AURANGABAD: औरंगाबाद अंबा में बाघ मिलने की खबर निकली झूठी,
डीएफओ ने की अफवाह ना फैलाने की अपील
अंबा में पिछले दिनों ग्रामीणों की ओर से बाघ देखने की खबर
आग की तरह फैल गई. इससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया.
लेकिन बाद में यह खबर झूठी निकली.

वन अधिकारियों ने बाघ मिलने की खबर को झूठा बताया
और लोगों से अफवाह ना फैलाने की अपील की.
वन अधिकारी ने बताया कि जांच में पाया गया कि जो भी
फुटप्रिंट देखे गये वे लकड़बग्घा के थे ना कि किसी बाघ या तेंदुआ के. रेंजर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि लोगों की सूचना पर वन विभाग की टीम ने जांच की और बाघ मिलने की खबर को गलत पाया. उन्होंने लोगों से सतर्क रहने की अपील की. साथ ही उन्होंने कहा कि लोग डरे नहीं और अफवाह भी ना फैलाएं.
बाघ के फुटप्रिंट मिलने की खबर से डरे ग्रामीण
इधर बाघ देखे जाने की खबर आग की तरह फैल गई. ग्रामीणों के अनुसार बाघ बतरे नदी के सहारे अंबा पहुंचा. बाघ से बचने के लिए स्थानीय लोगों ने रात में पटाखा फोड़ा और मशाल जलाया, ताकि बाघ डर से गांव की तरफ रूख न करे. बाघ सबसे पहले सिमरा जाने वाली बतरे नदी पुल के नीचे दिखा. नेउरा गांव के विवेक पासवान बाघ को देखते ही चीख पड़ा और भागा. बाघ नेउरा, नेउरा बिगहा, लभरी खुर्द और फिर आखिरी बार परसावां गांव के पास दिखा. सबसे पहले परसावां गांव की एक महिला ने बाघ दिखने की पुष्टि की. उसने बताया कि झाड़ी के पीछे बाघ दिखा.
इलाके में रखी जा रही है नजर: वन विभाग
रेंजर मनोज कुमार सिंह ने बताया कि लकड़बग्घे के पंजे का निशान मिले हैं. इस पूरे इलाके पर नजर रखी जा रही है. आमलोगों से अपील की गई है कि वे खुद और अपने जानवर को सुरक्षित रखें. रात में घर के बाहर न सोयें और जानवर को भी न रखें. लकड़बग्घे के पकड़ने के लिए रेस्क्यू किया जाएगा. फिलहाल इलाके को चिह्नित किया जा रहा है.
रिपोर्ट: दीनानाथ मौआर
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