SUSHIL MODI! बिहार की राजनीति के एक युग का हुआ अंत

मंजेश कुमारSUSHIL MODI

पटना: सुशील कुमार मोदी, नाम ही सुनते ही जेहन में आता है वह शख्स जिसने बिहार में भाजपा को न सिर्फ स्थापित किया बल्कि शिखर तक पहुंचाया। सुशील मोदी ने अपने छात्र जीवन में ही राजनीति को चुना और जे पी आंदोलन से एक बार राजनीति में कदम रख दी तो फिर आगे बढ़ते ही चले गए। उन्होंने अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत पटना विश्वविद्यालय से शुरू की और 1973 में पहली बार छात्रसंघ के महासचिव चुने गए थे।

वर्ष 1974 में जे पी आंदोलन में वे कूद पड़े और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इसके बाद वह सक्रिय राजनीति में आ गए और पहली बार वर्ष 1990 में पटना सेंट्रल (कुम्हरार) से विधानसभा के लिए चुने गए। 1995 में वे दुबारा विधानसभा सदस्य चुने गए और उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक बनाया गया। वर्ष 2000 में वे तीसरी बार विधायक चुने गए। वर्ष 2000 में नीतीश कुमार की अल्पकालिक सरकार में वे संसदीय कार्य मंत्री थे।

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व्यक्तिगत जीवन
05 जनवरी 1952 को पटना में जन्मे सुशील मोदी का विद्यालय जीवन पटना के सेंट माइकल स्कूल में बीता और फिर उन्होंने पटना के बीएन कॉलेज से बीएससी की। एमएससी के दौरान वे अपनी पढाई छोड़ कर जे पी आंदोलन में कूद पड़े और फिर वहां से राजनीति में आ गए। उन्होंने 1987 में जेसी जॉर्ज से प्रेम विवाह किया। इस दौरान उन्हें अपने परिवार के विरोध का भी सामना करना पड़ा था। उनके पिता एक कपडा व्यवसायी थे और परिवार के लोग चाहते थे कि वह अपना कारोबार संभालें लेकिन उन्होंने सेवा का रास्ता चुना और आरएसएस ज्वाइन कर लिया था। वहीं से कदम दर कदम चलते हुए उन्होंने इस मुकाम को हासिल किया।

बीमारी की जानकारी
लोकसभा चुनाव के हलचल के बीच अप्रैल 2024 में उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बीमारी की जानकारी दी और बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से बात कर उन्हें अपनी बीमारी के बारे में बता दिया है और वे इस बार चुनाव में सक्रिय नहीं रहेंगे। सुशील मोदी की बीमारी की बात सामने आने के बाद लोगों में हलचल मच गई थी लेकिन सब दुआ कर रहे थे कि सफल इलाज के बाद वे एक बार फिर सबके बीच आएंगे। लेकिन सोमवार की देर शाम खबर आई कि दिल्ली के एम्स में इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

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रहे नेता विपक्षी दल, और बने उप मुख्यमंत्री
सुशील कुमार मोदी वर्ष 1996 से 2004 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे। उन्होंने ही बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के विरुद्ध जनहित याचिका दायर की। वर्ष 2004 में वे भागलपुर लोकसभा क्षेत्र से चुने गए और वर्ष 2005 में एनडीए के सत्ता में आने के बाद फिर वे बिहार विधानमंडल दल के नेता चुने गए साथ ही बिहार के उप मुख्यमंत्री भी बने। वे 2005 से 2020 तक एनडीए की सरकार में लगातार उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री रहे। 2020 में सुशील मोदी राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए। 2017 से 2020 तक वे जीएसटी कॉउन्सिल के सदस्य भी रहे।

राजनीति के एक युग का हुआ अंत
सुशील मोदी के निधन की खबर मिलते ही देश की राजनीति महकमा में सन्नाटा पसर गया। उनके निधन की खबर ने हर किसी को झकझोड़ कर रख दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत तमाम दलों के नेताओं ने शोक संवेदना व्यक्त की।

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नीतीश लालू ने याद किया कॉलेज के दिनों की बात
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कॉलेज के दिनों की बात याद की और कहा कि छात्र जीवन से सुशील मोदी हमारे मित्र थे। उनका निधन न सिर्फ देश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि हमारा व्यक्तिगत क्षति है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने अपना सच्चा दोस्त खो दिया।

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SUSHIL MODI की निकली अंतिम यात्रा, बिहार विधानसभा लाया जायेगा पार्थिव शरीर

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