झारखंड के 24 जिलों में 444 बालू घाटों की नीलामी हुई, लेकिन हाईकोर्ट की रोक के कारण एक भी घाट वैध रूप से चालू नहीं। दरें और स्थिति जानें।
Sand Mining Jharkhand रांची: झारखंड में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राज्य में तकनीकी रूप से एक भी बालू घाट वैध रूप से चालू नहीं है। राज्य के 24 जिलों में कुल 444 बालू घाटों की नीलामी के तहत 22 जिलों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि पलामू और गढ़वा में अब भी नीलामी जारी है। मुख्य कारण यह है कि झारखंड हाईकोर्ट ने पेसा को लेकर बालू घाटों और लघु खनिजों के आवंटन पर रोक लगा रखी है।
सरकार की ओर से पेसा नियमावली की अधिसूचना जारी कर दी गई है, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कोर्ट से लगी रोक हट सकती है। जिन जिलों में नीलामी हो चुकी है, वहां सफल बोलीदाताओं को लेटर ऑफ इंटेंट दे दिया गया है, लेकिन माइनिंग लीज की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। जब तक अदालत का स्पष्ट आदेश नहीं आता, तब तक लीज एग्रीमेंट संभव नहीं है।
Key Highlights
राज्य के 24 जिलों में 444 बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया
22 जिलों में नीलामी पूरी, पलामू और गढ़वा में जारी
हाईकोर्ट की रोक से एक भी बालू घाट वैध रूप से चालू नहीं
रोक हटने के बाद भी प्रक्रिया में लगेंगे करीब तीन महीने
वैध संचालन शुरू होने पर बालू की दरें कम होने की उम्मीद
Sand Mining Jharkhand:हाईकोर्ट की रोक और पेसा नियमावली का मामला
खान विभाग के अधिकारियों के अनुसार हाईकोर्ट ने बालू घाटों के आवंटन पर तब तक रोक लगाई है, जब तक पंचायती राज विभाग पेसा नियमावली को कैबिनेट के लिए नहीं भेज देता। अब जबकि पेसा नियमावली लागू हो चुकी है, ऐसे में अगली सुनवाई में राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि कोर्ट का आदेश आने के बाद भी माइनिंग लीज, पर्यावरण स्वीकृति, ग्रामसभा की अनुमति, सीटीओ और सीटीइ जैसी प्रक्रियाएं पूरी करने में कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है।
Sand Mining Jharkhand: रोक के बावजूद बाजार में बालू की उपलब्धता
हालांकि बालू घाटों का वैध संचालन शुरू नहीं हुआ है, लेकिन बाजार में बालू की उपलब्धता बनी हुई है। बालू कारोबारियों के अनुसार नीलामी के बाद भी बालू घाट चालू नहीं हुए हैं, फिर भी स्टॉकिस्ट के नाम पर चालान काटकर बालू की आपूर्ति की जा रही है। मौजूदा समय में बालू अधिकतर कालाबाजारी के जरिए ही उपलब्ध है, हालांकि पहले की तुलना में कीमतों में कुछ कमी आई है।
रांची बाजार में इस समय 100 सीएफटी यानी एक टर्बो बालू की कीमत लगभग 4000 से 6500 रुपये के बीच है, जबकि 700 सीएफटी के एक हाइवा बालू की दर करीब 25 हजार रुपये बताई जा रही है।
Sand Mining Jharkhand: प्रक्रिया पूरी होने पर घट सकती हैं बालू की दरें
बालू कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि जब नीलामी से प्राप्त बालू घाटों का वैध संचालन शुरू होगा, तब बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और मांग की तुलना में सप्लाई अधिक होने से दरों में स्वाभाविक रूप से गिरावट आएगी। यदि हाईकोर्ट 13 जनवरी को रोक हटा भी लेता है, तो सभी औपचारिकताएं पूरी होने में कम से कम तीन महीने का समय लगेगा। ऐसे में अप्रैल से ही बालू घाटों का वैध संचालन संभव हो सकेगा।
फिलहाल लगभग 100 बालू घाटों की प्रक्रिया पहले ही पूरी की जा चुकी है। यदि कोर्ट से इनके पक्ष में आदेश आता है, तो इन घाटों का संचालन सबसे पहले शुरू किया जा सकता है।
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