड़ा हुआ हूं। अपने दर्शकों का धन्यवाद करना चाहता हूं कि वे मेरे साथ हमेशा स्नेह रखते हैं।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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