Sheikh Hasina का बांग्लादेश को नहीं होगा प्रत्यर्पण, भारत का स्पष्ट संकेत

डिजिटल डेस्क: Sheikh Hasina का बांग्लादेश को नहीं होगा प्रत्यर्पण, भारत का स्पष्ट संकेत। बांग्लादेश में तख्तापलट के पलट के बाद भारत में शरण पाकर रह रहीं निवर्तमान पीएम Sheikh Hasina को लौटाने की जो बात वहां की अंतरिम सरकार ने भारत से कही है, उसका भारत की ओर से तत्काल कोई उत्तर नहीं दिया गया है।

इसी बीच अप्रत्यक्ष तौर पर भारत ने इसी के साथ स्पष्ट रूप से संकेत दे दिया है कि शरण में आकर रह रहीं Sheikh Hasina के लिए भारत हामी नहीं भरने वाला एवं बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध का कूटनीतिक जवाब दिया जाएगा।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को मिलेगा कूटनीतिक टका सा जवाब

बांग्लादेश की मौजूदा अंतरिम सरकार जिस तरह चरमपंथियों, कट्टरपंथियों और आतंकवादी समर्थित संगठनों के दबाव में या उनके मतानुसार  एक के बाद कदम उठा रही है, उसे देखकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही माना जा रहा है कि भारत बांग्लादेश के मनोनुकूल जवाब नहीं देने वाला।

भारत बांग्लादेश के अंतरिम सरकार की ओर Sheikh Hasina के प्रत्यर्पण के लिए जो अनुरोध किया गया है उसका जवाब अवश्य दिया जाएगा लेकिन कूटनीतिक लहजे में टका-सा वाले अंदाज में। बताया जा रहा है कि भारत की योजना बांग्लादेश की अंतरिम सरकार को नपे-तुले अंदाज में जवाब देने की है।

भारत अब मान कर चुका है कि कनाडा की तरह बांग्लादेश में अंतरिम सरकार के रहते द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने के सारे प्रयास किसी सकारात्मक नतीजे में नहीं बदलेंगे।

Sheikh Hasina की फाइल फोटो
Sheikh Hasina की फाइल फोटो

भारत के पास बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अर्जी को खारिज करने के लिए हैं तमाम वैध विकल्प…

बांग्लादेश में तख्ता पलट के करीब चार महीने बाद देश की अंतरिम सरकार की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को प्रत्यर्पित करने की मांग की है लेकिन वैश्विक स्तर पर माना जा रहा है कि प्रत्यर्पण संबंधी बांग्लादेशी अंतरिम सरकार के  आग्रह को भारत गंभीरता से नहीं लेने वाला। इसके पीछे तमाम वैध वजहों का होना बताया जा रहा है। इसके लिए भारत के पास तमाम वैध तथ्य एवं कारण भी हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच 2016 में हुई प्रत्यर्पण संधि में तय किए गए प्रावधानों में राजनीतिक कारणों से लगे आरोपों से जुड़े मामले में प्रत्यर्पण का आग्रह अस्वीकार करने का अधिकार है। इसीलिए  बांग्लादेश के Sheikh Hasina के प्रत्यर्पण के लिए राजनयिक नोट (नोट वर्बल) भेजने पर  पूर्व पीएम के प्रत्यर्पण का तो कोई सवाल ही नहीं उठने देने के पक्ष में भारत अपनी बात मजबूती से डंके की चोट पर रखने की स्थिति में है।

अंतरिम सरकार के इस नकारात्मक रुख से द्विपक्षीय संबंधों में आई कटुता और बढ़ेगी। इस अनुरोध के बाद यह साफ हो गया है कि द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की भारत की कोशिशों को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अपने खास मकसद की पूर्ति के लिए स्वीकार नहीं कर रही।

Sheikh Hasina की फाइल फोटो
Sheikh Hasina की फाइल फोटो

भारत के पास है बांग्लादेशी प्रत्यर्पण अनुरोध को ठुकराने का भी व्यापक आधार…

वैश्विक स्तर पर माना जा रहा है कि बांग्लादेश के मौजूदा अंतरिम सरकार के Sheikh Hasina को प्रत्यर्पित करने के लिए अनुरोध को ठुकराने के लिए भारत के पास व्यापक आधार हैं। दोनों देशों के बीच 2016 में हुई प्रत्यर्पण संधि का सवाल है तो भारत के पास इसमें शामिल किए गए कई प्रावधानों का सहारा लेकर बांग्लादेश के अनुरोध को ठुकराने का अधिकार है।

प्रत्यर्पण संधि में अनुरोध मिलने के बाद इसके अनुपालन के लिए कोई निश्चित समय सीमा का उल्लेख नहीं है। ऐसे में भारत अनुरोध का बिना जवाब दिए इस मामले को अनिश्चितकाल तक खींच सकता है।

बता दें कि वर्ष 2016 में दोनों देशों के बीच हुई प्रत्यर्पण संधि में कई प्रावधान हैं। इनमें से एक प्रावधान कहता है कि जिसके प्रत्यर्पण का अनुरोध किया गया है, उस पर लगे आरोप यदि न्यायिक प्रक्रिया के हित में और सद्भावना के तहत नहीं हैं तो अनुरोध खारिज हो सकता है। संधि के मुताबिक, प्रत्यर्पण से जुड़ा मसला सियासी मकसद से जुड़ा न हो।

Sheikh Hasina के खिलाफ ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध प्राधिकरण ने मानवता विरोधी अपराध व जनसंहार केस में वारंट दिया है। जिन हालात में उन्हें देश छोड़ना पड़ा है, उसका हवाला देते हुए भारत इसे सियासी मामला बताते हुए प्रत्यर्पण का अनुरोध खारिज कर सकता है।

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