रांची. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रांची में झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीजेयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने भारतीय संस्कृति, विशेषकर आदिवासी समाज की संस्कृति के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय की सराहना की। उन्होंने छात्रों को यह भी सलाह दी कि वे हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि उनके काम से पिछड़े या वंचित वर्ग के लोगों को फायदा होगा या नहीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संबोधन
इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्टूडेंट्स को संबोधित करते हुए कहा कि मैं यहां उपस्थित सभी लोगों से यह कहना चाहती हूं कि जनजातीय लोग भी अब विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं। हम सब जानते हैं कि जनजातीय लोगों के पास पारंपरिक ज्ञान का भंडार है। उनकी जीवन शैली में अनेक ऐसी परम्पराएं हैं, जो अन्य लोगों और समुदायों के जीवन को भी बेहतर बना सकती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आप आज प्रतिज्ञा लें कि आप जिस क्षेत्र में कार्यरत होंगे, वहां एक समृद्ध एवं विकसित भारत के निर्माण के लिए कार्य करेंगे, एक ऐसे समाज के निर्माण के लिए कार्य करेंगे, जहां समरसता हो और जहां प्रत्येक व्यक्ति का जीवन गरिमापूर्ण हो। आपको हमेशा यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि आपके कार्य से पिछड़े या वंचित वर्ग के व्यक्ति लाभान्वित होंगे या नहीं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सीयूजे के दीक्षांत समारोह में
उन्होंने कहा कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली बेटियों को मैं विशेष रूप से शुभाशीष देती हूं। प्रत्येक बाधा एवं अवरोध को पार करके आपके द्वारा प्राप्त की गई सफलता, हमारे समाज के लिए तथा सुनहरे भविष्य का सपना संजोने वाली हर बेटी के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
उन्होंने कहा कि झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय के कैंपस के पास से ही स्वर्णरेखा नदी बहती है। और ऐसा कहा जाता है कि स्वर्णरेखा नदी के जल-सेवन मात्र से ही मनुष्य को ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। ऐसी भूमि और नदी के सान्निध्य में शिक्षा प्राप्त करना आपके लिए सौभाग्य की बात है।
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