नन्हें जांबाज के कारनामें की राष्ट्रपति भी हुई कायल,ऑपरेशन सिंदूर में सेना के जवानों संग थामा था मोर्चा

 नन्हें जांबाज के कारनामें की राष्ट्रपति भी हुई कायल,ऑपरेशन सिंदूर में सेना के जवानों संग थामा था मोर्चा

22 Scope News Desk : ऑपरेशन सिंदूर का नाम आते है मन में सेना के जवानों की शौर्य और बलिदान की याद बरबस ही आ जाती है। ऐसे में अपने जज्बे और साहस से सुर्खियों में रहे नन्हे जवान श्रवण सिंह को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति महोदया ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार से सम्मानित किया।

सेना के जवानों की की थी निस्वार्थ सेवा

दरअसल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सीमा पर सीमा पर तैनात सैनिकों को भीषण गर्मी में दूध, लस्सी और पानी पहुंचाकर उनकी निस्वार्थ सेवा की थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किये कार्य के कारण यह नन्हा योद्धा आज मिशाल बन गया है।अपनी छोटी सी उम्र में उसने वह कर दिखाया जो बड़ों के लिए भी कठिन है। मई की तेज गर्मी और सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच श्रवण का हौसला कभी डगमगाया नहीं और वह अनवरत जवानों की सेवा में लगा रहा।

सम्मान मिलने पर बोला नन्हा जवान श्रवण सिंह

पुरस्कार मिलने के बाद श्रवण ने बड़े ही मासूम और गर्व भरे अँदाज में अपना अनुभव साझा करते हुये कहा कि ‘मैं फिरोजपुर से हूं। जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ तो हमारे गांव में फौजी आए थे। वे देश की रक्षा करने के लिए आए थे इसलिये मैंने सोचा चलो उनकी मदद करते हैं। मैं उनके लिए दूध, चाय, लस्सी, बर्फ लेकर जाता था। मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि मुझे अवॉर्ड मिल रहा है। मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मुझे यह सम्मान मिलेगा।

पुत्र के इस कारनामें से पिता गदगद, सेना ने धोषित किया था छोटा नागरिक योद्धा

अपने पुत्र के इस कारनामे से श्रवण सिंह के पिता भी काफी गदगद हैं और बेटे की बहादुरी पर गर्व है। सेना ने उसे सबसे छोटा नागरिक योद्धा घोषित कर सम्मानित किया था। जवानों के प्रति उसके लगाव को देखते हुए सेना ने उसकी शिक्षा का खर्च उठाया है ताकि सीमा का यह रक्षक भविष्य में अपनी पढ़ाई बिना किसी बाधा के पूरी कर सके।

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