नेमरा में दिशोम गुरु शिबू सोरेन का श्राद्ध कर्म, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने निभाई परंपराएं

रांची: झारखंड के महान नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) में रविवार को श्राद्ध कर्म का आयोजन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जा रहा है। 4 अगस्त को रांची में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हुआ था, जिसके बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई थी।

नेमरा, रामगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास पर अपने ग्रामीणों एवं परिजनों के साथ श्राद्ध - कर्म से संबंधित विचार - विमर्श करते मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन
नेमरा, रामगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास पर अपने ग्रामीणों एवं परिजनों के साथ श्राद्ध – कर्म से संबंधित विचार – विमर्श करते मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन

श्राद्ध कर्म के इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पूरे परिवार के साथ नेमरा पहुंचे। उनके साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। दोनों ने परंपरागत तरीके से विधि-विधान का पालन किया। गांव के बुजुर्गों और पंडितों की मौजूदगी में पूजन, पिंडदान और तर्पण जैसे कर्मकांड सम्पन्न किए जा रहे हैं।

इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेमरा, रामगढ़ स्थित अपने पैतृक आवास पर ग्रामीणों और परिजनों के साथ बैठकर श्राद्ध कर्म से संबंधित विचार-विमर्श भी किया। उन्होंने परिवार और गांव के बुजुर्गों से परंपरागत प्रक्रियाओं की जानकारी ली और सभी रस्मों को सही तरीके से संपन्न कराने के निर्देश दिए।

गांव का माहौल भावुक और श्रद्धा से भरा हुआ है। बड़ी संख्या में ग्रामीण, पार्टी कार्यकर्ता और दूर-दराज से आए लोग दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। सभी ने उन्हें जन-जन के नेता और आदिवासी अस्मिता के प्रतीक के रूप में याद किया।

श्राद्ध के दौरान झारखंड की पारंपरिक और आदिवासी रीति-रिवाजों का विशेष ध्यान रखा गया। कल्पना सोरेन भी पूरे समय इन परंपराओं में सक्रिय रूप से शामिल रहीं और ग्रामीण महिलाओं के साथ रीति के अनुरूप सभी कर्मकांड निभाए। यह अवसर केवल धार्मिक कर्मकांड का ही नहीं, बल्कि गुरुजी के योगदान और संघर्षों को याद करने का भी रहा।


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