धनबाद: रामलला की जन्मभूमि अयोध्या धाम में बन रहे भव्य राम मंदिर में आगामी 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के साथ रामलला विराजमान होंगे। उसी दिन धनबाद की सरस्वती देवी का सपना साकार होगा और वह अपना 30 वर्ष पुराना मौन व्रत तोड़ेंगी।
1990 के दशक में जब देशभर में राममंदिर आंदोलन उफान पर था, उस वक्त धनबाद की रहने वाली सरस्वती देवी ने मंदिर निर्माण का सपना देखा।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की इच्छा को लेकर सरस्वती देवी ने मौन व्रत शुरू किया। 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के दिन ‘राम सीताराम’ शब्द के साथ इनका मौन व्रत टूटेगा।
अभी सरस्वती देवी का मौन व्रत टूटा नहीं है, इसलिए जब उनके घर न्यूज 22 स्कोप की टीम पहुंची, तो उन्होंने सिर्फ सांकेतिक रूप से अपनी खुशी का इजहार किया।
धनबाद के करमटांड़ निवासी 80 वर्षीय सरस्वती देवी ने मौन व्रत के दौरान ही चारों धाम की यात्रा की। उन्होंने अयोध्या, काशी, मथुरा, तिरुपति बालाजी, सोमनाथ मंदिर, बाबा बैद्यनाथधाम का भ्रमण किया।
प्रभु राम के चरणों में अपना जीवन समर्पित करने वाली सरस्वती देवी का अधिकर समय इन दिनों अयोध्या में ही बीतता है। वे बेहद खुश हैं और लिख कर बताती हैं, ‘मेरा जीवन हो गया, रामलला ने मुझे प्राण प्रतिष्ठा में बुलाया है। मेरी तपस्या, साधना सफल हुई। 30 साल बाद मेरा मौन व्रत ‘राम नाम’ के साथ टूटेगा।
सरस्वती देवी को भी श्रीराम मंदिर अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने का निमंत्रण मिला है। निमंत्रण मिलने से इनका पूरा परिवार खुश है।
आठ जनवरी को सरस्वती देवी को उनके भाई साथ लेकर अयोध्या जाएंगे। हालांकि परिवार के किसी अन्य सदस्य को समारोह में शामिल होने का निमंत्रण नहीं मिला है।
सुनिए जब उनकी पुत्र वधु सुधा देवी से बात हुई तो उन्होंने अपनी सास सरस्वती देवी की मौन व्रत के सम्बंध में क्या कुछ कहा।

















