Purushottam Maas 2026: 17 मई से शुरू होगा पुरुषोत्तम मास, जानें पूजा, व्रत और धार्मिक महत्व

 17 मई से पुरुषोत्तम मास 2026 शुरू हो रहा है। जानें अधिक मास का धार्मिक महत्व, पूजा-व्रत की तिथियां और भगवान विष्णु से जुड़ी मान्यताएं।


Purushottam Maas 2026 : हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माने जाने वाला पुरुषोत्तम मास 17 मई से शुरू हो रहा है। इसे अधिक मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह विशेष मास 15 जून तक रहेगा और इस बार इसे अधिक ज्येष्ठ मास कहा जायेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूरे महीने भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य, व्रत और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व होता है।

Purushottam Maas 2026 :क्या होता है अधिक मास

हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष औसतन 354 दिनों का होता है, जो सौर वर्ष से लगभग 11 दिन कम होता है। इसी अंतर को संतुलित करने और पर्व-त्योहारों को सही समय पर रखने के लिए लगभग हर 32 महीने में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहा जाता है।

इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, सत्यनारायण कथा, विष्णु सहस्रनाम पाठ, श्रीमद्भागवत गीता का पाठ, दान-पुण्य और एकादशी व्रत का विशेष फल मिलता है।


Key Highlights

  • 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा पुरुषोत्तम मास

  • भगवान विष्णु की पूजा और दान-पुण्य का विशेष महत्व

  • 27 मई और 11 जून को पुरुषोत्तम एकादशी व्रत

  • 15 जून को सोमवती अमावस्या के साथ होगा समापन

  • अधिक मास को हर 32 महीने में जोड़ा जाता है


Purushottam Maas 2026: क्यों कहा जाता है पुरुषोत्तम मास

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार शुरुआत में अधिक मास को अशुभ माना जाता था, क्योंकि अन्य महीनों की तरह इसका कोई देवता नहीं था। पंडित कौशल कुमार मिश्र के अनुसार Skanda Purana और Padma Purana में वर्णन मिलता है कि यह महीना भगवान विष्णु के पास पहुंचा और उनसे संरक्षण की प्रार्थना की। भगवान विष्णु इसकी भक्ति से प्रसन्न हुए और इसे अपना नाम देते हुए पुरुषोत्तम मास कहा। तभी से यह महीना अत्यंत पुण्यदायी माना जाने लगा।

Purushottam Maas 2026: जानें प्रमुख व्रत और तिथियां

अधिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में किसी तिथि का क्षय नहीं होने के कारण यह पक्ष पूरे 15 दिनों का रहेगा। 18 मई को चंद्र दर्शन होगा, जबकि 20 मई को गणेश चतुर्थी व्रत रखा जायेगा। 26 मई को गंगा दशहरा मनाया जायेगा और इस दिन गंगा स्नान व दान का विशेष महत्व रहेगा। इस बार गंगा दशहरा दो बार मनाया जायेगा।

27 मई को पुरुषोत्तम एकादशी व्रत रखा जायेगा और 28 मई को प्रदोष व्रत होगा। अधिक ज्येष्ठ मास का कृष्ण पक्ष 1 जून से शुरू होगा, जिसका समापन 15 जून को होगा। 11 जून को पुरुषोत्तम एकादशी, 13 जून को महाशिवरात्रि व्रत और 15 जून को सोमवती अमावस्या मनायी जायेगी। इसी दिन पुरुषोत्तम मास का समापन होगा और इसके बाद मांगलिक कार्य फिर से शुरू हो जायेंगे।

16 जून से शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष प्रारंभ होगा, जिसका समापन 29 जून को पूर्णिमा के दिन होगा। इस दिन दक्षिण भारतीय महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत भी किया जायेगा।

Saffrn

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