चास- चंदनकियारी रोड का गौरव थाती बनकर उभरेगा इजरी नदी तट पर नवनिर्मित भगवान परशुराम और संकटमोचन मंदिर

Jharkhand: जगत के पालनहार भगवान विष्णु के छठवें अंशावतार, ज्ञान और शस्त्र के महान ज्ञाता भगवान परशुराम की महिमा भारतीय संस्कृति के कण-कण में रची-बसी है। देश के विभिन्न हिस्सों में उनकी पूजा-अर्चना बड़े ही श्रद्धा भाव से होती आई है, जिसमें झारखंड के गुमला का ऐतिहासिक टांगीनाथ धाम, केरल के तिरुवल्लम में करमना नदी के तट पर स्थित परशुराम स्वामी मंदिर और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में माता रेणुका जी के सानिध्य में स्थित पावन धाम प्रमुख हैं। इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अब झारखंड के बोकारो जिले में चास-चंदनकियारी मार्ग पर इजरी नदी के पावन तट पर स्थित खामारबेंदी में भगवान परशुराम का एक भव्य और दिव्य मंदिर आकार ले चुका है, जो क्षेत्र के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मानचित्र पर एक नया कीर्तिमान स्थापित करने को तैयार है ।

15 डिसमिल के विस्तृत भूखंड में फैला है

श्री परशुराम सेवा समाज बाईसी के अटूट संकल्प और अथक प्रयासों से निर्मित यह मंदिर परिसर करीब 15 डिसमिल के विस्तृत भूखंड में फैला है। मंदिर की स्थापत्य कला की भव्यता देखते ही बनती है, जिसे महाराष्ट्र के नांदेड़ से आए कुशल कारीगरों ने बड़ी ही बारीकी से तराशा है। मंदिर के मुख्य तोरण द्वार से लेकर गर्भगृह की बनावट तक, हर कोना दिव्य आभा बिखेरता है। यहाँ भगवान परशुराम की प्रतिमा को महेंद्र गिरी पर्वत की नैसर्गिक सज्जा के बीच स्थापित किया जाना है, जो श्रद्धालुओं को त्रेतायुग के उस शांत और शक्तिशाली परिवेश की अनुभूति कराएगा जहाँ भगवान परशुराम ने तपस्या की थी। इस प्रांगण में केवल आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों का भी संगम होगा, क्योंकि यहाँ मंदिर के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान मंदिर और दो मंजिला केंद्रीय कार्यालय भवन का भी निर्माण किया गया है।

छह कमरों का मार्केट और विशाल हॉल शादी-विवाह आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा

यह परिसर भविष्य में सामाजिक रीति-रिवाजों और संस्कारों के संपादन हेतु एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा। कार्यालय भवन में निर्मित छह कमरों का मार्केट और विशाल हॉल शादी-विवाह, जनेऊ और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए आने वाले लोगों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करेगा।

चास-चंदनकियारी मुख्य मार्ग और इजरी नदी के किनारे स्थित होने के कारण इस स्थल की प्राकृतिक सुंदरता और सुगमता इसे एक दर्शनीय पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित करती है। कई वर्षों के परिश्रम के बाद अब यह मंदिर अपने जीवंत स्वरूप में खड़ा है, जो समाज की सामूहिक शक्ति और भक्ति का परिचायक है।

17 अप्रैल 2026 से 21 अप्रैल 2026 तक भव्य प्राण प्रतिष्ठा सह महायज्ञ अनुष्ठान का आयोजन सुनिश्चित किया गया है

इस पावन धाम के लोकार्पण हेतु आगामी 17 अप्रैल 2026 से 21 अप्रैल 2026 तक भव्य प्राण प्रतिष्ठा सह महायज्ञ अनुष्ठान का आयोजन सुनिश्चित किया गया है। इस धार्मिक उत्सव के दौरान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथावाचक प्राची देवी के प्रवचनों की अमृत वर्षा होगी, जो श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक शांति और ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करेगी। श्री परशुराम सेवा समाज बाईसी के सदस्य दिन-रात इस आयोजन को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बनाने में जुटे हुए हैं। यज्ञ मंडप, कथा स्थल, संत- महात्मा और यज्ञाचार्य का प्रवास स्थल निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। निश्चित रूप से आने वाले समय में खामारबेंदी का यह मंदिर क्षेत्र की पहचान बनेगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था, साहस और सामाजिक एकजुटता की प्रेरणा स्थली सिद्ध होगा। निर्माण कार्य में जुटे हर हाथ और संकल्पित हृदय को समाज का सादर नमन है। आप सभी के दिलेरी और जज्बे को हमारा बारंबार सलाम ।

 

 

 

 

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