मौत की सुरंग बनी निरसा की अवैध कोयला खदान, चाल धंसने से कई मजदूरों की मौत

निरसा (धनबाद) : कोयलांचल धनबाद के निरसा में तीन अलग-अलग अवैध कोयला खदानों में चाल धंसने से दर्जनभर से अधिक मजदूरों की मौत हो गई, जबकि कई लोग अभी भी मौत के सुरंग में दबे हुए हैं ऐसी आशंका जताई जा रही है. जबकि प्रशासन ने पांच मौत की पुष्टि की है. वहीं स्थानीय लोगों ने कहा कि अभी तक 11 लोगों की चाल धंसने से मौत हुई है. मौके पर पूर्व विधायक अरूप चटर्जी के प्रयास से रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया तब जाकर खदान में फंसे लोगों के शवों को बाहर निकाला जा सका. हालांकि रेस्क्यू ऑपरेशन अब बंद हो चुका है जो लोग अंदर दबे हैं उन्हें अब कफ़न भी नसीब नहीं होगी.

2 दर्जन से अधिक लोग दबे

पहली घटना इसीएल मुगमा एरिया की गोपिनाथपुर आउटसोर्सिंग के बंद पड़े खदान में मंगलवार की अहले सुबह करीब 4 बजे हुई जब अवैध उत्खनन के दौरान चाल धंसी और लगभग 2 दर्जन से अधिक लोग दब गये. दूसरी घटना अहले सुबह ही कापासारा एवं तीसरी घटना बीसीसीएल की दहीबाड़ी कोलियरी के आउटसोर्सिंग में हुई. यहां भी चाल धंसी और दर्जनों मजदूर काल के गाल में समा गये. स्थानीय लोगों ने इसके लिए ईसीएल बीसीसीएल एवं सीआईएसएफ को जिम्मेदार ठहराया और मिलीभगत से तस्करों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खनन करने का आरोप लगाया.

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यहां भी हो चुकी है मौत का मंजर

अवैध कोयले का उत्खनन में मौत का ऐसा मंजर धनबाद के निरसा, कतरास एवं तेतुलमारी में पहले भी हो चुकी है. हर बार कोयला मफियाओं की साठगांठ जिला प्रशासन, पुलिस एवं सीआईएसएफ के वरीय अधिकारियों एवं खनन कम्पनियों के पदाधिकारियों से हो जाती है और मामला रफा दफा हो जाता है. मरने वालों के परिजन भी मुह बंद रखते हैं क्योंकि तस्कर कोयला चोरी का केस होने का भय दिखाकर बरगला देते हैं. वर्ष 2019 में तत्कालीन डीसी ए दोड्डे ने ईसीएल अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराया था. पूर्व विधायक अरूप चटर्जी ने हादसे के लिये वर्तमान प्रबंधन, सीआईएसएफ प्रशासन एवं पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है.

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ऐसे हुआ बड़ा हादसा

इसीएल मुगमा एरिया की गोपिनाथपुर ओसीपी, कापासारा एवं दहीबाड़ी में प्रत्येक दिन की भांति मंगलवार को भी सैंकड़ो की संख्या में अवैध उत्खननकर्ता अवैध उत्खनन कार्य में लगे हुए थे. तभी चाल का एक बड़ा हिस्सा गिर पड़ा जिस कारण लगभग इन तीनों जगहों पर दर्जनों लोग दब गये. मिली भगत की पोल खुलने के डर से प्रबंधन तो रेस्क्यू चलाने को भी तैयार नहीं था, लेकिन अरूप चटर्जी के दबाव में रेस्क्यू शुरू किया गया. इस आशा के साथ कि कोई जिंदा बचा हो तो उसे बचा लिया जाए. तीनो जगहों से 11 शव निकाले गए जिसमें महिला मजदूरों के शव भी शामिल हैं. अभी भी कई मजदूरों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है. इस तरह से मंगलवार की सुबह निरसा विधानसभा के लिए अमंगलकारी साबित हुई.

देर शाम ग्रामीण एसपी रेशमा रमेशन भी घटनास्थल पर पहुंची और जायजा लिया. इसके अलावा एसडीएम प्रेम कुमार तिवारी और एसडीपीओ भी घटनास्थल पर मौजूद रहे. पूरे मामले में धनबाद उपायुक्त संदीप सिंह ने महज 5 लोगों के मौत की पुष्टि की है. एसएसपी ने ग्रामीण एसपी रेशमा रमेशन के नेतृत्व में एसआईटी का गठन कर जांच का जिम्मा सौंपा है. उपायुक्त ने इस घटना के लिए दोषी लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई करने की बात भी कही है.

पूर्व विधायक ने लगाया इनपर आरोप

जिस तरह से धनबाद कोयलांचल में ऐतिहासिक तरीके से कोयले के अवैध उत्खनन का आरोप पूर्व विधायक ने लगाया है इस मामले में कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करने के बजाए इसमें शामिल सीआईएसएफ, ईसीएल और बीसीसीएल के अधिकारियों के साथ साथ तस्करों पर भी ठोस कार्रवाई की जरूरत है, तभी इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है. अन्यथा इसी तरह से ही अवैध उत्खनन में मजदूरों की जान जाती रहेगी और कोयला तस्करों की गाड़ियां चमचमाती रहेंगी.

रिपोर्ट : राजकुमार जायसवाल/संदीप कुमार शर्मा

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