बुरी आत्माओं से मुक्ति और विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं का पारंपरिक मुखौटा नृत्य, वाद्य यंत्रों की गूंज से गुंजायमान हुई बुद्ध नगरी

बुरी आत्माओं से मुक्ति और विश्व शांति के लिए बौद्ध भिक्षुओं का पारंपरिक मुखौटा नृत्य, वाद्य यंत्रों की गूंज से गुंजायमान हुई बुद्ध नगरी

गयाजी : बोधगया स्थित भूटान मोनास्ट्री में तीन दिवसीय पारंपरिक मुखौटा नृत्य महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ।

बौद्ध भिक्षुओं और लामाओं ने रंग-बिरंगे परिधानों और वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर नृत्य करते नजर आए

इस अवसर पर भूटान से आए बौद्ध भिक्षुओं और लामाओं ने रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे होकर मुखौटा नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल,नगाड़ा और अन्य पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर लामा आकर्षक नृत्य करते नजर आए, जिससे पूरी बुद्ध नगरी आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठी।

मुखौटा नृत्य से बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां होती है दूर

मोनास्ट्री प्रभारी सोनम दोरजे ने बताया कि यह आयोजन पिछले 15 वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बौद्ध धर्म में भी भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों की मान्यता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि मुखौटा नृत्य करने वाले सभी लामा शांतिदूत होते हैं और उनके नृत्य से आसपास की बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां दूर भाग जाती हैं, जिससे क्षेत्र में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

इस पारंपरिक नृत्य महोत्सव को देखने के लिए अमेरिका, भूटान, वियतनाम, तिब्बत समेत कई देशों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक बोधगया पहुंचे हैं। यह कार्यक्रम अगले तीन दिनों तक चलेगा।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

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