अपनी कुव्यवस्था पर रोता पिंडदान का प्रथम द्वार पुनपुन घाट

Aurangabad-पूर्वजों को प्रथम पिंडदान- पुनपुन नदी में पिंडदान का एक अलग ही महत्व है. पितृ पक्ष के अवसर पर अपने पूर्वजों को प्रथम पिंडदान पुनपुन नदी घाट पर ही किये जाने की प्रथा है.

पुनपुन नदी में पिंडदान की अपनी महत्ता है

यह मान्यता सदियों से चली आ रही है. यही कारण है कि पुनपुन में पितरों का पिंडदान करने के लिए देश विदेश से पिंडदानी जुटते हैं.

इस संबंध में पंडा सुरेश पाठक बतलाते हैं कि मान्यताओं के अनुसार

पुनपुन नदी के घाट पर ही भगवान श्री राम ने माता जानकी के साथ

अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पहला पिंड का तर्पण किया था,

इसलिए इसे पिंडदान का प्रथम द्वार कहा जाता है.

इसके बाद ही गया के फल्गु नदी के तट पर पूरी विधि विधान से तर्पण किया गया था.

प्राचीन काल से ही पिंडदान तर्पण करने के लिए गया

आज भी है 52 वेदी पर पिंडदान करने की परंपरा

52 वेदी पर पिंडदान का तर्पण करने की परंपरा आज भी है.

गौरतलब हो कि साल भर में 3 बार पिंडदान किया जाता है.

लेकिन यह आसीन माह वाला पिंड दान का विशेष महत्व होता है.

पितरों के मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान किया जाता है.

पिंडदान एक भाव संप्रेषण प्रक्रिया है. मातृ कुल एवं पितृ कुल दोनों का पिंडदान होता है

और हम अपने पितरों को यहां पर याद करते हैं

और उनके नाम से पिंडदान करते हैं. पिंडदान में तीन चीजों की आवश्यकता महत्वपूर्ण है.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से पिंडदान करने आए सुरेंद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि

पिंडदान व्यक्ति के जीवन में एक उत्सव समान है.

जिसमें पुत्र को पिता एवं पूर्वजों की पिंड दान करनी चाहिए.

पुनपुन के बाद होता है फल्गु में पिंडदान

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जिसमें तीन चीजें आवश्यक है, पहला- माता पिता की आज्ञा मानना,

 दूसरा- पूर्वजों के स्वर्गवास होने पर अधिक से अधिक लोगों को भोजन कराना और तीसरा- पुनपुन एवं फल्गु नदी में उनका पिंडदान कराना.

इन्हीं तीनों कार्यों से पुत्र पितृ ऋण, ऋषियों के ऋण से एवं देवों के ऋण से मुक्त हो सकता है.

इससे दीर्घायु संतान विधि एवं मुफ्त का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

श्रद्धालुओं ने कहा कि मरणोपरांत पूर्वजों के उद्धार के लिए हम लोग यहां पुनपुन नदी में पहला पिंडदान करने आए हैं.

इसके बाद गया स्थित फल्गु नदी में जाकर पिंड दान करेंगे.

मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण पिंडदानियों को होती है परेशानी

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दूर दराज से आये हुए श्रद्धालुओं के लिए उचित व्यवस्था कराया जाएपूरे भारतवर्ष एवं देश विदेश से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि यह मूलभूत सुविधाएं नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलना पड़ रहा है. ऐसे में सरकार व जिला प्रशासन को यथोचित आवश्यक सुविधाओं का व्यवस्था करानी चाहिए. जिससे दूर दराज से आए हुए श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो.

रिपोर्ट- दीनानाथ

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