रांची: झारखंड में सियासी हलचल अपने चरम पर है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ बगावत कर दिल्ली पहुंचे चम्पाई सोरेन ने हाल ही में एक बड़ा बयान दिया है। चम्पाई ने स्पष्ट किया है कि उनका दिल्ली दौरा निजी काम के लिए है और इस दौरान उन्होंने किसी से कोई राजनीतिक बातचीत नहीं की है।
चम्पाई ने मीडिया को बताया, “हम तो दिल्ली निजी काम पर आए हैं। किसी से कोई बात नहीं हुई। यहां हमारा निजी काम है। हेमंत सोरेन या जेएमएम के शीर्ष नेतृत्व से कोई कॉल नहीं आई है। मैंने अपना रुख साफ कर दिया है। बीजेपी से बात नहीं की है और हेमंत सोरेन से कोई चर्चा भी नहीं हुई है। भविष्य में क्या करना है, इसके बारे में बाद में बताऊंगा।”
चम्पाई सोरेन के इस बगावती रवैये पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चम्पाई को “अवसरवादी” करार देते हुए कहा कि “जब भी इतिहास लिखा जायेगा, चम्पाई को विभीषण के तौर पर पहचाना जायेगा।”
झारखंड की राजनीति में आए इस उथल-पुथल के बीच, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चम्पाई सोरेन के अगले कदम क्या होंगे और इससे झारखंड की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा।


















