छत्तीसगढ़ की सरकार करवाती है झारखंड के ग्रामीणों को एम्बुलेंस मुहैया

Gumla– झारखंड में विकास के तमाम दावों के बावजूद जमीनी सच्चाई यह है कि विलुप्त प्राय आदिम जनजाति कोरबा की एक बड़ी आबादी रोड कनेक्टीविटी के अभाव में अपना इलाज छत्तीसगढ़ में करवाने को विवश है.

डुमरी प्रखंड के मिरचाईपाट के ग्रामीणों को किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में झारखंड सरकार स्वास्थ्य सेवा देने में असमर्थ है. तर्क यह है कि उस गांव तक झारखंड सरकार के द्वारा संचालित एम्बुलेंस नहीं जा सकती, स्वास्थ्य महकमा इसकी वजह झारखंड की खराब सड़क को बताती है.

यही कारण है कि इस पंचायत के लोग किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में अपना इलाज के लिए छत्तीसगढ़ सरकार से गुहार लगाती है. यह तो छत्तीसगढ़ सरकार की दरियादिली है कि किसी प्रकार अपने संसाधनों से इन गांव वालों का इलाज करवाया जाता रहा है.  यह हालत तब है जब देश आजादी का 75वां अमृत महोत्सव मना रहा है,

 छत्तीसगढ़ सरकार के हेल्पलाइन पर गुहार लगाते हैं ग्रामीण 

छत्तीसगढ़ के एम्बुलेंस से जाते हुए मरीज
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कुछ ही दिन पहले की बात है, मिरचाईपाट निवासी फुलमनी नामक युवती को प्रसव पीड़ा हुई, परिजनों ने एंबुलेंस के लिए झारखंड हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने सड़क नहीं होने का हवाला देकर आने से इनकार कर दिया. इसके बाद परिजनों ने छत्तीसगढ़ सरकार के हेल्पलाइन नंबर पर कॉल लगाया, जिसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से गांव में एंबुलेंस भेजा गया. पीड़िता का जशुपर में सकुशल प्रसव करवा कर वापस घर भी भेजा गया.

यह घटना महज एक बानगी है, झारखंड सरकार पर सौतेला व्यवहार का आरोप

यह पहली घटना नहीं है. इस स्थिति का सामना यहां के ग्रामीणों को बार-बार करना पड़ता है. ग्रामीण झारखंड सरकार पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप लगा रहे हैं. ग्रामीणों की पीड़ा इस बात को लेकर है कि जब देश में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तो ऐसे दुर्गम स्थल में बगैर किसी मूलभूत सुविधा घूंट-घूंट कर मरने के लिए छोड़ दिया गया है.

गुमला डीसी सुशांत गौरव ने दिया सड़क निर्माण का आश्वासन

गुमला के डीसी सुशांत गौरव ने कहा कि वाकई यह एक दर्दनाक तथ्य है, हमारी कोशिश इस इलाके में सड़क निर्माण कर इस कमी को दूर करने की है.

सिविल सर्जन राजू कच्छप ने दिया खराब सड़क का हवाला

इस मामले में सिविल सर्जन राजू कच्छप का कहना है कि यह अत्यंत ही दुर्गम और पहाड़ी इलाका है. यहां स्वास्थ्यकर्मियों को भेजना संभव नहीं है. यदि पथ निर्माण विभाग इस मामले का समाधान कर देती है तो स्वास्थ्य कर्मियों को भेजा जा सकता है.

रिपोर्ट- रणधीर 

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