रक्सौल सीमा पर गायब हो रहे पिलर, भारत-नेपाल अधिकारियों की बैठक के बाद जांच तेज, SSB को जिम्मेदारी

मोतिहारी : मोतिहारी जिले के रक्सौल अनुमंडल क्षेत्र में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है। भलुआहा सीमा क्षेत्र में पिलर संख्या-395 के आसपास कई सब-पिलर के गायब होने की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। इस मुद्दे को लेकर हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में भारत और नेपाल दोनों देशों के अधिकारियों ने गंभीर चिंता जताई और तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

समीक्षा बैठक में बिहार के मुख्य सचिव व DGP सहित कई अधिकारी रहे शामिल

बताया जाता है कि 18 अप्रैल को आयोजित समीक्षा बैठक में बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक विनय कुमार के नेतृत्व में पूर्वी और पश्चिम चंपारण के प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, सशस्त्र सीमा बल (SSB) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। बैठक में सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों जैसे सीमा स्तंभों की स्थिति, अतिक्रमण, घुसपैठ और तस्करी पर विस्तृत चर्चा की गई। इसी दौरान तैयार किए गए रिकॉर्ड में यह सामने आया कि भलुआहा क्षेत्र में कई सब-पिलर गायब हैं।

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मामले की सच्चाई जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस बात की पुष्टि की

इस मामले की सच्चाई जानने के लिए ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस बात की पुष्टि की। गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने बताया कि भारत-नेपाल की खुली सीमा को चिन्हित करने में इन पिलरों की अहम भूमिका होती है। बड़े पिलरों के बीच छोटे-छोटे सब-पिलर लगाए जाते हैं, जो सीमा की सटीक पहचान कराते हैं। हालांकि, अब इनमें से कई सब-पिलर नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे स्थिति चिंताजनक हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले ये सभी पिलर स्पष्ट रूप से दिखाई देते थे, लेकिन समय के साथ कई पिलर या तो क्षतिग्रस्त हो गए हैं या पूरी तरह से गायब हो चुके हैं।

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सीमा की स्पष्ट पहचान में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही

हालांकि कैमरे पर बोलने से लोग हिचकते नजर आए, लेकिन उन्होंने ऑफ द रिकॉर्ड स्वीकार किया कि सीमा की स्पष्ट पहचान में अब पहले जैसी स्थिति नहीं रही। सीमा स्तंभों का गायब होना या उनके साथ छेड़छाड़ होना न केवल प्रशासनिक दृष्टि से बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर मामला है। इससे अतिक्रमण, अवैध आवाजाही और तस्करी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसी को देखते हुए सशस्त्र सीमा बल को क्षतिग्रस्त और गायब पिलरों की जांच कर उन्हें दोबारा स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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गायब पिलरों की पहचान कर उन्हें पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है – अधिकारी

अधिकारियों के अनुसार, गायब पिलरों की पहचान कर उन्हें पुनः स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके साथ ही सीमा के दोनों ओर नो मैन्स लैंड पर हो रहे अतिक्रमण को हटाने को लेकर भी भारत और नेपाल के अधिकारियों के बीच सहमति बनी है। यह कदम सीमा की स्पष्टता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के विवाद को रोकने के लिए जरूरी माना जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्वी चंपारण जिले में नेपाल से लगी लगभग 100 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पूरी तरह खुली है। ऐसे में सीमा स्तंभों की सही स्थिति और निगरानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

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सीमा से जुड़े सभी बिंदुओं पर लगातार सर्वेक्षण और निगरानी जारी है – प्रशासन

प्रशासन का कहना है कि सीमा से जुड़े सभी बिंदुओं पर लगातार सर्वेक्षण और निगरानी जारी है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते दूर किया जा सके। इस पूरे मामले ने एक बार फिर सीमा सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि एसएसबी और प्रशासन की कार्रवाई कितनी तेजी से जमीनी स्तर पर असर दिखाती है और गायब पिलरों को कब तक पूरी तरह बहाल किया जा सकेगा।

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सोहराब आलम की रिपोर्ट

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