शेख हसीना : बांग्लादेशी पूर्व पीएम को भारत में असाइलम या रिफ्यूजी श्रेणी में मिलेगी शरण, मंथन और कयासों का दौर

डिजीटल डेस्क :  शेख हसीनाबांग्लादेशी पूर्व पीएम को भारत में असाइलम या रिफ्यूजी श्रेणी में मिलेगी शरण, मंथन और कयासों का दौर। बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के बाद सुरक्षित ठिकाने की तलाश में अपने देश से निकलने के बाद पूर्व पीएम शेख हसीना वाजेद सबसे महफूज स्थान भारत पहुंचीं। पश्चिम बंगाल पहुंचकर वहां भारतीय वायुसेना के फाइटर विमानों की निगरानी में उन्हें बांग्लादेशी विमान से झारखंड और बिहार वाले वायुमार्ग से होकर यूपी में दिल्ली सीमा के निकट गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस लाया गया। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ कूटनीतिक रिश्तों को अहमियत देते हुए पड़ोसी मुल्क में उपजे हालात पर अपने सभी प्रमुख सियासी दलों के साथ मिलकर निरंतर अहम फैसले लेते हुए पूरे प्रकरण में अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। इसी क्रम में तत्काल शेख हसीना को भारत में ही ठौर देने का फैसला हुआ है और भारत के सभी सियासी दल भी इसी के पक्ष में हैं।

भारत में ही रुकीं शेख हसीना को शरण देने के दर्जे पर जारी है मंथन

शेख हसीना बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद अपनी बहन के साथ भारत पहुंच चुकी हैं। उनकी योजना ब्रिटेन में शरण लेने की है लेकिन वहां से तत्काल हरी झंडी न मिलने की दशा में उन्हें भारत में ही रुकना पड़ेगा।। ऐसे में भारत सरकार में उच्च स्तरीय लेवल पर मंथन जारी है कि शेख हसीना को ब्रिटेन की ओर से मिलने वाले असाइलम सीकर या फिर रिफ्यूजी रूप में शरण दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि असाइलम सीकर और रिफ्यूजी दोनों ही ऐसे लोग होते हैं जो अपने मूल देशों में सताए जाने के कारण अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा की मांग करते हैं लेकिन दोनों की स्थिति के बीच कुछ अंतर होता है। रिफ्यूजी (शरणार्थी) वो व्यक्ति है जो अपने मूल देश से भाग हुआ है और अपनी जाति, धर्म, राष्ट्रीयता, किसी विशेष सामाजिक समूह की सदस्यता या राजनीतिक राय के कारण सताए जाने के डर के कारण वापस लौटने में असमर्थ या अनिच्छुक है। संयुक्त राष्ट्र 1951 कन्वेंशन और 1967 प्रोटोकॉल के अनुसार शरणार्थी के डर को साबित करने के लिए ठोस वजह होनी चाहिए। असाइलम (शरण) उस विदेशी मूल के व्यक्ति को दिया जाता है,जो रिफ्यूजी यानी शरणार्थी की अंतरराष्ट्रीय कानून की परिभाषा को पूरा करता है। आसान भाषा में समझें तो असाइलम सीकर का स्टेटस शरण पाने की पहली स्टेज पर दिया जाता है। जब देश सुनिश्चित हो जाता है कि विदेशी मूल का व्यक्ति असल में ह्यरिफ्यूजीह्ण है तो उसे असाइलम दिया जाता है।

शेख हसीना के लिए पढ़े जा रहे ब्रिटेन के नियम….

विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी देश में असाइलम पाने के लिए कुछ मापदंड़ों को पूरा करना होता है। ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम में शरण लेने के लिए यूके गृह कार्यालय को आवेदन करना होता है। यह विभाग ही शरण देने या खारिज करने का अंतिम फैसला करता है। जब कोई ब्रिटेन में असाइलम के लिए आवेदन करता है तो पहले एक इमिग्रेशन ऑफिसर के साथ उसकी बैठक होगी (जिसे स्क्रीनिंगह कहा जाता है). स्क्रीनिंग के बाद गृह कार्यालय निर्णय लेगा कि आपके दावे पर यूनाइटेड किंगडम में विचार किया जा सकता है या नहीं. यदि ऐसा हो सकता है, तो एक केसवर्कर के साथ एक असाइलम इंटरव्यू होगा. केसवर्कर आवेदन के बारे में निर्णय लेते हैं. इसके अलावा यह अधिकारी शरण प्रक्रिया की जानकारी देता है और बताता है कि फैसला आने तक असाइलम सीकर को क्या करना है। ऐसे में अब शेख हसीना को मंगलवार शाम तक ब्रिटेन असाइलम मिलने की उम्मीद है। असाइलम मिलने के बाद ही तय होगा कि वो कब जाएंगी और कैसी जाएंगी।

असाइलम मिलने पर 5 साल ब्रिटेन रह पाएंगी शेख हसीना

जानकारों के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति यूके में असाइलम पाने में सफल होता है, तो उसे आधिकारिक शरणार्थी का दर्जा दिया जाता है। शरणार्थी स्थिति में उन्हें यूके में कम से कम 5 सालों तक रहने की अनुमति होती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत उन्हें सुरक्षा दी जाती है। यूके में असाइलम पाने वालों को रिफाउलमेंट से सुरक्षा का अधिकार मिलता है यानी कि उन्हें ऐसे देश में लौटने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है जहां उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा स्वास्थ्य देखभाल और शिक्षा सेवाओं का भी अधिकार होता है।

शेख हसीना और उनके विमान को भारतीय सेना ने दी पूरी सुरक्षा और किया पूरा सम्मान

बता दें कि मंगलवार को शेख हसीना के विमान को हिंडन एयरपोर्ट पर भारतीय वायुसेना के सी-17 और सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान हैंगर के पास पार्क किया गया।  शेख हसीना बांग्लादेश वायुसेना के एक परिवहन विमान सी-130जे हरक्यूलिस से यात्रा कर रही हैं।  शेख हसीना को लेकर भारत आ रहे बांग्लादेशी सी-130 को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पश्चिम बंगाल की हाशिमारा स्क्वाड्रन से दो राफेल विमानों को उड़ाया गया।  सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी जरूरत पड़ने पर किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार थे क्योंकि मोदी सरकार की ओर से  भारतीय सेना को जरूरत पड़ने पर किसी भी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया था।  बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने के बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियां किसी भी आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार हो गईं। बताया जा रहा है कि जिस समय वह वायु सेना के जेट में सुरक्षा के लिए भारत आ रही थीं, उस दौरान हसीना के विमान की सुरक्षा के लिए प. बंगाल के हाशिमारा हवाई अड्डे से दो राफेल लड़ाकू विमानों को हवा में तैनात कर दिया गया।

फाइल फोटो
फाइल फोटो

बिहार और झारखंड के ऊपर राफेल की सुरक्षा में हिंडन पहुंचीं थी शेख हसीना, वायुसेना प्रमुख रखे हुए थे नजर

बांग्लादेश छोड़ने के बाद भारतीय सीमा में दाखिल हुईं पूर्व पीएम शेख हसीना को पूरे सम्मान के साथ भारतीय सेना की ओर से सुरक्षा निगरानी मुहैया कराई गई। इसी क्रम में जब पश्चिम बंगाल से शेख हसीना का विमान हिंडन के लिए उड़ा तो भारतीय वायुसेना के दो राफेल विमानों ने उसे अपने सुरक्षा घेरे में लिया। उसके बाद तीनों विमान बिहार और झारखंड के ऊपर उड़ान भरते हुए आगे को बढ़े। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के रडार भी बांग्लादेश के ऊपर हवाई क्षेत्र की निगरानी में तैनात कर दिए गए थे। बताया जा रहा है कि इस दौरान जमीन पर मौजूद एजेंसियां और शीर्ष भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था और कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी और सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी स्थिति पर करीब से नजर रख रहे थे। इस दौरान जनरल द्विवेदी और इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल जॉनसन फिलिप मैथ्यू की भागीदारी के साथ शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की एक बैठक भी आयोजित की गई थी।

सुरक्षा मुहैया कराने को हिंडन पर उतारी गईं शेख हसीना..

हिंडन देश के बड़े एयरबेस में शामिल है। यहां लड़ाकू विमान तैनात हैं। माना जा रहा है कि यहां की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था की वजह से ही शेख हसीना को यहां लाया गया। दूसरी वजह दिल्ली में एयर ट्रैफिक का व्यस्त होना भी है। तीसरी वजह हिंडन का दिल्ली के नजदीक होना भी है। अगर शेख हसीना को दिल्ली जाना हो तो ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। यहां कई राष्ट्रध्यक्ष आ चुके हैं। शेख हसीना पहली बार आई हैं। वह भी प्रधानमंत्री पद छोड़ने के बाद।

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