रांची: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) में सुधार के लिए इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अगुआई में गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों के आधार पर आने वाली परीक्षाओं में कई बड़े बदलाव हो सकते हैं। यदि ये सिफारिशें स्वीकार की जाती हैं, तो नीट-यूजी जैसे महत्वपूर्ण परीक्षाओं में छात्रों को मिलने वाले अवसरों में बदलाव हो सकता है।
समिति ने प्रस्तावित किया है कि नीट-यूजी परीक्षा में छात्रों को अब अधिकतम चार मौके दिए जाएं, जैसे कि जेईई-मेन परीक्षा के लिए होते हैं। इसके तहत छात्रों को एक निश्चित संख्या में परीक्षा देने के अवसर मिलेंगे, जो अब तक अनगिनत थे। यह बदलाव छात्रों की भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया जा सकता है, जिससे हर वर्ष लाखों छात्रों के परीक्षा में बैठने की संख्या घटेगी।
इस समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 22 जून, 2024 को हुआ था, जब नीट-यूजी में गड़बड़ी की शिकायतें आई थीं। समिति ने एनटीए के संचालन में सुधार, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार के लिए कई सिफारिशें की हैं। इसके साथ ही, आउटसोर्सिंग पर भी सख्ती लगाने की बात की गई है।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि केंद्रीय विद्यालयों और नवोदय विद्यालयों को स्थायी परीक्षा केंद्र के रूप में विकसित किया जाए, जिससे परीक्षा केंद्रों की संख्या में वृद्धि हो और छात्रों को अधिक सुविधाएं मिल सकें। इसके अतिरिक्त, हाइब्रिड मोड में परीक्षा आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है, जिससे परीक्षा प्रक्रिया को और सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके।
समिति की सिफारिशों के आधार पर यदि सुधार लागू होते हैं, तो नीट-यूजी और अन्य परीक्षाओं में छात्रों को मिलने वाले अवसरों की संख्या सीमित हो सकती है, और परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा में भी सुधार होगा।


















