
पटना : सदियों वर्ष पुरानी हस्तशिल्प, लोक कलाएं और कलाकृतियां अब अपने विलुप्तता से बाहर निकलकर सरस मेला के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हो रही हैं। हर उम्र, हर वर्ग और हर तबके के बीच हस्तशिल्प के प्रति दीवानगी सरस मेला में देखते ही बन रही है। आगंतुक स्टॉल पर अचानक पुरानी कलाकृतियों को देखकर अचंभित होते हैं फिर उसके बारे में जानकारी लेते हैं और फिर बिना मूल्य पूछे खरीद भी लेते हैं। क्योंकि सरस मेला में बिक रहे हस्तशिल्प और कलाकृतियों के साथ ही देशी खाद्य पदार्थ अमूल्य हैं।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने स्टॉल पर खुद के द्वारा उत्पादित उत्पादों का बिक्री कर ही रही हैं
मेला परिसर में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी ग्रामीण महिला उद्यमी अपने स्टॉल पर खुद के द्वारा उत्पादित उत्पादों का बिक्री कर ही रही हैं। वहीं इन्हीं महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादन कंपनियां भी हैं। जिन्होंने ग्रामीण शिल्प एवं हुनर को बड़ा व्यवसाय बनाकर महिला स्वावलंबन एवं महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश की है। जीविका दीदियों द्वारा संचालित शिल्पग्राम महिला उत्पादक कंपनी के स्टॉल पर खादी, सिल्क और हैंडलूम के परिधान एवं विभिन्न लोककलाओं के तहत निर्मित शिल्प और कलाकृतियां, मधुग्राम महिला उत्पादक कंपनी के स्टॉल पर कई प्रकार के फ्लेवर के मधु,किशनगंज में जीविका दीदियों द्वारा उत्पादित महानंदा चाय, जानकी सिलाई सह उत्पादक कंपनी लिमिटेड द्वारा निर्मित परिधान, तिरहुत जीविका महिला बैग उत्पादक कंपनी लिमिटेड के बैग, झोला, पर्स व सतत जीविकोपार्जन योजना के लाभार्थियों द्वारा निर्मित उत्पादों का खास क्रेज रहा और बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री हो रही है।

सरस मेला परिसर में आगंतुकों को कई तरह की सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं
सरस मेला परिसर में आगंतुकों को कई तरह की सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं। मसलन पालना घर में अपने बच्चों को छोड़कर दंपत्ति मेला का परिभ्रमण कर रहे हैं। सभी स्टॉल पर कैशलेश खरीददारी की उपलब्धता ने उनकी खरीददारी को आसान बनाया है। सरस मेला परिसर में एटीएम की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। रुपयों की जमा-निकासी के लिए जीविका दीदियों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र संचालित किए गए हैं। इससे क्रेता और विक्रेता दोनों को फायदा हो रहा। जीविका द्वारा वृद्धजनों एवं दिव्यांगों को मेला परिभ्रमण के लिए व्हील चेयर की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं। आगंतुकों की समस्यायों के समाधान के लिए सहायता केंद्र संचालित हैं।

सुव्यवस्थित सरस मेला 100 CCTV कैमरे की निगरानी में आयोजित किया जा रहा है
आपको बता दें कि सुव्यवस्थित सरस मेला सौ सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में आयोजित किया जा रहा है। आगंतुकों के लिए प्रवेश, निकास एवं आकस्मिक द्वार की चारो तरफ व्यवस्था की गई है। अग्निशामक दल और अग्निशामक वाहन भी सरस मेला परिसर में उपलब्ध हैं। स्वास्थ्य केंद्र भी स्थापित किया गया था जहां से स्टॉल धारकों एवं आगंतुकों को जरुरत के अनुसार, मेडिकल सुविधा एवं दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही है।

22 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 28 करोड़ रुपया से अधिक का है
सरस मेला में सहारनपुर के फर्नीचर, भदोही के कालीन और रग्स, जम्मू-कश्मीर के स्टॉल से गर्म कपड़े, शाल, सूट और जीविका दीदियों द्वारा उत्पादित अचार-पापड़ समेत देशी व्यंजन, अगरबत्ती, कई प्रकार के आटे, भागलपुर की खादी के कपड़े, सिल्क की साड़ियां, हैंडलूम व कश्मीर के ड्राई फ्रूट्स आदि की खूब बिक्री हुई है। 22 दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा 28 करोड़ रुपया से अधिक का है।

आज की शाम अरुण और उनकी टीम ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति के साथ ही रामायण की झांकी प्रस्तुत की
वहीं शनिवार की शाम अरुण और उनकी टीम ने लोक नृत्यों की प्रस्तुति के साथ ही रामायण की झांकी प्रस्तुत की। बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा पिछले 12 दिसंबर से गांधी मैदान में आयोजित किया जा रहा है। मेला का समापन चार जनवरी की शाम पांच बजे होगा। इस अवसर पर बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने आने की स्वीकृति प्रदान की है।
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