Dhanbad: केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदले जाने के प्रस्ताव के विरोध में धनबाद जिला कांग्रेस कमेटी ने रणधीर वर्मा चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे, जिन्होंने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस फैसले को जनविरोधी करार दिया।
धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि मनरेगा सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों, मजदूरों और बेरोजगारों के लिए जीवनरेखा है। इस योजना ने करोड़ों लोगों को सम्मानजनक रोजगार और आजीविका का सहारा दिया है। ऐसे में इसका नाम बदलना दरअसल इसके मूल उद्देश्य और ऐतिहासिक पहचान को खत्म करने की कोशिश है।
मनरेगा को कमजोर करने का आरोप:
संतोष सिंह ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मनरेगा को धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा में राज्य सरकार का अंशदान केवल 10 प्रतिशत था, जिसे अब बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे राज्यों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है और इसका सीधा असर ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले रोजगार और मजदूरी पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण कई राज्यों में मनरेगा के तहत काम कम हो रहा है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मजदूरों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी योजना पर सवाल:
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर प्रधानमंत्री को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम से इतनी आपत्ति क्यों है। मनरेगा की शुरुआत गांधीजी के नाम पर इसलिए की गई थी ताकि ग्रामीण भारत को रोजगार, सम्मान और आत्मनिर्भरता मिल सके। लेकिन आज उसी योजना की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
संघर्ष जारी रखने की चेतावनी:
कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अगर मनरेगा का नाम बदलने का फैसला वापस नहीं लिया गया, तो पार्टी राज्य से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक आंदोलन तेज करेगी। धरना-प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि कांग्रेस हमेशा गरीबों, मजदूरों और किसानों के हक की लड़ाई लड़ती रहेगी।
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