रांचीः मानव तस्करी की शिकार झारखंड की दो युवतियों और 8 बच्चों को एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र, नई दिल्ली झारखंड भवन और बाल कल्याण संघ के सहयोग से मुक्त कराया गया।
मुक्त कराए गए सभी बालक-बालिकाओं को गरीब रथ स्पेशल ट्रेन से नई दिल्ली से रांची लाया गया है। एस्कॉर्ट टीम में एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र के परियोजना समन्वयक सुनील कुमार गुप्ता, परामर्शी निर्मला खालखो राज्य संसाधन केंद्र के परामर्शी प्रकाश सिंह शामिल हैं।
गौरतलब है कि स्थानिक आयुक्त मस्तराम मीणा के निर्देशानुसार एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र, नई दिल्ली के द्वारा लगातार दिल्ली के विभिन्न बालगृहों का भ्रमण कर मानव तस्करी के शिकार, भूले- भटके या किसी के बहकावे में फंसकर असुरक्षित पलायन कर चुके बच्चे, युवतियों को वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है। इसे लेकर दिल्ली पुलिस, बाल कल्याण समिति, नई दिल्ली एवं सीमावर्ती राज्यों की बाल कल्याण समिति से लगातार समन्वय स्थापित कर मानव तस्करी के शिकार लोगों की पहचान कर मुक्त कराया जा रहा है। उसके बाद मुक्त लोगों को सुरक्षित उनके गृह जिला भेजने का कार्य किया जा रहा है, जहां उनका पुनर्वास किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि मानव तस्कर प्रलोभन देकर इन्हे दिल्ली ले गए और मोटी रकम लेकर बेच दिया गया था। जिन घरों में इन्हे काम पर लगया गया वहां इन्हे मानसिक और शारीरिक यातना दिया जा रहा था।
नोडल पदाधिकारी एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र, नई दिल्ली की नचिकेता ने बताया कि एक बालक पिछले दो वर्ष से दिल्ली के बालगृह में रह रहा था। बालक का पिता नहीं है जबकि मां ने दूसरी शादी कर ली है। इसी तरह एक बालिका की मां ने बालिका के पिता को छोड़ दूसरे व्यक्ति से शादी कर ली, सौतेले पिता और मां ने ही बालिका को दो बार मानव तस्करों के हवाले किया।

विभाग ने जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को पत्र भेजकर इन बच्चों पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया है। जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, गुमला के प्रयास से एक बालक का विद्यालय में नामांकन करवाया गया।
स्थानिक आयुक्त मस्तराम मीणा के निर्देशानुसार झारखंड भेजे जा रहे बच्चों को जिले में संचालित कल्याणकारी योजनाओं स्पॉन्सरशिप, फॉस्टरकेयर, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से जोड़ते हुए उनकी ग्राम बाल संरक्षण समिति (VLCPC)) के माध्यम से सतत निगरानी की जाएगी। इस हेतु विभाग की ओर से प्रधान सचिव महिला बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग को पत्र लिखा जा चुका है, ताकि इन बच्चों को पुन: मानव तस्करी के चंगुल से बचाया जा सके और झारखण्ड राज्य में मानव तस्करी पर रोक लगायी जा सके।
रिपोर्टः मदन


















