सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका की खारिज, 22 दिसंबर 2000 को लाल किला पर हुआ था हमला
नई दिल्ली : लाल किला हमले के दोषी मोहम्मद आरिफ उर्फ अशफाक की
फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखी है. कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी.
लश्कर ए तैयबा आतंकवादी और पाकिस्तानी नागरिक आरिफ को 2011 में
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजा दी थी. इस हमले में 3 लोगों की मौत हुई थी.
इनमें एक संतरी था और 2 राजपूताना राइफल्स के जवान थे.
22 दिसंबर 2000 को लाल किला पर हमला हुआ था.
चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित (CJI UU Lalit) और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि उसने ‘इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड’ पर विचार करने के आवेदन को स्वीकार किया है. पीठ ने कहा, हम उस आवेदन को स्वीकार करते हैं कि ‘इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड’ पर विचार किया जाना चाहिए. वह दोषी साबित हुआ है. हम इस अदालत के फैसले को बरकरार रखते हैं और पुनर्विचार याचिका खारिज करते हैं.
2013 में भी पुनर्विचार याचिका हुई थी खारिज
गौरतलब है कि 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने आरिफ की क्यूरेटिव याचिका भी खारिज कर दी थी. उसके बाद अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने दोषी की सजा को लेकर दायर की गई रिव्यू पिटीशन को भी खारिज कर दिया है.
साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में याकूब मेमन और आरिफ की याचिका पर ही ऐतिहासिक फैसला दिया था कि फांसी की सज़ा पाए दोषियों की पुनर्विचार याचिका ओपन कोर्ट में सुनी जानी चाहिए. इससे पहले पुनर्विचार याचिका की सुनवाई न्यायाधीश अपने चैम्बर में करते थे. जानकारों के मुताबिक, यह पहला मामला था, जिसमें फांसी की सज़ा पाए किसी दोषी की पुनर्विचार याचिका और क्यूरेटिव याचिका खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर दोबारा सुनवाई की.

















