Union Budget 2026: Infrastructure Risk Guarantee Fund, नए Freight Corridor और Carbon Capture पर Nirmala Sitharaman का बड़ा फोकस

Union Budget 2026 में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड, नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जलमार्ग, कार्बन कैप्चर और शहरों के विकास के बड़े ऐलान किए।


Union Budget 2026:इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार देने के लिए Risk Guarantee Fund

Union Budget 2026 पेश करते हुए वित्तमंत्री Nirmala Sitharaman ने इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूती देने के लिए Infrastructure Risk Guarantee Fund स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसका उद्देश्य यह है कि कर्ज लेने वालों को आसानी से फाइनेंस उपलब्ध हो सके और परियोजनाओं से जुड़े जोखिम को कवर किया जा सके।
वित्तमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में RITES जैसे संस्थान इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग में मजबूत भूमिका निभाकर उभरे हैं। अब सरकार चाहती है कि CPSU को बड़े पैमाने पर पूंजी उपलब्ध कराई जाए, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की गति बनी रहे।


Key Highlights

  1. Infrastructure Risk Guarantee Fund की स्थापना का प्रस्ताव

  2. नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और 22 जलमार्ग विकसित होंगे

  3. वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम

  4. Carbon Capture के लिए 5 साल में 20,000 करोड़ रुपये

  5. टियर-2 और टियर-3 शहरों के विकास के लिए 5,000 करोड़ का पैकेज


Union Budget 2026:लॉजिस्टिक्स और कार्गो नेटवर्क को मजबूत करने की योजना

बजट में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए कई अहम घोषणाएं की गईं। वित्तमंत्री ने बताया कि नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जो पूर्व को पश्चिम से जोड़ेंगे। इसके साथ ही अगले पांच वर्षों में 22 नए जलमार्ग विकसित करने का प्रस्ताव है।
राष्ट्रीय जलमार्ग परियोजना के तहत ओडिशा में जोड़ा, तालचेर, अंगुल, कलिंगनगर और पारादीप को औद्योगिक केंद्रों से जोड़ा जाएगा। इससे कार्गो मूवमेंट सस्ता और तेज होगा।
इसके अलावा, वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम स्थापित किया जाएगा, ताकि घरेलू जलमार्गों का बेहतर उपयोग हो सके। तटीय कार्गो प्रमोशन स्कीम के जरिए सड़क परिवहन से जलमार्ग की ओर शिफ्ट को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक तटीय परिवहन की हिस्सेदारी 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत की जाए।

Union Budget 2026:Carbon Capture, Tier-2 शहर और शहरी विकास पर जोर

वित्तमंत्री ने कार्बन कैप्चर यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज को भविष्य की अहम तकनीक बताया। उन्होंने कहा कि पावर, स्टील, सीमेंट, रिफाइनरी और केमिकल जैसे पांच प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके लिए अगले पांच वर्षों में 20,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शहरी विकास को लेकर वित्तमंत्री ने कहा कि शहर भारत के आर्थिक इंजन हैं और अब टियर-2 व टियर-3 शहरों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। धार्मिक और पर्यटन शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा, ताकि उनकी आर्थिक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
इसके लिए अगले पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का प्रस्ताव रखा गया है, जिसे तेज गति से लागू किया जाएगा और सुधारों के साथ वित्तीय संरचना उपलब्ध कराई जाएगी।

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