UP में Love Jihad पर नया बिल पास, अब इसके अपराधी को होगी ताउम्र जेल और जहन्नुम बनेगी जिंदगी

डिजीटल डेस्क : UP में Love Jihad पर नया बिल पास,  अब इसके अपराधी को होगी ताउम्र जेल और जहन्नुम बनेगी जिंदगी। सोमवार को विधानसभा में यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक पेश किया गया था और उसे मंगलवार को पारित कर दिया गया। इसी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की वह चेतावनी हकीकत में तब्दील हो गई है जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘लव जिहाद छोड़ दो या राम नाम सत्य के लिए तैयार रहो’।

विधानसभा से पारित होने के बाद उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक को विधान परिषद भेजा जाएगा और उच्च सदन से पारित होने के बाद राज्यपाल के पास जाएगा। फिर इसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा।

Love Jihad और इसके अपराधियों के खिलाफ शुरू से ही मुखर रहे हैं योगी आदित्यनाथ

बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक पेश किया। पेश किए गये बिल को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक नाम दिया गया है। नाबालिग, एससी-एसटी का धर्म परिवर्तन कराने पर उम्रकैद के प्रावधान वाला विधेयक मंगलवार को विधानसभा से पारित हो गया।

भाजपा ने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में यूपी में ‘Love Jihad’ को चुनावी मुद्दा बनाया था और तब गोरखपुर से भाजपा के सांसद रहे योगी आदित्यनाथ पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में इसी मुद्दे पर सबसे ज्यादा मुखर थ। बाद में सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने Love Jihad को रोकने के लिए सरकार के स्तर पर वर्ष 2020 में यूपी विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश पास किया था। फिर वर्ष 2021 में इसे विधानमंडल से पास कराकर विधिवत कानूनी जामा पहनाया गया था।

तब इस कानून के तहत अधिकतम 10 साल की सजा और 50 हजार तक जुर्माना था। नए विधेयक में अपराध का दायरा और सजा दोनों ही बढ़ा दिया गया है। संशोधित अधिनियम में छल कपट या जबरदस्ती कराए गए धर्मांतरण के मामलों में कानून को पहले से सख्त बनाते हुए अधिकतम आजीवन कारावास या पांच लाख रुपये के जुर्माने की सजा का प्रावधान किया गया है।

संशोधित विधेयक में किसी महिला को धोखे से जाल में फंसाकर धर्मांतरण कर अवैध तरीके से विवाह करने और उत्पीड़न के दोषियों को अधिकतम आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

अब Love Jihad और धर्मांतरण का एफआईआर कोई भी करा सकेगा

संशोधित अधिनियम में ऐसे मामलों में 20 वर्ष कारावास या आजीवन कारावास का प्रावधान किया गया है। जब यह विधेयक के रूप में पहली बार पारित करने के बाद कानून बना तब इसके तहत अधिकतम 10 साल की सजा और 50 हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान था। संशोधित प्रावधान के तहत यह व्यवस्था दी गई है कि धर्मांतरण मामलों में अब कोई भी व्यक्ति प्राथमिकी दर्ज करा सकेगा।

इससे पहले मामले की सूचना या शिकायत देने के लिए पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन का होना जरूरी था, लेकिन अब दायरा बढ़ा दिया गया है। अब कोई भी इसकी सूचना लिखित तौर पर पुलिस को दे सकता है। संशोधित मसौदे में यह प्रस्ताव किया गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र अदालत से नीचे नहीं होगी और लोक अभियोजक को मौका दिए बिना जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा। प्रस्तावित मसौदे के तहत इसमें सभी अपराध गैर-जमानती बना दिए गए हैं।

इसमें प्रस्ताव किया गया है कि कोई व्यक्ति धर्मांतरण कराने के इरादे से किसी को अगर धमकी देता है, हमला करता है, विवाह करता या करने का वादा करता है या इसके लिए साजिश रचता है, महिला, नाबालिग या किसी की तस्करी करता है तो उसके अपराध को सबसे गंभीर श्रेणी में रखा जाएगा।

Love Jihad : योगी सरकार ने अब कानून में किए कई नए बदलाव और संशोधन

यूपी की सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ सरकार का कहना है कि गुमराह कर शादी करने और अनुसूचित जाति व जनजाति (एससी- एसटी) के धर्म परिवर्तन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन्हीं मामलों पर राज्य सरकार अंकुश लगाने जा रही है। बदलाव के लिए लाए गए इस विधेयक में धर्म परिवर्तन से जुड़े अपराधों में सजा की अवधि को बढ़ाने का प्रावधान है। इसमें आजीवन कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

साथ ही, विदेशों से धर्म परिवर्तन के लिए होने वाली फंडिंग पर अंकुश लगाने के लिए भी सख्त प्रावधान किए गये हैं। संशोधन के जरिये पिछले विधेयक को सजा और जुर्माने की दृष्टि से और मजबूत किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी नाबालिग, दिव्यांग अथवा मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, एससी-एसटी का धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया जा सकेगा।

इसी तरह, सामूहिक धर्म परिवर्तन पर भी आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी। विदेशी या गैरकानूनी संस्थाओं से फंडिंग हासिल करने पर 14 वर्ष तक की सजा और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान किया है। यदि कोई धर्म परिवर्तन के लिए किसी व्यक्ति के जीवन या संपत्ति को भय में डालता है, हमला या बल प्रयोग करता है, शादी करने का झूठा वादा करता है, प्रलोभन देकर किसी नाबालिग, महिला या व्यक्ति की तस्करी करता है, तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा होगी।

इसे ताउम्र तक बढ़ाया जा सकेगा। पीड़ित के इलाज और पुनर्वास के लिए भी जुर्माना देना होगा।

मंगलवार यूपी विधानसभा में लव जिहाद पर संशोधित विधेयक के पारित होने पर सरकार की ओर बोलते कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना।
मंगलवार यूपी विधानसभा में Love Jihad पर संशोधित विधेयक के पारित होने पर सरकार की ओर बोलते कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना।

Love Jihad : योगी सरकार ने बताया – पुराने कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी ? विपक्ष का विरोध

योगी आदित्यनाथ सरकार के मुताबिक, यह संशोधन विधेयक धर्म परिर्वतन के अपराध की संवेदनशीलता और गंभीरता के मद्देनजर लाया गया है। इससे विदेशी एवं राष्ट्रविरोधी ताकतों की संगठित साजिश रोकी जा सकेगी। सजा और जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ जमानत की कड़ी शर्तों के प्रावधान भी किए गए हैं। साथ ही, नाबालिग, दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भी अपराध का शिकार होने से बचाया जा सकेगा।

विधानसभा में मुख्य विपक्ष दल समाजवादी पार्टी ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि भाजपा केवल नकारात्मक राजनीति करना चाहती है। वह बेरोजगारी और पेपर लीक के बारे में कुछ नहीं करना चाहती। चांद ने कहा कि ये ध्यान भटकाने वाले मुद्दे हैं। इनसे लोगों का कोई भला नहीं होगा।वहीं कुछ मुस्लिम संगठनों ने प्रस्तावित कानून का विरोध जताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि धर्मांतरण और गुमराह कर शादी करने पर पहले से ही कानून है।

अतिरिक्त कानून बनाने का कोई औचित्य नहीं है। मौलाना शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि ऐसा लगता है कि इस विधेयक से यूपी सरकार कुछ तबकों को भयभीत करना चाहती है।

Love Jihad : झारखंड और यूपी के अलावा आठ राज्यों में हैं धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून

इस क्रम में यह बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश एकलौता राज्य नहीं है जहां धर्मांतरण विरोधी कानून है। अगस्त 2023 तक देशभर में 10 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हो चुके थे। उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा में ये कानून हैं।

पिछले साल अगस्त में महाराष्ट्र धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने का ऐलान किया था। महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि राज्य अन्य राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानूनों का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लेकर आएगा।

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