RG Kar Case : अब CBI ने सुर्खियों में रहे डॉ. विरूपाक्ष को किया तलब, 42 दिन बाद काम पर लौटे जूनियर डॉक्टर

डिजीटल डेस्क : RG Kar Caseअब CBI ने सुर्खियों में रहे डॉ. विरूपाक्ष को किया तलब, 42 दिन बाद काम पर लौटे जूनियर डॉक्टर। कोलकाता के RG Kar मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बीते 9 अगस्त को मेडिकल छात्रा के रेप और मर्डर केस में अब CBI ने शनिवार को एक नए आरोपी को तलब किया है। साल्टलेक स्थित सीजीओ कांप्लेक्स में CBI के कार्यालय में तलब किए गए आरोपी चिकित्सक डॉ. विरूपाक्ष विश्वास पहुंच चुके हैं।

इस डॉक्टर का नाम घटना के बाद से प्रदर्शनकारियों के बीच सुर्खियों में रहा था लेकिन उस पर अभी तक जांच एजेंसी से ने सीधे हाथ नहीं डाला था। उस पर कॉलेज परिसर में अपनी दादागिरी के तांडव का आतंक मचा रखने का आरोप भी रहा है।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मिले आश्वासन के बाद कोलकाता के जूनियर डॉक्टरों ने शुक्रवार को हड़ताल खत्म करने की घोषणा की थी। शनिवार को 42 दिन बाद आज जूनियर डॉक्टर अपने काम पर लौट आए हैं। सभी अस्पताओं में उन्होंने काम शुरू कर दिया है।

9 अगस्त को ही डॉ. विरूपाक्ष समेत 2 का नाम सामने आया

बीते 9 अगस्त को RG Kar  अस्पताल में मेडिकल छात्रा का अस्तव्यस्त हाल में मिले शव के पास जूनियर डॉक्टरों ने रेप और मर्डर का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन शुरू किया। उसी समय प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टरों ने कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष के अलावा डॉ. विरूपाक्ष और अभिक डे का नाम लिया था और उन पर कार्रवाई की मांग की थी।

लेकिन डॉ. संदीप के अलावा अन्य 2 का घटनास्थल वाले कॉलेज से कोई सीधा संबंध न होने के चलते अपने शुरूआती जांच में CBI ने केवल डॉ. संदीप घोष पर ही फोकस किया। अब डॉ. संदीप घोष और तत्कालीन टाला थाना के प्रभारी छात्रा के रेप और मर्डर केस में CBI के रिमांड पर हैं।

विरूपाक्ष बर्दवान मेडिकल कॉलेज में बतौर चिकित्सक तैनात रहे हैं। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने इस बीच डॉ. विरूपाक्ष को निलंबित कर दिया है।

डॉ. विरूपाक्ष की फाइल फोटो
डॉ. विरूपाक्ष की फाइल फोटो

बर्दवान मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट के रूप तैनात रहे डॉ. विरूपाक्ष

CBI की ओर से तलब किए जाने के बाद सीजीओ कांप्लेक्स पहुंचे डॉ. विरूपाक्ष की कुंडली भी खुलकर सामने आने लगी है। डॉ. विरूपाक्ष के खिलाफ कॉलेज में दादागिरी करने के आरोप रहे हैं। RG Kar में हुई घटना के संबंध में भी बऊबाजार थाना में लिखित शिकायत दर्ज है। वह हावड़ा से आसनसोल रूट पर पड़ने वाले बर्दवान के मेडिकल कॉलेज के पैथालाजी विभाग में सीनियर रेजीडेंट के रूप में तैनात रहे थे।

RG Kar  की घटना सामने आने पर जब डॉ. विरूपाक्ष की दादागिरी का किस्सा वायरल होना शुरू हुआ तो सरकार ने उसका ट्रांसफर बर्दवान से काकद्वीप कर दिया। बर्दवान मेडिकल कॉलेज के कैंटीन संचालक ने बताया कि डॉ. विरूपाक्ष उनके कैंटीन पर सिगरेट, चाय आदि के मद में बकाया 23 हजार 800 रुपये भी चुकता नहीं किया।

यही नहीं, डॉ. विरूपाक्ष पर 4 साल पहले एमबीबीएस में दाखिल के लिए मुर्शिदाबाद निवासी एक छात्र और उसके परिवारवालों से दो बार में 8 लाख रुपये ऐंठने की भी शिकायत सामने आ चुकी है। उस मामले में पीड़ित परिवार ने डॉ. विरूपाक्ष के खिलाफ मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी थाना में शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन आरंभिक 6 माह में पुलिस ने कोई जांच नहीं की तो पीड़ित परिवार ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

शनिवार से पश्चिम बंगाल में इमरजेंसी सेवाओं पर लौटे जूनियर डॉक्टर
शनिवार से पश्चिम बंगाल में इमरजेंसी सेवाओं पर लौटे जूनियर डॉक्टर

काम पर लौटे जूनियर डॉक्टरों ने अभी केवल इमरजेंसी सेवाओं में जुटे, ओपीडी में नहीं

कोलकाता डॉक्टर रेप मर्डर केस में इंसाफ की मांग कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने शनिवार से काम करना शुरू कर दिया है। 42 दिन बाद आज वे अपने-अपने काम पर लौट आए हैं। खास बात यह कि इन डॉक्टरों ने सभी अस्पतालों के आवश्यक और इमरजेंसी सर्विस में काम करना शुरू कर दिया लेकिन वे ओपीडी में काम नहीं कर रहे हैं। इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि वे आंशिक रूप से काम पर लौटे हैं इसलिए वो ओपीडी में काम नहीं करेंगे। केवल आवश्यक और इमरजेंसी सेवाओं के लिए ही काम करेंगे।

डॉक्टरों का कहना है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आश्वासन दिया है कि उनकी हर मांग पूरी होगी और जब तक केस के आरोपी को सजा नहीं मिल जाती तब हड़ताल पूरी तरह से खत्म नहीं होगा। RG Kar मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 9 अगस्त को महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हैवानियत के खिलाफ जूनियर डॉक्टरों ने काम करना बंद कर दिया था। पीड़िता को इंसाफ दिलाने की मांग पर जूनियर डॉक्टरों का 41 दिनों से हड़ताल गत शुक्रवार तक जारी था।

जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि हमारी मांग पर कोलकाता पुलिस कमिश्नर, मेडिकल एजुकेशन के डायरेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर को हटाया गया है। राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम को हटाने और अस्पतालों में थ्रेट कल्चर खत्म करने की हमारी मांग अभी भी जारी है। स्वास्थ्य सचिव को हटाए जाने की अपनी मांगों को पूरा करने के लिए अगले 7 दिन तक इंतजार करेंगे, नहीं तो फिर से काम बंद कर देंगे।

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