रांची जेल में माओवादी नेता प्रशांत बोस की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस, पत्नी और परिजनों के दावे से प्रशासन की मुश्किल बढ़ी।
Prashant Bose Death Case रांची: प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रशांत बोस (82) की मौत के बाद उनका अंतिम संस्कार अब तक नहीं हो सका है। 3 अप्रैल को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में उनकी मौत हुई थी, जिसके बाद उनका शव रिम्स के मोर्चरी में रखा गया है। 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिला प्रशासन अंतिम संस्कार को लेकर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं ले पाया है।
Prashant Bose Death Case: पत्नी ने प्रशासन से की अंतिम संस्कार की मांग
जेल में बंद प्रशांत बोस की पत्नी और माओवादी नेता शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि उनके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है। ऐसे में प्रशासन ही उनके अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे।
इस पत्र के बाद प्रशासन पर अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी को लेकर दबाव बढ़ गया है।
Prashant Bose Death Case: परिजनों के दावे से बढ़ी उलझन
इसी बीच कुछ लोग प्रशांत बोस के बड़े भाई का पत्र लेकर रांची पहुंचे और शव पर दावा जताया है। इस स्थिति ने प्रशासन के सामने असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है कि शव किसे सौंपा जाए।
प्रशासन दोनों पक्षों के दावों की जांच कर रहा है और कानूनी प्रक्रिया के तहत निर्णय लेने की तैयारी में है।
Prashant Bose Death Case: NHRC गाइडलाइन के तहत कार्रवाई
प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गई है। मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट स्तर पर कराई जा सकती है।
एनएचआरसी के दिशा-निर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर किया जाना चाहिए। हालांकि, यदि परिजन दावा करते हैं तो शव को अधिकतम 72 घंटे तक मोर्चरी में रखा जा सकता है।
जिला प्रशासन ने कहा है कि प्राप्त पत्रों का परीक्षण किया जा रहा है और संबंधित पक्षों से मंतव्य लेकर जल्द निर्णय लिया जाएगा।
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