कुड़मी समाज के एसटी में शामिल करने की मांग को आदिवासियों ने नकारा, निकाली आक्रोश रैली

Bokaro: जिले में कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) में शामिल करने की मांग के खिलाफ आदिवासी समाज का बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला। जिले के विभिन्न इलाकों से आए हजारों की संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग बिरसा मुंडा नया मोड़ चौक पर एकत्रित हुए और वहां से डीसी कार्यालय तक आक्रोश रैली निकाली।

आदिवासियों के हक और अस्तित्व पर है हमला :

रैली के दौरान आदिवासी संगठनों ने सरकार को चेताया कि वे अपनी संस्कृति, पहचान और परंपरा से समझौता नहीं करेंगे। नेताओं ने कहा कि कुर्मी समाज को एसटी सूची में शामिल करने की मांग आदिवासी हक और अस्तित्व पर हमला है। मौजूद लोगों ने कहा कि कुड़मी समाज से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है, लेकिन जब हमारी पूजा-पद्धति, भाषा, रहन-सहन और परंपरा अलग है, तो उन्हें आदिवासी कैसे माना जा सकता है? जंगल और प्रकृति से हमारा रिश्ता है, यही हमारी पहचान है। इस पर किसी तरह की चोट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

विभिन्न इलाकों से पहुंचे आदिवासी समुदाय के लोग :

रैली में आदिवासी पारंपरिक परिधान और हथियारों से सुसज्जित होकर शामिल हुए। भीड़ की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी थी। डीसी कार्यालय परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पुलिस ने अतिरिक्त बलों की तैनाती की थी। वहीं अग्निशमन वाहन और वज्रवाहन भी तैनात किए गए थे। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने ब्रेकेटिंग तोड़कर डीसी कार्यालय परिसर में प्रवेश कर लिया।

डीसी को सौंपा ज्ञापन :

आदिवासियों ने डीसी को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा और स्पष्ट कहा कि यदि सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी, तो राज्यभर में आंदोलन और तेज किया जाएगा। रैली राज्यव्यापी आदिवासी आक्रोश महारैली अभियान का हिस्सा है, जो 19 सितंबर को चाईबासा से शुरू हुई थी और 25 अक्टूबर को घाटशिला में समाप्त होगी।

रिपोर्टः चुमन कुमार

Saffrn

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