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Godda: झोपड़ी में रहने को मजबूर आदिवासी परिवार

प्रधानमंत्री आवास योजना का नहीं मिला लाभ

गोड्डा : झोपड़ी में रहने को मजबूर- झारखंड के ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को लेकर

सरकार लाख दावे कर रही हो लेकिन हकीकत बिल्कुल उलट है.

प्रधानमंत्री मोदी का सपना है सबका आवास हो अपना. हालांकि राजौन आदिवासी टोला में योजना फेल है.

यहां वही होगा जो मुखिया, पंचायत सचिव, अधिकारी, कर्मचारी व प्रतिनिधि चाहेंगे.

झोपड़ी में रहने को मजबूर: मूलभूत सुविधाओं से वंचित

जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर मेहरमा प्रखंड क्षेत्र के धनकुड़िया पंचायत के

रजौन आदिवासी टोला में करीब आदिवासियों की 70 घर है.

जहां के आदिवासी देहाडी मजदूरी पर निर्भर है.

लेकिन इस गांव में आज भी आदिवासी समाज के लोग सरकार की मूलभूत सुविधाओं से वंचित है.

यहां सिर्फ राशन कार्ड बनाया गया है ना तो यहां पानी की सुविधा है ना ही

आदिवासी परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है आज भी आदिवासी समाज

झोपड़ी में रहने को मजबूर है आदिवासियों परिवारों को आवास ना मिलने से वह झोपड़ियों में गुजारा कर रहे हैं.

झोपड़ी में रहने को विवश

रजौन गांव में करीब आदिवासियों की 70 परिवार निवास कर रहे हैं लेकिन आधे से ज्यादा

आदिवासी परिवारों को आवास नहीं मिल पाए जिससे इन्हें झोपड़ी में फटी पुरानी त्रिपाल डालकर रहने को विवश है.

गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं. आदिवासी परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए तरस रहे हैं.

क्या कहते हैं ग्रामीण

आदिवासी महिला मक्कू मुर्मू कहती है जब इलेक्शन होता है तब पैर पकड़ कर प्रणाम करता है.

और कहता है आप लोगों का इंदिरा आवास कर देंगे, लेकिन जाने के बाद

आज तक हमलोगों को देखने तक कोई नहीं आया.

झोपड़ी में रहने को मजबूर: बाथरूम दिया लेकिन पानी नहीं मिला

गांव के ग्रामीण संझलि मुर्मू कहती है- राशन कार्ड में नाम है लेकिन इंदिरा आवास आज तक नहीं मिला.

हम लोग कैसे रहेंगे. आप भी देख लीजिए मेरा घर कैसा है.

मुर्मू कहती है कितना मुखिया आया और गया, लेकिन आज तक आदिवासियों के प्रति कुछ नहीं सोचा.

यहां पानी की समस्या है. हमलोगों को बाथरूम मिला है, लेकिन इससे क्या होगा. पीने के लिए पानी नहीं है. हम लोगों का 70 घर है जिसमें मात्र एक ही चापाकल दिया गया है.

मरांगमाय मरांडी कहती हैं कि किसी भी आदिवासी परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना में शामिल नहीं किया गया है. आज भी झोपड़ी में रह रहे हैं. राशन छोड़ कोई दूसरी योजनाओं का आज तक फायदा नहीं मिला है.

रिपोर्ट: प्रिंस

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