रांची: झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भावुक नजर आए। सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही उन्होंने शोक प्रस्ताव के दौरान अपने पिता और झारखंड आंदोलन के पुरोधा, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ सांसद दिवंगत शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही, हाल ही में दिवंगत हुए राज्य के स्कूली शिक्षा एवं निबंधन मंत्री रामदास सोरेन को भी उन्होंने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
सीएम ने कहा कि “गुरुजी (शिबू सोरेन) का निधन झारखंड के लिए एक युग का अंत है। उन्होंने जल-जंगल-जमीन और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन संघर्ष में समर्पित कर दिया। महाजनी प्रथा, जमींदारों के शोषण और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ उन्होंने न केवल आंदोलन खड़ा किया बल्कि आदिवासी समाज में शिक्षा, सामाजिक सुधार और राजनीतिक चेतना जगाने का काम किया। राजनीति को उन्होंने कभी सत्ता का साधन नहीं माना, बल्कि समाज सुधार का माध्यम माना।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुजी का योगदान झारखंड ही नहीं बल्कि देश की राजनीति में अमिट छाप छोड़ गया है। उन्होंने कई बार लोकसभा और राज्यसभा का प्रतिनिधित्व किया और तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए राज्य को नई दिशा देने का काम किया।
इसके अलावा सीएम हेमंत सोरेन ने अपने कैबिनेट सहयोगी और स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनका निधन झारखंड की राजनीति में अपूरणीय क्षति है। रामदास सोरेन को उन्होंने सहज, सरल और संघर्षशील नेता बताया। उन्होंने कहा कि “रामदास सोरेन मजदूरों और विस्थापितों की आवाज बने। उन्होंने हमेशा आमजन की लड़ाई को अपनी प्राथमिकता दी। धारशिला विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे और झारखंड आंदोलन में उनका योगदान अविस्मरणीय है।”
सीएम ने पूर्व राज्यपाल और पूर्व राज्यसभा सांसद सतपाल मलिक, 1971 युद्ध के नायक कैप्टन डी.के. परुलकर, वरिष्ठ पत्रकार हरिनारायण सिंह समेत अन्य दिवंगत हस्तियों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं में जान गंवाने वालों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की।
Highlights


















