Thinking of Damage in UP : टिकट वितरण में तानाशाही ने कराई फजीहत, सीएम योगी की आपत्तियों को भी किया था दरकिनार

डिजीटल डेस्क : Thinking of Damage in UP टिकट वितरण में तानाशाही ने यूपी में कराई फजीहत या कुछ और, इस पर भाजपा के रणनीतिकारों में गंभीर मंथन जारी है। इस मंथन में आरएसएस के साथ वे भी शामिल हैं जिनकी बातों को टिकट वितरण के दौरान तवज्जो नहीं दिया गया और पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। अब यही लोग संगठन में सधे अंदाज में अपनी दो टूक राय रखने में नहीं हिचक रहे कि चूक टिकट वितरण की कमान संभालने वाले रणनीतिकारों के उस अहंकारी भाव की रही जिसमें उन्होंने उस समय राय देने वालों को यह कहकर चुप करा दिया था कि जिसे चाहेंगे, उसे टिकट देंगे और वही जीतकर आएगा, क्योंकि वोट तो पीएम मोदी के नाम पर ही पड़ेगा। इस क्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ की राय की भी अनदेखी की गई। यह बात संगठन में पन्ना प्रमुख से लेकर बूथ प्रभारियों के स्तर पर निगेटिव पड़ी क्योंकि वे आयातित प्रत्याशियों या उनके संदेश रूपी आदेशों से असहज थे।

सीएम योगी की आपत्ति वाली सूची के ढाई दर्जन प्रत्याशी हारे

लोकसभा चुनाव परिणाम में यूपी के आंकड़े ने भाजपा के थिंक टैंक को झकझोर कर रख दिया है। इस पर गंभीर चिंतन-मंथन का दौर अभी आरंभिक दौर में हैं कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का कुशल प्रशासन व प्रभाव होने के बावजूद भी उनके सुझाव को भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने टिकट बंटवारे में स्वीकार क्यों नहीं किया? यह समाज में नकारात्मक तौर पर तैर रहा है और निचले स्तर तक यह बात चर्चा में है। आरएसएस जुड़े सूत्रों ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने 34 ऐसे नामों की सूची भाजपा शीर्ष नेतृत्व को सौंपी थी जिसमें उन्होंने कहा था कि ये प्रत्याशी उत्तर प्रदेश में जीतने की स्थिति में नहीं है। उनकी बात को न केवल दरकिनार कर दिया गया बल्कि उन्हें विश्वास में लिए बिना ही टिकट वितरण किए गए जिसका परिणाम यह हुआ कि सीएम की आपत्ति वाली सूची के 30 प्रत्याशी हार गए।

दिल्ली रवाना होने से पहले सीएम योगी ने ली अहम बैठक

यूपी के सीएम आवास पर गुरूवार को अहम बैठक हुई। इसमें राज्य के तमाम कद्दावर माने जाने वाले मंत्री मौजूद रहे। राज्य के लोक निर्माण मंत्री और पीलीभीत से चुनाव जीतने वाले जितिन प्रसाद, कन्नौज से हारने वाले सुब्रत पाठक, मैनपुरी से चुनाव हारने वाले मंत्री जयवीर सिंह, गठबंधन के साथी और सरकार में मंत्री संजय निषाद भी बैठक में मौजूद रहे। इस बैठक के बाद सीएम य़ोगी दिल्ली के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि बैठक में मौजूदा हालात के डैमेज कंट्रोल के विकल्पों और आगे के लिए संभावित रणनीतियों पर रायशुमारी हुई। बैठक में सीएम योगी के तेवर तल्ख और गंभीर बताए गए।

वोटरों ने अहंकारी भाव में रहने वाले प्रत्याशियों को दिखाया रास्ता

चुनाव के दौरान प्रत्याशियों के प्रति नाराजगी चारों ओर मुखर थी और उसके साथ ही हर वर्ग के मतदाता को यह बात भी घर कर गई थी कि नीचे से लेकर ऊपर तक नेताओं में अहंकार बहुत है। बलिया से पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को संघ और राज्यसभा की नुमाइंदगी की पक्षधर रहा लेकिन टिकट बंटवारे में इस फीडबैक की अनदेखी की गई। बलिया में संगठन से जमीनी तौर पर शुरूआती जीवन से ही जुड़े रहे निवर्तमान सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त का टिकट काटे जाने को संघ की नाफरमानी माना गया। मस्त भाजपा के वही किसानी पृष्ठभूमि वाले तुरूप का इक्का थे जिसने कभी मिर्जापुर में जाकर भाजपा की ओर से सपा के फूलन देवी को हराया था। नीरज शेखर का गुमान था कि उनके पिता की भांति बलिया के लोग उन्हें भी सिरमाथे पर बिठाएंगे लेकिन हुआ नहीं। इसी तरह संजीव बालियान, स्मृति ईरानी और अजय मिश्रा ‘टेनी’ जो कि अहंकार के प्रतीक बन कर उभरे हुए थे और चुनावी नतीजों में अब गायब हो गए।

आयातित नए चेहरे बने भाजपा के मूल वोटरों की नाराजगी की वजह बने

भाजपा ने इस बार के चुनाव में कई आयातित चेहरों को ऐन वक्त पर टिकट थमा दिया जिसे भाजपा के संगठन निचले पायदान वालों के साथ ही कोर भाजपाई वोटरों ने भी कबूल नहीं किया। रायबरेली में कांग्रेस से आने वाले दिनेश की फजीहत हुई तो अंबेडकर नगर में बसपा से आए रितेश पांडे को भी भाजपा का मूल वोटर स्वीकार नहीं कर। ऐसा ही उदाहरण प्रयागराज का है जहां नीरज त्रिपाठी को टिकट दे दिया जिसे स्थानीय संगठन में जबरन थोपा हुआ माना गया। कुछ बड़बोलेपन वाले नेता दांत खोंसिया रहे है जैसे अयोध्या में लल्लू सिंह की हार के साथ ही राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र का बेटा भी श्रावस्ती में बुरी तरह हारा।

प्रयागराज लोकसभा सीट पर हार के बाद भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने बड़ा हमला बोला है। कहा कि मेरी सीट को लेकर प्रदेश संगठन ने केन्द्रीय संगठन के मन में भ्रांतियां पैदा की।
फाइल फोटो

रीता बहुगुणा जोशी ने भी चुनावी रिजल्ट के बाद बोला हमला

प्रयागराज लोकसभा सीट पर हार के बाद भाजपा नेता रीता बहुगुणा जोशी ने बड़ा हमला बोला है। कहा कि मेरी सीट को लेकर प्रदेश संगठन ने केन्द्रीय संगठन के मन में भ्रांतियां पैदा की। प्रयागराज सीट पर मेरे परिवार का 80 साल का इतिहास रहा है। पार्टी ने अंतिम समय में टिकट दिया। नीरज त्रिपाठी की क्षेत्र में पकड़ नहीं थी और ना ही उनके पास चुनाव लड़ने का अनुभव था। अंतिम समय में टिकट मिलने की वजह से नीरज को समय नहीं मिला और वो चुनाव हार गए। संगठन को जैसा चुनाव लड़ाना था वैसा नहीं लड़ाया गया वर्ना चुनाव जीता जा सकता था।

राष्ट्रवादी चुनावी रणनीति के जानकार की बेबाक टिप्पणी

भाजपा के लिए संघ की चुनावी रणनीतिकारों के काफी करीबी समझे जाने वाले गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि प्राध्यापक डॉ. शैलेश सिंह चौहान यूपी में भाजपा की इस ताजा फजीहत पर खुलकर अपनी राय रखते हैं। कहते हैं कि भाजपा के साथ पूरे विश्वास के साथ जुड़े लोगों को इस बार टिकट बंटवारे में अपने साथ विश्वासघात हुआ दिखा जिसकी झलक इस नतीजे में दिखी है। इसलिए तत्काल भाजपा के रणनीतिकारों को संभलना जरूरी है। 2019 की तुलना में इस बार सातों चरण मिलकर लगभग 3 प्रतिशत मतदान कम होने की वजह क्या रही। वे कौन लोग थे जो वोट डालने नहीं निकले, यह प्रश्न भाजपा को मध्य आय वर्ग के बीच ले जाना चाहिए कि क्यों वोटरों में चुनाव के प्रति कोई आकर्षण नहीं रह गया था। भाजपा जैसे संगठन में लोग राष्ट्रीयता के विचार से जुड़ते हैं और किसी व्यक्ति से नहीं। इस दल का जो मूल विचार है अंत्योदय, एकात्म मानव दर्शन उस विचार को पोषित करने का कार्य अगर ऐसा ना हुआ तो यह भारतीय जनता पार्टी का मात्र नुकसान नहीं है बल्कि यह इस देश का नुकसान है। नतीजा यह होगा कि जो सांस्कृतिक राष्ट्र बनाने का जो सपना संघ या भाजपा से जुड़े लोग देखते थे या देखते हैं वह अधूरा ही रह जाएगा। अभी समय है, सुधर जाएं क्योंकि आने वाला समय भारतीय जनता पार्टी के लिए बहुत ही चुनौतीपूर्ण हो सकता है। समय रहते नहीं सुधरे और अपने मूल कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं किया,अहंकार को नहीं त्यागा, पैराशूट कल्चर नहीं रुका तो परिणाम भयावह होंगे।

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