बिहार में कांवरिया यात्रा: सम्राट सरकार के इंतजामों ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

‘बोल बम‘ के जयकारों के बीच बिहार में कांवरिया यात्रा: सम्राट सरकार के इंतजामों ने जीता बाहरी श्रद्धालुओं का दिल

सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के दिव्य जयकारे गूंज रहे हैं। सुल्तानगंज से जल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर कदम बढ़ा रहे शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। लेकिन इस बार बिहार में कांवरिया यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं के चेहरे पर केवल बाबा की भक्ति ही नहीं, बल्कि एक अनोखा संतोष भी दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे दूर-दराज के राज्यों से आए लाखों कांवड़ियों के लिए बिहार की धरती इस बार सेवा और अपनेपन का केंद्र बन गई है।

कांवरियों का कहना है कि जब सरकार श्रद्धालुओं को ‘देव तुल्य’ मानकर सुविधाएं देती है, तो पैदल यात्रा का कष्ट अपने आप आधा रह जाता है। इस बार प्रशासनिक मुस्तैदी का ही नतीजा है कि जगह-जगह साफ-सफाई, पीने का साफ पानी, मेडिकल कैंप और रात के समय रोशनी का ऐसा शानदार प्रबंध किया गया है, जिसने लंबी और कठिन यात्रा को बेहद आसान बना दिया है।

बिहार में कांवरिया यात्रा: फूलों की बारिश ने जीता दिल

उत्तर प्रदेश के कौशांबी के रहने वाले अजित पटेल पटना से देवघर के लिए कांवर लेकर जा रहे हैं। उनकी आंखों में बाबा भोले के लिए असीम श्रद्धा तो है ही, साथ ही उनकी जुबान पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के लिए तारीफों के पुल हैं। अजित कहते हैं, “बिहार में आकर बाबा भोलेनाथ के लिए जल उठाना इस बार बहुत कुछ दे गया। यहाँ कांवरियों को जो सुविधाएं मिली हैं और हम श्रद्धालुओं पर जिस तरह आसमान से फूलों की बारिश की गई है, उसने हमारा दिल जीत लिया।”

अजित के साथ ही कौशांबी के रहने वाले शीतल प्रसाद भी बाबा के दर्शन के लिए आए हैं। शीतल पिछले 18 साल से लगातार सावन के महीने में बिहार से जल उठाने आ रहे हैं। उनका कहना है, “मैं इतने सालों से आ रहा हूँ, लेकिन यह पहली बार है जब कांवरियों के सुख-सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सम्राट सरकार ने इतने बेहतरीन इंतजाम किए हैं। यहाँ आकर पहली बार बहुत ज्यादा खुशी मिली है।”

बिहार में कांवरिया यात्रा: सीएम सम्राट चौधरी की सराहना

सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के सिंगरौली से दूसरी बार बाबा भोले के दर्शन करने आईं लालती देवी तो बिहार के आतिथ्य की दीवानी हो गई हैं। भावुक होते हुए लालती देवी कहती हैं, “सम्राट भईया ने हम श्रद्धालुओं का पूरा ध्यान रखा है। जगह-जगह पीने का पानी, नाश्ते की व्यवस्था, मेडिकल कैंप और सुरक्षा के कड़े इंतजामों ने हमारी यात्रा को बहुत आरामदायक बना दिया है। सम्राट भईया के इस अपनेपन के कारण अब हम जैसी श्रद्धालु बहनें हर साल बिहार आकर बाबा के दर्शन करेंगी। सच कहूँ तो अब यहाँ से जाने का मन ही नहीं कर रहा है।”

बिहार की संस्कृति और सेवा की अनोखी मिसाल

सावन का यह महीना केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह बिहार के आतिथ्य, सेवा भावना और उसकी समृद्ध संस्कृति का एक खूबसूरत उदाहरण बन गया है। जब दूसरे राज्यों से आए शिवभक्त बिहार की सीमाओं से गुजरते हुए यहाँ की व्यवस्थाओं की तारीफ करते हैं, तो यह पूरे बिहार राज्य के लिए एक गौरव का क्षण होता है। जब सरकार और प्रशासन मिलकर जनता और मेहमानों की सेवा में खड़े होते हैं, तो आस्था का यह मार्ग सचमुच सुगम और आनंदमय हो जाता है।

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