रांची:चुनाव प्रचार के लिए क्षेत्रीय दलों को हेलीकॉप्टर नहीं मिल रहें है। झामुमो ने कहा कि 55 फीसदी एयरक्राफ्ट को भाजपा पे पहले ही आरक्षित करा लिया है।
झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी पार्टी दो हेलीकॉप्टर आरक्षित कराना चाहती है। एक डबल इंजन, सीएम के मूवमेंट के लिए और दूसरा स्टार प्रचारकों के लिए।
इसके लिए पार्टी ने विभिन्न एजेंसियों से बात भी की है। लेकिन किसी ने हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने पर सहमति नहीं दी है। भट्टाचार्य ने कहा कि चुनाव के दौरान हेलीकॉप्टर के किराए में भी लगभग 20-25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
जानकारी के अनुसार चुनाव के दौरान बड़ी और क्षेत्रीय पार्टियां सबसे अधिक हेलीकॉप्टर का उपयोग करती है। एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले चुनाव के मुकाबले 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान हेलीकॉप्टर की मांग में 40 फीसदी की वृद्धि हुई है। विशेष विमान और हेलीकॉप्टर का किराया प्रति घंटे के आधार पर तय होता है।
आम तौर पर साढ़े चार से 5.5 लाख रुपए प्रति घंटे की दर से इसका किराया अभी चलन में है। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार दिसंबर 2023 के अंत में देश में 112 गैर अनुसूचित संचालक थे।
ऐसे संचालक आवश्यकता पड़ने पर किसी को हेलीकॉप्टर या विशेष विमान उपलब्ध कराते हैं। लेकिन इनमें भी 40-50 फीसदी संचालक केवल एक विमान या हेलीकॉप्टर का संचालन करते हैं।
पूरे देश में अनुसूचित संचालकों के पास लगभग 450 विमान और हेलीकॉप्टर हैं। ऐसे संचालकों के विमान और हेलीकॉप्टरों में बैठने की क्षमता तीन से 37 यात्रियों की है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 250 करोड़ रुपए हेलीकॉप्टर और विमान पर खर्च किए थे।



















