अमेरिका से मंगाया गया काले आलू की बीज
गया : बिहार में पहली बार काले आलू की खेती होगी. गया के किसान आशीष कुमार ने
अमेरिका से 14 किलो काले आलू की बीज मंगाई है. बिहार के गया में पहली दफा
काले आलू की खेती की शुरुआत की गई है. बताया जाता है कि यह देश में
एक या दो के स्थान पर इसकी खेती की जाती है. बाजार में काले आलू 300 से 400 रुपए किलो बिक रही है.

पौष्टिक होता है काला आलू
बिहार में पहली दफा इसकी पैदावार करने वाले आशीष कुमार सिंह कहा कि जैसे पीले आलू की खेती
की जाती है उसी विधि से काले आलू की भी खेती की जाती है.
गया जिले के टिकारी प्रखंड अंतर्गत गुलरिया चेक में फिलहाल ब्लैक पोटैटो की खेती की
शुरुआत कर दी गई है. फिलहाल में काले आलू का उपयोग गिने चुने लोग करते हैं.

अमेरिका से मंगवाई का लालू के बीच की खेत
किसान आशीष कुमार सिंह ने कुरियर से 14 किलो बीज मंगाए हैं.
हमने फसल भी लगा दी है, और जनवरी-फरवरी तक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा.
उन्होंने कहा कि 10 ग्राम के बीच में आधा किलो आलू की खेती होती है.
यूट्यूब से आया खेती का आइडिया
उन्होंने कहा कि वह हमेशा आर्टिकल पढ़ते हैं और यूट्यूब पर भी विभिन्न चीजों को देखते रहते हैं. इसी क्रम में उन्होंने काले आलू की खेती देखी थी, जिसमें बताया गया कि काले आलू की खेती भारत में नहीं के बराबर होती है. हिमाचल प्रदेश में ही इसकी खेती होती है. यूट्यूब में काले आलू की पौष्टिकता और उसके फायदे बताए गए थे. इसके बाद उनके दिमाग में काले आलू की खेती करने का आइडिया आया और उन्हें इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल की.

कम होती है शुगर की मात्रा, डायबिटीज मरीज कर सकते हैं इसका इस्तेमाल
बिहार में पहली बार काले आलू की खेती की शुरुआत करने वाले किसान आशीष कुमार सिंह ने कहा कि हमने दक्षिण अमेरिका से 14 किलो काले आलू के बीज मंगाए. भविष्य में इसकी मांग बढ़ेगी और लोगों को भी इसकी जानकारी देंगे. उन्होंने कहा कि जिस तरह बीमारियां बढ़ रही है, ऐसे में इसकी खेती करने से मील का पत्थर साबित होगा. आजकल डायबिटीज मरीज आलू न के बराबर खाते हैं. किंतु अब उन्हें उतनी सावधानी और समझने की जरूरत नहीं पड़ेगी. वह पौष्टिक माने जाने वाले काले आलू को आराम से खा सकते हैं. क्योंकि इस में शुगर की मात्रा बेहद ही नाम मात्र होती है. इस तरह डायबिटीज मरीजों के लिए यह कम हानिकारक है.
खेती में 21000 रुपए हुए खर्च
किसान आशीष कुमार सिंह बताते हैं कि इसकी खेती में कोई अलग से मेहनत नहीं है. करीब-करीब हर तरह की मिट्टी में इसकी खेती होती है. उन्होंने अपने गांव गुलेरिया चक में खेती की. इसकी खेती में 21000 रुपए खर्च आए हैं.
आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है काले आलू
किसान आशीष कुमार सिंह बताते हैं कि काला आलू आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर है. काले आलू मूल रूप से दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वत क्षेत्र में उगाए जाते हैं. इसे फिलहाल प्रयोग के तौर पर 14 किलोग्राम बीज मंगाया गया है. इस आलू के ऊपरी भाग काला होता है और आंतरिक भाग गहरे बैगनी रंग का होता है. गुणों से भरपूर इस आलू के इस्तेमाल से स्वास्थ्य लाभ लिया जा सकता है.
एंथोसाइएनिन नामक पॉलीफेनॉल एंटी ऑक्सीडेंट से है भरपूर
इनका दावा है कि काला आलू विशेष रूप से एंथोसाइएनिन नामक पॉलीफेनॉल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं. एंथोसाइन इनका सेवन स्वस्थ कोलेस्ट्रोल के स्तर हड्डी और हृदय रोग के अलावा कुछ कैंसर और मधुमेह के जोखिम को कम करता है और कई लाभों से जुड़ा रहता है. काला आलू खाने से रक्त वाहिका और रक्तचाप स्वास्थ्य को फायदा मिलता है. यह आंशिक रूप से उच्च पोटेशियम सामग्री पाए जाने के कारण होता है. काले आलू पोषक तत्व, रक्तचाप को कम करने में मदद करता है. इसे काला बैगनी आलू भी कह सकते हैं.
रिपोर्ट: आशीष
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