Aurangabad- मेढक की शादी में उमड़ा जनसैलाब- शादी विवाह का लग्न खत्म हो चुका है.
शहनाईयों की गुंज बंद हो चुकी है, लोग बाग खेती की तैयारियों में जुट गये हैं.
लेकिन इस बीच हसपुरा प्रखंड के अहियापुर और अल्प गांव में महिलाएं गीत गा रही है.
गाजे बाजे के साथ बारात पहुंची है. मांगलिक गीत गूंज रहे हैं.
दरअसल यह शादी किसी लड़का लड़की की नहीं होकर मेंढक और मेंढकी की है.
बारिश की आशा में आसमान की ओर नजरे टिकाएं किसान अब मेढ़क की शादी करवा कर बारिश होने का टोटका आजमा रहे हैं.
मेढक और मेंढकी की शादी देखने उमड़ा जनसैलाब
इस शादी की चर्चा आसपास के पूरे इलाके में हो रही है, महिलाएं, बच्चे मेढक राजा की इस शादी में शरीक होने के लिए दौड़े चले आ रहे हैं.
महिलाओं और बच्चों की इस भीड़ को देख कर इस बात का एहसास नहीं होती कि यह शादी किसी मेढक की हो रही है.
मेंढक की शादी कराने से वर्षा की मान्यता
मान्यता है कि बारिश नहीं होने की स्थिती में यदि मेढक और मेढकी की शादी करवा दी जाय तो सूखा आसमान बारिश से भर जाता है,
खेती की शुरुआत हो जाती है. यही कारण है कि सबसे पहले अहियापुर में शादी करवायी गयी,
उसके बाद अब अल्पा गांव में शादी हो रही है. बारातियों को खिलाने-पिलाने की शानदार व्यवस्था की गयी है.
मेंढ़क की इस शादी का वीडियो इंटरनेट पर खूब वायरल हो रहा है.
संयोग ने भीृ दिया साथ
मेढक की विदाई होने के साथ ही झमाझम बारिश होने लगी. किसानों के मुर्छाए चेहरे पर खुशी की लहर
दौड़ पड़ी और इस विश्वास को बल मिल गया कि यदि सूखा का सामना करना पड़े तो मेढ़क की शादी
कर झमाझम बारिश करवाया जा सकता है.
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