Private Photos : झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला को लेकर पत्नी की निजता भंग करना तलाक का वैध आधार

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा पत्नी के मोबाइल से निजी फोटो निकालना और वायरल करने की धमकी देना मानसिक क्रूरता है और इससे तलाक मिल सकता है।


Private Photos  रांची: रांची में Jharkhand High Court ने वैवाहिक कानून से जुड़े एक अहम मामले में महिलाओं की निजता और सम्मान को लेकर कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पत्नी के मोबाइल फोन से उसकी निजी तस्वीरें बिना अनुमति निकालना और उन्हें सार्वजनिक करने या वायरल करने की धमकी देना गंभीर मानसिक क्रूरता है। इसे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत तलाक का वैध आधार माना जाएगा।

यह फैसला जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने एक अपील याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने कहा कि क्रूरता केवल शारीरिक हिंसा तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी महिला की निजता में हस्तक्षेप करना, उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और उसे बदनाम करने की धमकी देना भी मानसिक हिंसा की श्रेणी में आता है।


Key Highlights

झारखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की निजता भंग करने को मानसिक क्रूरता माना।

निजी फोटो निकालना और वायरल करने की धमकी को तलाक का वैध आधार बताया गया।

कोर्ट ने कहा क्रूरता केवल शारीरिक नहीं, मानसिक और सामाजिक भी होती है।

पति की दलील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।

पत्नी की अपील स्वीकार कर उसे न्याय दिलाया गया।


Private Photos :  पति के कृत्य को कोर्ट ने बताया वैवाहिक मूल्यों के खिलाफ

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पति द्वारा पत्नी की निजी तस्वीरों का इस तरह उपयोग करना कि वह उसे डराए, धमकाए या बदनाम करे, वैवाहिक रिश्ते की बुनियादी भावना के खिलाफ है। ऐसे कृत्य से पत्नी को गहरी मानसिक पीड़ा होती है और उसका आत्मसम्मान भी आहत होता है, जिसे कानून किसी भी हाल में स्वीकार नहीं कर सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि डिजिटल युग में निजी तस्वीरें और डाटा किसी व्यक्ति की गरिमा से जुड़े होते हैं और उनका दुरुपयोग सीधे तौर पर उसकी स्वतंत्रता और सम्मान पर हमला है।

Private Photos : पत्नी की अपील को कोर्ट ने किया स्वीकार

मामले में पत्नी की ओर से अदालत को बताया गया कि उसका विवाह 13 मार्च 2020 को धनबाद के झरिया में हिंदू रीति रिवाज से हुआ था। शादी के बाद पति ने उसके मोबाइल से निजी तस्वीरें निकाल लीं और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। इससे उसकी छवि परिवार और समाज के सामने खराब करने की कोशिश भी की गई।

Jharkhand High Court ने इन तथ्यों को गंभीर मानते हुए पत्नी की अपील को स्वीकार कर लिया और पति के कृत्य को मानसिक क्रूरता करार दिया।

Private Photos : पति की दलील को हाईकोर्ट ने खारिज किया

पति ने कोर्ट में दावा किया कि पत्नी देर रात किसी अन्य व्यक्ति से बातचीत करती थी और उसी दौरान उसे ये तस्वीरें मिली थीं। हालांकि खंडपीठ ने इस दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी परिस्थिति में पत्नी की निजी तस्वीरों को उसके खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल करना कानूनन और नैतिक रूप से गलत है।

कोर्ट ने साफ किया कि वैवाहिक विवादों में डिजिटल सामग्री का इस तरह दुरुपयोग करना महिला की गरिमा और निजता पर सीधा हमला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

 

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